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क्या कुछ बदलेगा?

Posted On: 11 Feb, 2012 Others में

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आप में से अक्सर लोग मेरे इस लेख को पढ़ कर मुझे निराशावादी कहेंगे, और शायद अपने विषय को लेकर मै हूँ भी.
 
मै ऐसे विषयों पर कम ही लिखता हूँ जो कि “फ्लेवर ऑफ़ थे टाइम” होते हैं, यानि जिन पर मंच पर बहुत सारे लोग लिखते हैं, ज़रुरत ही नहीं होती क्योंकि आपको बहुत सारे पक्ष …………., पर इस बार लीक से हट कर उत्तर प्रदेश के चुनाव पर लिख रहा हूँ.
 
पहले   चरण के चुनाव हो चुके हैं और दूसरा आज होने जा रहा है, वोटिंग का प्रतिशत भी पिछले चुनाव से अच्छा है, जो कि बहुत अच्छी बात है पर मेरे मन में ये जिज्ञासा है कि क्या इस चुनाव के बाद कोई अंतर पड़ेगा? और मेरी  इस शंका का आधार भी है.
  
मै इकोनामिक टाइम्स कि एक रिपोर्ट देख रहा था जिसमे लिखा था कि पहले चरण के ८६७ प्रतियाशीयो   में से २८४ के एफिडेविट के आधार पर उनमे से १०९ ऐसे हैं जिनके आपराधिक रिकार्ड है और इसी डेटा ने  मुझे …………..
 
 इनमे से अक्सर लोग चुन कर सदन में आयेंगे, और फिर वही हमारे लिए नीतियां तय करेंगे, वो जिनको जेल में होना चाहिए, उन्हें ही बड़े बड़े  अधिकारी  सलाम ठोकेंगे.
 
 आज प्रदेश कि चार बड़ी पार्टियों में से “क” शासन में है, और बाकी “ख”, “ग”, और “घ” उसे गद्दी से हटाने के लिए जोर शोर से प्रयास कर रही है, पर क्या इनमे से कोई ऐसी है जिसे हम दूसरो से अलग मान लें,? किसी का चरित्र दुसरे से अलग है? एक कि नेता को अपनी और अपने परिवार के साथ हाथियों कि मूर्तियाँ  लगवाने में ही ………….., दूसरी जो के केंद्र में है उनके युवराज बड़ा प्रयास कर रहे हैं पर आज उनका “हाथ” जो कि आम आदमी का हाथ होने का दावा करता था, उसी हाथ से आम आदमी का गला जिस तरह घोटा जा रहा है, और उसी हाथ किन किन तरह के घोटालो में जुड़ा है वो जग ज़ाहिर है, एक पहलवान जी और उनके सुपुत्र  अपनी साइकिल को फिर से गद्दी पर देखना चाहते हैं, केंद्र को समर्थन देते हैं और प्रदेश में उन्हें गाली, एक खास धर्म के लोगो कि तरफ फिर से उनकी प्रेम दृष्टि पड़ी है ताकि इस बार सत्ता……, और अंत में वो पार्टी जो कि दूसरो से हट कर के होने दावा करती थी, पर उसका हाल अब क्या कहें- भ्रष्टाचार पर सबसे अधिक आवाज़ वही से उठ रही थी पर दूसरी पार्टी से निकले गए भ्रष्ट लोगो को पार्टी में लेने में उन्हें कोई हिचक नहीं हुई, और खुद उनके शासित प्रदेश में भ्रष्टाचार कम नहीं है. अक्सर उनके मौका परस्ती नज़र आ जाती है. हाल ये है कि आज किसी पार्टी को देख लें अक्सर में ऐसे लोग नज़र आयेंगे जो कि पहले किसी और में थे, किसी नैतिकता कि तो बात ही नहीं है अब,
 
 
कभी परिवार वाद केवल एक पार्टी कि खासियत थी पर अब कौन से पार्टी है जो कि अपने आपको इससे अलग कह सके? सब के परिवार वाले ……………..
 
