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छोटी सी बात

Posted On: 21 Jan, 2012 Others में

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 आज एक  बार  फिर  कुछ  लिखने  को  दिल  चाह  रहा  है ,काफी  समय  से  कुछ  लिखा  नहीं , और  आप   लोग  मुझे  भूल  ना  जाएँ  इस  डर  से   कुछ  ना  कुछ  पोस्ट  करना  पड़ेगा .

 

 अब   विकट  प्रश्न  है  कि  क्या  लिखूं ? अपनी  सीमित   क्षमताओं  के  साथ  कुछ  लिखना  मेरे  लिए  कभी  आसान  नहीं  रहा है. न  मै  संदीप  जी  और  सूर्य  जी  कि  तरह  ग़ज़ल  लिख  पाता  हूँ , ना  ही  राज  भाई  और   आल राउंडअर   जी  कि  तरह  हास्य  व्यंग , ना  मै  संतोष   जी  कि  तरह  से  से   मूरख  मंच  कि   रचना  कर  सकता  हूँ , और  ना  ही  निशाजी , अलका  जी , वाहिद भाई, तिम्सी  जी , तमन्ना  जी , सुमन  जी , सत्य  जी , मनोरंजन   जी , जवाहर  भाई , पियूष  भाई  रौशनी  जी ,  परवीन  जी ,  दिव्या  जी , विनीता जी , साधना  जी , राजेश  सर , अमिता  जी ,  राजेंद्र  भाई , अमर  भाई , तुफैल भाई, शशि  जी  बाजपेई सर, शाही सर और  इन्ही  के  तरह  बहुत  सारे  ( क्षमा  चाहता  हूँ  उनसे जिनका  भी  नाम  छूट  गया  है ) कि   तरह कुशल  लेखकों  में से हूँ .

 

 इस  बार  केवल  आपके  सामने  एक  छोटी  सी  बात  रखना चाहता हूँ जो  कल  ही  पढ़ी .

 

 एक  बार  किसी  विद्वान्  से  एक  बूढ़ी   औरत   ने  पूछा  कि  क्या  इश्वर  सच  में  होता  है ? उस  विद्वान्  ने  कहा  कि  माई  आप  क्या  करती  हो ? उसने  कहा  कि  मै  तो  दिन  भर  घर  में  अपना  चरखा  काटती  हूँ  और  घर  के  बाकि  काम  करती  हूँ , और  मेरे  पाती  खेती  करते  हैं . उस  विद्वान  ने  कहा  कि  माई  क्या  ऐसा भी  कभी  हुआ  है  कि  आप  का  चरखा  बिना  आपके  चलाये  चला  हो , या  कि   बिना  किसी  के  चलाये  चला  हो ? उसने  कहा  ऐसा  कैसे  हो  सकता  है  कि  वो  बिना  किसी  के  चलाये  चल  जाये? ऐसा  तो  संभव  ही  नहीं  है. विद्वान्  ने  फिर  कहा  कि  माई अगर  आपका  चरखा   बिना  किसी  के  चलाये  नहीं  चल  सकता  तो  फिर  ये  पूरी  सृष्टि  किसी  के  बिना  चलाये  कैसे  चल  सकती  है ? और  जो  इस   पूरी  सृष्टि   को  चला  रहा  है  वही  इसका  बनाने  वाला  भी है  और  उसे  ही  इश्वर  कहते  हैं.

 

उसी  तरह  किसी  और ने  उसी  विद्वान्  से  पूछा  कि  आदमी  मजबूर  है  या  सक्षम? उन्होंने  ने  कहा  कि  अपना  एक  पैर  उठाओ, उसने  उठा  दिया, उन्होंने  कहा  कि  अब  अपना  दूसरा  पैर  भी  उठाओ,  उस   व्यक्ति ने कहा  ऐसा  कैसे  हो  सकता  है? मै  एक  साथ  दोनों  पैर  कैसे  उठा  सकता  हूँ? तब  उस  विद्वान्  ने  कहा  कि  इंसान  ऐसा  ही  है, ना  पूरी  तरह  से  मजबूर  और  ना  ही  पूरी  तरह  से  सक्षम . उसे  इश्वर  ने  एक  हद  तक  सक्षम  बनाया  है  और  उसे  पूरी  तरह  से  छूट   भी  नहीं  है . उसको  इश्वर  ने  सही  गलत  को  समझने  कि  शक्ति  दी  है  और  अब  उसपर  निर्भर  करता  है  कि  वो  सही  और  गलत  को  समझ  कर  अपने  कर्म  को  करे.