 राजनीति से बढ़ कर अब कोई लाभ दायक  बिजनेस है ही नहीं, एक बार विधायक / सांसद  बन जाये तो फिर न जाने कितनी पुश्तें ………
 
 अब, जब ऐसे ही लोग फिर से चुन कर वापस आयेंगे ( जनता के पास विकल्प भी नहीं है क्योंकि अच्छे लोग राजनीति में जाते नहीं या बेचारे हिम्मत ही नहीं करते और जाने के बाद वो भी …………, और जनता के पास सांपनाथ और नागनाथ ही जैसे विकल्प  होते हैं) तो फिर क्या बदलेगा, और इसी लिए मै फिर से सोच रहा हूँ कि इस चुनाव से क्या बदलेगा?
क्या सच में कुछ बदलेगा?

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73 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

seemakanwal के द्वारा
December 10, 2012

क्या कहा जाये उम्मीद पे दुनिया कायम है .

jlsingh के द्वारा
December 4, 2012

आदरणीय अबोध जी, नमस्कार! काफी दिनों बाद आपका संतोष जी के ब्लॉग के माध्यम से जे जे पर अवतरण हुआ है! शायद आप काफी ब्यस्त हैं! गुरुदेव राजकमल जी तो मंच छोड़ कर जा चुके हैं…. आप भी… यदा कदा दर्शन दे दिया करें! सादर आभार!

follyofawiseman के द्वारा
April 24, 2012

सही है…आप कह रहे हैं तो सच ही कह रहे होंगे…..अबोध बालक झूठ थोड़े न बोलेगा…..

rajeevsharma के द्वारा
April 14, 2012

सत्य कथन

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
April 11, 2012

मोस्टली गायब रहेंगे ये क्या बात हुयी अबोध जी .. चाँद निकले तो गलियों में आया करो रात रानी खिली देख जाया करो दिल सनेही बना के ना भरमाइये बोल कुछ मधुर रोज जाया करो भ्रमर ५

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    April 11, 2012

    बोल कुछ मधु वचन रोज जाया करो

abodhbaalak के द्वारा
April 8, 2012

kya karen bhrmr bhai aaj kal life kuchh alag hi …………. dekhte hain, koshish karte hain ki phir se ek baar manch par …… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 21, 2012

जय श्री राधे ११ फरवरी के बाद आप भी भ्रमर से उड़ चले ये क्या बात है ?? आइये पधारिये … कुछ तो परिवर्तन आये लेकिन जहां विकल्प और नहीं जनता भी मजबूर करे तो क्या प्रिय अबोध जी ?? भ्रमर ५

    abodhbaalak के द्वारा
    April 8, 2012

    जी भ्रमर जी क्या करें sar, वयस्त और काम के मारे हम बेचारे ……………….. देखते हैं, अब फिर से एक बार कोशिह्श करते हिं की …….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

D33P के द्वारा
March 17, 2012

ये राजनीती का खेल है जो चलता ही रहेगा और हम देखते ही रहेंगे ,गुंडे मवाली चोर राज करेंगे और जनता बेबसी से उनका खेल देखती रहेगी ,ये जनता के पैसो से अपनी तिजोरियां भरते रहेगे और जनता पिसती रहेगी !वोट देने की परम्परा है तो वो भी देंगे .किसी को तो देंगे ,,उसमे विकल्प ही कहाँ बचा है सभी महारथी है !एक नाग है एक सांप है दंक्ष तो दोनों ने मारना है

    abodhbaalak के द्वारा
    March 19, 2012

    दीप्ति जी आप बिलकुल उसी अंदाज़ में सोच रही हैं जी मई ……………… आभारी हूँ की आपने अभी भी मुझे याद रखा……….. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 17, 2012

अबोध जी नमस्कार, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्……. नया लेकर कब तक आ रहे हैं…..

    abodhbaalak के द्वारा
    March 17, 2012

    आपके धन्यवाद के लिए dhanyavaad, एक बार फिर से मंच पर रेगुलर होने का प्रयास कर रहा हूँ पर समय है की ………… देखते hain, प्रयास karunga की jaldi hi kuchh

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 13, 2012

अबोध भईया, क्षमा करना… आप तो निरे अबोध निकले. कहाँ चले गए थे… कहीं दिखाई नहीं दिए.

    abodhbaalak के द्वारा
    March 13, 2012

    मैंने पहले ही कहा था की मेरी अनुपस्थ्ती ………… खैर अभी भी पूरी तरह से मंच पर नहीं आ पाया हूँ पर प्रयास रहेगा की पूरी तरह से गयब भी न हो जून.

February 20, 2012

अबोध भाई नमस्कार ! आपने जो निष्कर्ष नीकाला है की जब ऐसे ही लोग फिर से चुन कर वापस आयेंगे ( जनता के पास विकल्प भी नहीं है क्योंकि अच्छे लोग राजनीति में जाते नहीं या बेचारे हिम्मत ही नहीं करते और जाने के बाद वो भी …………, और जनता के पास सांपनाथ और नागनाथ ही जैसे विकल्प होते हैं) तो फिर क्या बदलेगा, और इसी लिए मै फिर से सोच रहा हूँ कि इस चुनाव से क्या बदलेगा? क्या सच में कुछ बदलेगा?”; मेरा मानना है की कुछ बदलनेवाला नहीं पार्टी बदलेगी लेकिन जब तक अपना नेता नहीं बदलेगा देश की तक़दीर नहीं बदलनेवाली….बहुत उम्दा विश्लेशन…

    abodhbaalak के द्वारा
    February 26, 2012

    सूर्य जी बहुत दिन के बाद आपके कमेन्ट का उत्तर दे रहा हूँ, क्षमा चाहता हूँ हो सकता है की आने वाले भविष्य में कुछ बदले पर अभी तो ……. मेरा निरास्बवादी होना गलत टोनही है न ?

    smtpushpapandey के द्वारा
    March 19, 2012

    अबोध जी कृपया मेरी रचना विवाह में जाती बंधन सामाजिक बंधन parivaarik बंधन अनेतिक इस रचना को भी समय दे बहुत बढ़िया और अच्छा लेख धन्यवाद

अलीन के द्वारा
February 16, 2012

सादर नमस्कार! कृपया मेरी सच्ची प्रेम कहानी पर अपना बहुमूल्य सुझाव और प्रतिक्रिया जरुर दीजियेगा…. मेरी सदा-एक अधूरी परन्तु सच्ची प्रेम कहानी

    abodhbaalak के द्वारा
    February 19, 2012

    ह्म्म्म अलीन जी प्यार पर आजकल पढना और कहना अच्चना नहीं लगता, पर आप कह रहे हैं तो देखते हैं. प्रयास रहेगा की पढ़ कर कुछ कहने का सामर्थ्य जूता पाऊं.

anamika7577 के द्वारा
February 13, 2012

सच मानिए की आज एक पढ़ा लिखा नागरिक इस असमंजसता के कारन वोट न देना ही उचित समझता है लेकिन दुःख की बात ये है की ऐसा करने पर भी उसे ऐसे सत्ता धारियों को प्रशासन में देखना पड़ता है. कोई विकल्प नज़र नहीं आता. कोई भी ईमानदार नेता नहीं मिलता आज की जनता को.

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    अनामिका जी समस्या तो यही है की अगर हम वोट न भी दें तो भी पहले तो हमारा वोट पद ही जाता है और दुसरे कोई न कोई चुन के आ ही जाता है. और वो जो भी होता है कैसा होता है वो तो जग जाहिर है आभार आपके विच्बर के लिए, आगे भी ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

dineshaastik के द्वारा
February 13, 2012

अबोध जी नमस्कार, आपकी शंकायें उचित हैं। किन्तु हमारे पास आशावादी बने रहने के अतिरिक्त और कोई विकल्प भी नहीं हैं। मेरा मानना है कि इस समस्या निराकरण बिना क्राँति के संभव नहीं है। परिणाम का इंतजार करिये। शायद अब मतदाता पहले की तरह बेवकूफ बनने वाला नहीं है। वह निश्चित ही अपने विवेक से सही व्यक्तियों का चयन करेगा। http://dineshaastik.jagranjunction.com/बहस

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    दिनेश जी चलने हम इंतज़ार कर लेते हैं आपके कहे के अनुसार और देखते हैं की क्या परिवर्तन आता है. :) आभार आके विचारो के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sadhana thakur के द्वारा
February 12, 2012

अबोध भाई ,बिलकुल सच कहा आपने ,आम जनता के लिए तो कोई विकल्प ही नहीं है ,समझ ही नहीं आता किसपे विश्वास करें ….