 

इश्वर  से  प्रार्थना   है  कि  हमें  सही  और  गलत  को  समझने  कि  शक्ति  दे, हम  जात  -पात , धर्म, क्षेत्र , प्रान्त  से  ऊपर  उठ  कर  केवल  और  केवल  भारतीय  बने. आने  वाला  26 जनवरी  हमारे  लिए  केवल  एक  छुट्टी  मनाने  का  दिन  ना  होकर  एक  ऐसा  दिन  हो  जो  हम्मे  एक  नयी  उर्जा  फूक  दे , एक  नयी  उमंग  दे , जिसमे  हम  प्रण करें  कि  हम   अपने  को  बांटने  वाली  हर  शक्ति  का  विरोध  करेंगे   और  उन्हें  कामयाब  नहीं  होने  देंगे . देश  सर्वोपरि  है  और  उससे  बढ़  कर  कुछ  नहीं . बस  इतना  ही  कहना  चाहूँगा . आशा  है  कि  आप  सबका  समर्थन  और प्यार सदा  कि  भांति  इस  बार  भी  इस  अबोध  को  मिलेगा.

जय हिंद.

 

 

 

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108 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 30, 2012

अबोध जी, इसी तरह पूर्व की भांति निरंतर और निर्बाध लिखते चलें | आलेख अच्छा बन पड़ा है, बधाई !!

chandanrai के द्वारा
March 13, 2012

Dear, though you have given the title “choti si baat”, yet a giant meaning exits in your articles . great Sir, http://chandanrai.jagranjunction.com/Berojgar

    abodhbaalak के द्वारा
    March 13, 2012

    Thanks Mr. Chandan for your valuable comment although i am bit confused wether it’s giant meaning exits from the post or it is exists in it. thanks again. hope to have your guidance in future too

Tufail A. Siddequi के द्वारा
March 13, 2012

भाई साहब अभिवादन, “इंसान ऐसा ही है, ना पूरी तरह से मजबूर और ना ही पूरी तरह से सक्षम . उसे इश्वर ने एक हद तक सक्षम बनाया है और उसे पूरी तरह से छूट भी नहीं है . उसको इश्वर ने सही गलत को समझने कि शक्ति दी है और अब उसपर निर्भर करता है कि वो सही और गलत को समझ कर अपने कर्म को करे.” बहुत सुन्दर. बधाई. छोटे भाई को याद रखने के लिए भी बहुत शुक्रिया. http://siddequi.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    March 13, 2012

    :) आज कल मंच पर जाना नहीं होता तुफैल भाई , पर आप जैसो को कैसे भूल सकता था . abhar aapka की आपने इस रचना को पढ़ा और अपनी राये दी.

D33P के द्वारा
February 18, 2012

इंसान ऐसा ही है, ना पूरी तरह से मजबूर और ना ही पूरी तरह से सक्षम . उसे इश्वर ने एक हद तक सक्षम बनाया है और उसे पूरी तरह से छूट भी नहीं है . उसको इश्वर ने सही गलत को समझने कि शक्ति दी है और अब उसपर निर्भर करता है कि वो सही और गलत को समझ कर अपने कर्म को करे. कितनी सटीक बात कही है ,अबोध जी आपने .अगर इंसान में यही समझ होती तो शायद उसकी पूरी नहीं तो काफी हद तक परेशानिया कम हो जाती और जिन्दगी काफी आसन हो जाती

    abodhbaalak के द्वारा
    February 26, 2012

    दीप्ति जी इंसान बड़ा ही विच्त्र प्राणी है, समझ में न आने वाला. बड़ी पहेली है, जो की ……… जानकार भी नहीं जानता, नहीं जानकार भी सबकुछ जान…………… आभार आपकी प्रितिक्रियाओं के लिए

Jijivisha के द्वारा
February 10, 2012

बहुत सुंदर….कथा के द्वारा सत्य स्थापित करने एवं समझाने का ये तरीका बहुत निराला लगा…..समय निकालकर हमारे विचार भी अवश्य पढियेगा……. http://jijivisha.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    February 11, 2012