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    साधना जी मेरे निराशावादी होने का कारण भी तो यही है की कोई विकल्प ही …… चलें लोग मुझे आशा की दामन न छोड़ने की सलाह दे रहे हैं, इस्ल इए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

alkargupta1 के द्वारा
February 12, 2012

अबोध जी , आपका प्रश्न बिलकुल सही है और हम सब ही उत्तर की खोज में लगे हुए हैं किजो चुनाव होंगे उनसे क्या कुछ बदलाव होगा…..पर देखते हैं , प्रतीक्षा करते हैं क्या होता है……आप और हम सब हृदय में आशा का दीप जलाये रखें हो सकता है उस दीप कि ज्योति से कोई मार्ग प्रकाशित हो……. उत्तम आलेख

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    ह्म्म्म काश केवल अच्छा सोचने से अच्छा होता अलका दी, वास्तविकता से भागना भी तो ……. जमीनी स्तर पर जो नज़र आ रहा है वो तो कुछ बदलाव का संकेत नहीं …. आभार आपके विचारो के लिए, आगे भी अपने अनमोल विचार से ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

mparveen के द्वारा
February 12, 2012

अबोध जी नमस्कार, निराश तो सभी हैं इन राजनीतिज्ञों से लेकिन निराशा कोई समाधान नहीं है . कहते हैं की मतदान करो पर मतदान के लिए कोई योग्य उमीदवार तो दीखता नहीं . इन चुनावों के बाद क्या होगा देखो तकदीर कितनी बदलती है. हमारे भारत को हम फिर से सोने की चिड़िया के रूप में देखना चाहते हैं . कभी तो इस रात की सुबह होगी ही बस इसी उम्मीद में हैं….. बहुत अछा लिखा आपने…. पर निराशा को हावी ना होने दीजियेगा …

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    परवीन जी मेरी निराशा ठोस धरातल पर कड़ी है, जो भी प्र्तियाधि नज़र आ रहे हैं वो कैसे हैं जगजाहिर है, और उनमे से ही लोग चुन कर आयेंगे, अब अगर सच्चाई से मुंह मोडून तो ………… आभार आपके प्रोत्साहन और विचार के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

div81 के द्वारा
February 12, 2012

ये निराशा के बादल हर भारतीय दिल में उमड़ते घुमड़ते रहते है जाने कब बरसे और मौसम को साफ़ और खुशमिजाज करे | बस एक ही बात बोल सकती हूँ उम्मीद में दुनिया कायम है निराशा का दामन छोड़ के आशा जगाये रखिये इस रात की सुबह जरुर होगी हिंदुस्तान की राजनितिक तस्वीर और तकदीर जरुर संवरेगी और सुधरेगी आमीन

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    दिल को खुश rakhne को ग़ालिब ये ख्याल अच्चा है , कुछ यही ख्याल आ रह है दिल में :) चलें आ आप कह रही हैं तो उम्मीद की दामन ………………., हालांकि ज़मीनी स्थिति से ये आँख चुराना होगा http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
February 12, 2012

बहुत सुन्दर आलेख अबोध जी.यह सही है कि आज की राजनीति में विकल्प बहुत कम हैं.घूम-फिर कर वही सब चेहरे दिखाई देते हैं.पर हमें आशावादी जरूर होना चाहिए.मीनू जी ने सही कहा है कि पहले के बिहार और अभी के बिहार में काफी फर्क आ गया है.इसी तरह का सार्थक बदलाव अन्य राज्यों में भी होगा.

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    hmmmm rajeev ji आप सच कह रहे हैं की फर्क पद सकता है, बिहार का उदहारण ………….. काश ऐसा UP में भी हो आपके प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

February 12, 2012

इन चुनावों से, अथवा आते कुछ समय से तो सचमुच कोई विशेष उम्मीद नहीं है. पर आता समय अच्छा ही होगा, ऐसा मानने के कारण बन रहे हैं. जिस प्रकार आज के युवा में रोष है, और समाज में ऐसे नए विचारक भी खड़े हो रहे हैं, जो इस रोष को जोश में परिवर्तित करने में जुटे हुए हैं, उसे देखते हुए, आशाओं के तारे जगमगाने लगते हैं. .. तो देखने की बात बस यही है, की ye रोष, और जोश ठंडा न होने दिया जाए. राष्ट्र-मंगल की शुभकामनाएं सबके लिए, सादर.

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    टिम्सी जी मैंने इस चुनवा की बात की थी और इस चुनाव को लेकर तो आप भी मानती हैं की कोई उम्मीद …. भविष्य में क्या होगा वो बाद की बात है , हाँ युवाओं में जोश है, नयी चेतना है पर आजका युवा भी अब पैसे कमाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहता है, नैतिकता की बात उसे अब बहुत ज्यादा ….. अबाहर आपके विचार के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Santosh Kumar के द्वारा
February 12, 2012

अबोध जी ,.नमस्कार ये निराशावाद सबके अन्दर है ,..इस चुनाव से कुछ नहीं बदलने वाला है

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    आप तो मेरे गुरु भाई हो ही, हमारे विचार तो मिलने ही थे हो सकता है की आगे चल कर बदलाव हो पर इस चुनाव से ….. आभार ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
February 12, 2012

राजनीति से बढ़ कर अब कोई लाभ दायक बिजनेस है ही नहीं, एक बार विधायक / सांसद बन जाये तो फिर न जाने कितनी पुश्तें ……… सब से बड़ा विचार विन्दु तो यही है ही अबोध जी ..तो क्या अब किसी को वोट दिया ही नहीं जाए जैसे दौड़ में दस में एक गधा भी रहे बाकी लूले लंगड़े गधे के बीच तो वो कछुवा चाल वाले से आगे तो रहेगा ही .. रिजेक्ट क्या हम कर सकते हैं पूरा चुनाव अब सलमान साब की ही देखिये चुनाव आयोग और नियम कानून से भी ताल ठोंक रहे हैं .. हम तो इसी लिए कहते हैं की १०० में इतने बेईमान फिर भी मेरा भारत महान …आंकड़ा आप ने लिखा देखा ही ..कौन उन्हें रोकें कौन तिक्त न दे आप उसको बाहुबली और पैसा वाला कहते हैं तो वाही तो … निराशावादी आप नहीं ये वक्त सब को इसमें ठेल दे रहा है … जय श्री राधे ..सुन्दर लेख भ्रमर ५

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    भ्रमर जी क्या कहें और क्या करें समझ में नहीं आता? हालत ऐसे हिईं की निराशा ………. इश्वर से प्रार्थना है की ये स्थिति बदले, परिवर्तन की आंधी चले और …….. आभार…… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

abhishektripathi के द्वारा
February 12, 2012

सादर प्रणाम! मैं मतदाता अधिकार के लिए एक अभियान चला रहा हूँ! कृपया मेरा ब्लॉग abhishektripathi.jagranjunction.com ”अयोग्य प्रत्याशियों के खिलाफ मेंरा शपथ पत्र के माध्यम से मत!” पढ़कर मुझे समर्थन दें! मुझे आपके मूल्यवान समर्थन की जरुरत है!

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    अच्छी पहल hai आपकी, चलें मई भी apni उपस्थति ………….. par आपने इस पोस्ट ke bare me to kuchh kaha hi nahi? :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

jlsingh के द्वारा
February 12, 2012

अबोध जी, नमस्कार! आपका पोस्ट पढ़ा, सुधीजनों के विचार पढ़े. मीडिया में ख़बरें आयी …. योगी आदित्यनाथ,(सांसद बीजेपी) की भविष्यवाणी भी सुनी कि किसी की सरकार नहीं बनेगी और एक साल के अन्दर दुबारा चुनाव होगा!…. सभी यानी हमलोगों के साथ ‘वे’ भी चिंतित हैं पर उम्मीद का दामन नहीं छोड़ते …. फिर हम क्यों छोड़ें. हाँ आपकी इस बात से मैं भी सहमत हूँ कि-जनता के पास विकल्प भी नहीं है क्योंकि अच्छे लोग राजनीति में जाते नहीं या बेचारे हिम्मत ही नहीं करते और जाने के बाद वो भी …………, अच्छी पोस्ट के लिए आभार!

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    जवाहर भाई, उनकी बातें वो जाने, मई तो अपनी बात जानता हूँ, चुनाव होगा तो खर्च हमारी जेब से जाएगा, उनकी जेब से नहीं, और उनकी जेब तो वैसे ही …… आभार आपके विचार और प्रोत्साहन के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