    जिज्विषा जी बस प्रयास रहता है की कुछ ऐसा लिखूं जो को पढ़ा जा सके, क्या मैंने आज तक आपकी पोस्ट पर अपने विचार नहीं रखे? अगर ऐसा है तो मेरा दुर्भाग्य, देखते हैं की आगे से ऐसा….. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com

jagobhaijago के द्वारा
February 7, 2012

महोदय, आपकी रचना ‘छोटी सी बात’ अपने आप में इतना विशाल अर्थ व दर्शन समाहित किए हुए है कि मेरे जैसे नये ब्लागर के लिए इसको बहुत सुन्दर व प्रेरक कहकर पीछे हटना ही अच्छा होगा। इसी के साथ एक अनुरोध कि समसामयिक चुनाव व मताधिकार पर भी अपनी किसी रचना के द्वारा हम सभी को प्रेरित व जागरुक करने का कष्ट करें एवं मेरे निम्न प्रयास पर अपना अमूल्य मार्गदर्शन करने का कष्ट भी करें। काश! ये चुनावी दबाव हर वक्त रहता चुनाव आते ही नजारे बदल जाते हैं कल तक के राजा अब जनसेवक बन? जाते हैं काश ये चुनावी द बाव हर वक्त रहता कुछ दिनों के लिए ही सही गरीब बेसहारा जनता का मनोबल तो ऊचा रहता पता नहीं कब तक इन्हे ढोते रहेंगें हम? लोकतांत्रिक देश में तानाशाही से पिसते रहेंगें हम कब हम बदलेंगें? कब ये बदलेंगें? इनका तो क्या कहना चुनाव आते ही ये हर पल रंग बदलेंगें हमें इसके सिवा और क्या चाहिये सिर्फ दो वक्त की रोटी और अपनी पहचान चाहिये बस इसीलिए है लगता कि काश? चुनावी दबाव हर वक्त रहता।

    abodhbaalak के द्वारा
    February 11, 2012

    मई भी यही कहूँगा भाई मेरे ” की काश ये चुनावी दबाव हर वक़्त रहता……. बहुत सुन्दर ढंग से आपने अपनी बार राखी है. मैंने भी इस बार प्रयास किया है की UP के चुनाव पर कुछ लिखूं और मेरी नयी पोस्ट उसी पर है, आपके विचार की प्रतीक्षा रहेगी. आभारी हूँ आपका http://abodhbaalak.jagranjunction.com

aashutoshmishra के द्वारा
February 6, 2012

मित्र अबोध, इश्वर से प्रार्थना है की आपको इसी तरह से आपको समसामयिक मुद्दों और अन्य जरुरी विषय वस्तुओं का बोध कराते रहें. ताकि आप उनपर सटीक और गंभीर लेख बेहद सहज भाषा और अंदाज में सभी अध्यांशीलों के लिए परोस सकें…ढेरों शुभकामनाओं के साथ…आपका आशुतोष मिश्र ! http://aashutoshmishra.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    February 7, 2012

    आशुतोष जी आभारी हूँ आपका, की आपने मेरे लेख को पढ़ा, और प्रोत्साहन ……….. प्रयास रहेगे की ऐसे विषय पर लिख सकूँ जो की जीवन में कुछ मैटर करते हो, कहाँ तक सफल हूँगा ये नहीं पता… अपने विचारो से अवगत कराते रहने का अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com

pushkar के द्वारा
February 5, 2012

:) अबोध बालक जितना अबोध दीखता है उतना है नहीं!विचारो की परिपक्वता उम्र पर भरी पर रही है:).युही कलम चलते रहिये कभी तो भ्र्स्तवाद की लंका जलेगी!lol

    abodhbaalak के द्वारा
    February 6, 2012

    पुष्कर जी चलें दिखने में तो अबोध लग रहाहूं न? वैसे आप मेरी रचनाओ को ध्यान से पढेंगे तो लेखनी भी ….. अब कलम तो चलती नहीं सर, कम्पयूटर के की बोर्ड ….. :) स्नेह बनाये रखे और मार्गदर्शन करते रहें यही आपसे अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com

jalaluddinkhan के द्वारा
February 5, 2012

अबोध जी,प्रस्तुत घटनाएँ आपकी सोच का दर्पण हैं.मैं भी कुछ ऐसा ही सोचता हूँ.तकलीफ होती है जब लोग ईश्वर को छोड़ कर पैसा,सत्ता को खुदा मान कर एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ में नज़र आते हैं और इंसानियत को भूल जाते हैं.बहरहाल,आपकी भावना से ओत -प्रोत मेरी चंद पंक्तियाँ आपके समर्थन में प्रस्तुत हैं- “आसमान पर तिरंगा हमारा रहे, एक हैं हम सभी अपना नारा रहे. कुछ रहे न रहे,देश बाकी रहे, देश के वास्ते भाईचारा रहे. क्षेत्र,भाषा,धरम न रुकावट बने, एक बस एक दिल ये हमारा रहे.”