ANAND PRAVIN के द्वारा
February 11, 2012

आदरणीय अबोध जी,नमस्कार सबसे पहले तो में निचे लिखे शशि जी के बातों से सहमत हूँ और जहाँ तक कुछ बदलने की बात है तो बदलाव तो संसार का नियम है उम्मीद रखिये जरुर बदलेगा हाँ ये बात जरुर है की इस चुनाव में ना बदले मैं बिहार से हूँ और कुछ दिनों पहले तक बिहार की राजनीतिक हालत भी यू पी के जैसी ही थी पर परिवर्तन हुआ और आज धीमी गति से ही सही यहाँ की सरकार एक अच्छी सासन व्यवस्था दे रही है कल किसी ने नहीं देखा निराशावादी ना होइए “हम भारत के लोग एक दिन जरुर बढ़ेंगे” हमें बढना होगा …………………………………………………………………………………………………………………………….. आपसे नम्र आग्रह है की एक बार मेरे लेख को पढ़ें उसमें हमने कुछ कोशश लिखे है अपने और हमारे बारे में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दें और मार्गदर्शन करे आपको धन्यवाद

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    आनंद जी मई इस चुनाव को लेकर निराशावादी हूँ आगे हो सकता है की परिस्थति बदल जाये, बिहार का उदारहण अच्छा है….. क्या मैंने अभी तक आपकी पोस्ट पर अपने विचार नही रखे? हम्म्म्म देखना पड़ेगा, होने तो नहीं चाहिए :) आभार आपके विचार के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

shashibhushan1959 के द्वारा
February 11, 2012

आदरणीय अबोध जी, सादर ! यहीं पर तो “राईट टू रिजेक्ट” की प्रासंगिकता है. यह एक क़ानून इस समस्या का बेहतर हल है. अगर यह कानून लागू हो जाय तो हमारे हाथ एक अमोघ अस्त्र आ जाय! निराशा की बजाय प्रयास बेहतर है. ईश्वर से प्रार्थना है, जननायक अन्ना शीघ्र स्वस्थ हो इस युद्ध की बागडोर संभालें, ताकि हम सैनिक भी कुछ कर सकें !

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    चलें सर हम और आप मिल कर दुआ करें की ये राईट तो ………….. आपने सही कहा है की निराशा की बदले आशा बेहतर है पर ज़मीनी स्टार पर जो दिख रहा है उससे कैसे मुंह छिपाया जाये आभार आपके विचार के लिए आभार आपके विचार के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajkamal Sharma के द्वारा
February 11, 2012

खुदा का लाख लाख शुक्र है की आप मेरे जैसे नहीं है बल्कि अपनी शादी के इलावा भी कुछ (इस देश के बारे में भी ) सोचते है …. जनता के बारे में सोचने वाले और कुछ करने का जज्बा लिए हुए राजनीती करने वाले नेता सपने की बाते हो गई है ….. आप ही की तरह मेरे मन में भी तमाम तरह की शंकाए और आशंकाये है लेकिन भगवान जी से यह इल्तजा भी है की इनमे से ज्यादातर “निर्मूल” ही साबित हो ?…. यह समझो और समझाओ थोड़ी में मौज मनाओ दाल रोटी खाओ और प्रभु के गुण गाओ हा हा हा हा हा हा

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    सर मई शाकाहारी नहीं सर्वाहारी हूँ केवल दाल रोटी से काम ……. :) चलें हम भी यही दुआ करते हैं की मेरी आशंकाएं निर्मूल हूँ वैसे आप हैं कहाँ आजकल http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

minujha के द्वारा
February 11, 2012

अबोध जी नमस्कार बदलाव होता अवश्य  है,अब हमारे बिहार का ही उदाहरण देती हुं,पंद्रह साल के दोहन के बाद  सुधार की बात लोग लगभग बिसरा ही चुके थे,पर आज बिहार के लोगों (शिकायती प्रवृति को छोङकर) के चेहरे  ही आपको उनकी राहत की कहानी कह देंगे,इसलिए सुखद बदलाव की आशा ना छोङें

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    मीनू जी चलें, मेरी प्रार्थना है की ऐसा ही हो, बिहार की तरह UP की भी स्थिति ……….. आभार आपके विचार के लिए, आगे भी आपसे मार्गदर्शन का …… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

pushkar के द्वारा
February 11, 2012

इतना तो तय है की इस चुनाव से कुछ नही बदलेगा!नागनाथ जायेगा कोई सापनाथ आएगा:)लेकिन यह भी तय है की पूर्ण बदलाव आएगा ! युही कलम से आवाज़ तो लगते रहिये!!!!!!

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    धन्यवाद पुष्कर जी कलम की आवाज़ ……… :) चलें यही कह सकते हैं और प्रार्थना की कुछ तो बदले, आभार.. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Syeds के द्वारा
February 11, 2012

अबोध जी, सरकारें बदलती हैं लेकिन न ही देश/प्रदेश की तस्वीर और न ही जनता की तकदीर बदलती है…हमेशा चुनाव के बाद होता यही है कि जीते कोई भी….हारना बेचारी जनता को पड़ता है… बेहतरीन लेख के लिए बधाई के पत्र हैं… http://syeds.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    हारना जनता को पड़ता है, क्या बात है सय्यद साहब, आपने तो सार ही रख दिया इस ………… ऊपर वाले से दुआ है की ये बदले और एक नयी सुबह ………. आभार, की आपने सदा की तरह इस बार भी …………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Piyush Kumar Pant के द्वारा
February 11, 2012

रावी की रवानी बदलेगी, सतलुज का मुहाना बदलेगा गर शौक में तेरे जोश रहा, तस्वीर का जामा बदलेगा, बेज़ार न हो, बेज़ार न हो, सारा फसाना बदलेगा कुछ तुम बदलो, कुछ हम बदलें, तब तो यह ज़माना बदलेगा। अबोध जी………. बदलाव प्रकृति का शाश्वत नियम है…….. आप निराश न हों…… अच्छे लेख के लिए बधाई……

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    पियुश्य भाई आप जैसे लोग मुझ जैसे लोग का भी मन ………………… बड़े ही सुन्दर पंक्तियों के साथ आपने अपनी बात कही है, प्रार्थना है किवो दिन जल्द ……… आभार आपका, की आपने फिर से एक बार मेरे पोस्ट पर अपने अनमोल…….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

akraktale के द्वारा
February 11, 2012

अबोध जी नमस्कार, इतनी आसानी से कुछ होने वाला नहीं है.मगर उम्मीद का दामन भी नहीं छोड़ा जा सकता.मेरा मानना है की यदि जनता इन पर लगातार दबाव बनाए रखने में कामयाब होती है तो फिर सुधार निश्चित है.साधुवाद.

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    अशोक जी मेरी निराशा आजके परिवेश को देखर , स्थिति ko dekh kar rah. इश्वर से प्रार्थना है की पर्विरार्तन की आंधी चले और ………………… आभार आपका की………….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

आर.एन. शाही के द्वारा
February 11, 2012

राजनीति का अपराधीकरण अथवा अपराध का राजनीतिकरण और राजनीति में परिवारवाद लेखन या ब्लाग की दुनिया के लिये लीक से हटा हुआ विषय नहीं है अबोध जी । बहुत सारे लोग इन विषयों पर ‘पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ’ जैसे भाव में कलम घिसाई करते हुए उह लोक को प्रस्थान कर चुके हैं, लेकिन इनका वज़ूद खत्म होने वाला नहीं है । आप ने भी उन घावों को कुरेद कर मात्र थोड़ा हरा करने की कोशिश की, इसके लिये आभार आपका ।

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    सर मैंने अपने बारे में लिखा था की मई इस बार लीक से हटकर क्योंकि मई उन विषयों पर कम ही लिखता हूँ जो की ………….. देखते हैं सर, मीनू जी ने बिहार का उदहारण दिया है, इश्वर से प्रार्थना है की ऐसा कुछ चमत्कार UP में भी ……….. आभारी हूँ आपका की आपने फिर से इस अबोध को अपने ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

अलीन के द्वारा
February 11, 2012

सादर नमस्कार, ! अबोधबालक जी, कई दिनों के बाद एक बार फिर आपने एक और सार्थक लेख लिखा. उसके लिए बधाई. आपका सरल और सहज शब्दों द्वारा विचारों का प्रस्तुतीकरण ताकि इसे हर कोई आसानी से समझ सके…सराहनीय के सथ-सथ अनुकरणीय है. जनता के पास विकल्प भी नहीं है क्योंकि अच्छे लोग राजनीति में जाते नहीं या बेचारे हिम्मत ही नहीं करते और जाने के बाद वो भी ……आप ने सच कहा. ये शब्दांश हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर गलती किसकी है समाज की या राजनीति की. इस विषय को उठाने के लिए, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    अलींन जी मई कोई कुशल लेखक नहीं है, इस लिएय समय लगता है मुझे एक लेख के बाद दूसरा लिखने में. सच कहा है आपने की गलती पता नहीं किसी की है…….. आभार आपके विचार और प्रोत्साहन के लिए, आगे भी आपसे ऐसे ही …….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Nedah के द्वारा
    November 30, 2013

    Call me wind because I am abullsteoy blown away.

munish के द्वारा
February 11, 2012

प्रिय अबोध जी, ये निराशा का नहीं चिंतन का विषय है, की क्यों हम इस सब का विरोध करते …? क्यों हम स्वीकार करते हैं अनपढ़, अपराधी, और स्वार्थी व्यक्ति को ……? क्यों अच्छे लोग राजनीति से भागते हैं…..? क्या उनकी अच्छाई किसी कायरता से कम है. या हम सब भी जो हो रहा है होने दो की तर्ज पर या मैं अकेला क्या कर सकता हूँ सोचकर अपने स्वार्थ को महत्व नहीं दे रहे …? बहरहाल आपने विचार रखने का एक विषय दिया इसके लिए आपका धन्यवाद http://munish.jagranjunction.com/2011/02/14/%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%B2%E0%A5%87/

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    सच कहा है मुनीश जी आपने की ये चिंतन का विषय है पर चिंतन करे कौन, हम और आप? इस राजनीती के गंदे खेल को देख कर अच्छे लोग इससे दूर ही रहते हैं और बुरे लोग ……. इश्वर से प्रार्थना है की एक क्रांति हो जो की ………….. आभार आपके विचार के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 11, 2012

आदरणीय अबोध जी , सादर अभिवादन लगता तो नहीं कुछ बदलेगा. जनता और नेता का बीच न जाने कैसी मोहब्बत है. कैसा करार या इकरार है किया दोनों कहते हैं लाख जमाना कहे न हम बदलेंगे न तुम बदलो. मेरी पोस्ट वे भगत सिंह तो नहीं, बाद की पोस्ट जो क्रमश हैं न जाने क्या कहती हैं. आप के हस्ताक्षर होते , आभार.

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    प्रदीप जी सच कहा है अपने की न जाने क्या रिश्ता है……….. बस इस बात ने तो मुझे इस तारा से सोचने पर विवश कर दिया है, प्रयास रह्गेगा की आपकी किसी पोस्ट पर ऐसा न हो की मेरी कदम न पड़े पर अगर समय की कमी के कारण ऐसा न हो सकते तो क्षमा….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajesh Dubey के द्वारा
February 11, 2012

वाकई राजनीती से बढ़िया व्यवसाय कोई नहीं है.जेल के सेल में भी घोटालों के बाद मजे ही मजे हैं. सारी सुबिधा मिलती ही है,और सतो पुसुत की चिंता ख़त्म हो जाती है.

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    कहीं आप भी राजनीती में जाने का …………. :) सर क्या करें आज अच्छो को कौन पूछता है, इस लिए राजनीती और रही बात इस चुनाव के तो देख लेते हैं की …. आभार आपके विचार और ……….. सच कहा है मुनीश जी आपने की ये चिंतन का विषय है पर चिंतन करे कौन, हम और आप? इस राजनीती के गंदे खेल को देख कर अच्छे लोग इससे दूर ही रहते हैं और बुरे लोग ……. इश्वर से प्रार्थना है की एक क्रांति हो जो की ………….. आभार आपके विचार के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

chaatak के द्वारा
February 11, 2012

प्रलय में भी सृष्टि के कुछ बीज होंगे, बाद होगा अंकुरण तू हौसला रख! एक न एक दिन तो सूरज भी बुझेगा, फिर नया तारा मिलेगा हौसला रख! करना चिंतन चेतना का काम है कर, आशा जनेगी ये निराशा हौसला रख! तेरी एक कोशिश भी है अनमोल लेकिन, अभय हो रख हर कदम और हौसला रख! प्रिय अबोध चिंतन करते रहो कोशिश करते रहो निराशा में से ही आशा का संचार होगा| अच्छे लेखन पर बधाई!

    abodhbaalak के द्वारा
    February 13, 2012

    चातक जी सबसे पहले तो आपे कदम मुझ अबोध के पोस्ट पर पड़ें उसके लिए कोटि कोटि आभार, चिंतन कर करके ही तो, और आजके वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देख कर ही तो ये निराशा मन में ……. पर जैसा की आपने कहा की एक न एक दिन तो …….. इश्वर से प्रार्थना है की वो दिन जल्द से जल्द ………


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