    abodhbaalak के द्वारा
    February 5, 2012

    जलाल भाई, बड़ी ही सुन्दर पंक्तियों के साथ आपने अपनी बात राखी है, बस दिल एक रहे, यही हमारी बक़ा के लिए काफी है. आगे भी आपसे मार्गदर्शन का अनुरोध और आशा है http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    munish के द्वारा
    February 5, 2012

    प्रिय अबोध बालक जी इतने अच्छे प्रसंगों से मार्गदर्शन कर रहे हैं और मार्गदर्शन का अनुरोध कर रहे हैं आप तो मार्गदर्शक हैं……. http://munish.jagranjunction.com/2012/02/03/%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C/

    abodhbaalak के द्वारा
    February 6, 2012

    मुनीश जी मैंने अपने में ये सामर्थ नहीं पाता की किसी का मार्गदर्शन कर सकूँ, केवल दूसरो से ही अपने …. आप जैसे प्यार करने वाले है जो की इस अबोध का मान रख लेते हैं वरना ….. आभारी हूँ आपका, की आपने प्रोत्साहन और स्नेह दिया http://abodhbaalak.jagranjunction.com

div81 के द्वारा
February 5, 2012

अबोध जी लगता है राजकमल भाई से बोल के आप के कान खिंचवाने पड़ेंगे अब वो ही समझा सकते है की आप कितना कुशल लेखन करते हो | कान खिंचवाने वाली बात तो मजाक में कही मगर ये सच है की आप का लेखन बहुत गहराई लिए होता है | एक बार फिर से आपने छोटी सी बात से बहुत ही गहरी और बड़ी बात कही | ऐसे ही संदेशपरक और प्रेरनादायी लेख लिखते रहिये ………………….. देरी के लिए क्षमा चाहूंगी :)

    abodhbaalak के द्वारा
    February 5, 2012

    दिवा जी भले ही आप इसे मजाक में ले पर मई जब मंच पर एक से बढ़कर एक लेखको को देखता हूँ तो अपने लेखन के स्तर को …………, खैर जाने दें, राज भाई तो ऐसे भी हक रखते है, मेरे कान नाक खीचने का, आखिर मुंह बोले गुरु जो ठहरे… प्रयास रहता है की कुछ ऐसा लिखा जाये जो दिल से निकले, ज्यादा समझ नहीं है ज़माने की इस लिए उतना लिखने में भी बहुत समय लग जाता है. बहुत बहुत आभारी हूँ आपका, की आपने …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

कुमार हर्ष के द्वारा
February 5, 2012

great ise bhi pade क्या भारत को फिर कभी अब्दुल कलम जेसा राष्ट्रपति मिलेगा? http://kumarharsh.jagranjunction.com/2012/02/05/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81/

    abodhbaalak के द्वारा
    February 5, 2012

    भय्या हर्ष जी इसमें ग्रीट क्या है ये मई नहीं समझा, खैर आपको अच्छा लगा इसके लिए आभारी हूँ आगे भी ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Abdul Rashid के द्वारा
January 31, 2012

मित्र अबोध देखन में छोटन लगे घाव करे गंभीर सुन्दर लेख सप्रेम अब्दुल रशीद http://www.aawaz-e-hind.in

    abodhbaalak के द्वारा
    February 1, 2012

    शुक्रगुज़ार हूँ आपका अब्दुल रह्सीद भाई की आपने इस लेख को पढ़ा और सराहा, अपनी मुहब्बत को ऐसे ही बनाये rakhiyega …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

minujha के द्वारा
January 31, 2012

अबोध जी नमस्कार आपने अपने आलेख छोटी सी बात में बहुत बङी बङी बातें कही है,इतने अच्छे आलेख की बहुत सारी बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    January 31, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद मीनू जी, आप जैसी ब्लोगर अगर मुझ जैसे अबोध को इस तरह सराहती हैं तो बहुत अच्छा लगता है, एक बार फिर से आभार, और आगे भी आपसे मार्गदर्शन का अनुरोध….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

January 30, 2012

अबोध जी, जहां तक मेरा अनुभव है, आपने शायद ही कभी किसी को विपरीत प्रतिक्रिया दी हो| आप हमेशा अपनी प्रतिक्रियाओं से सभी का हौसला ही बढाते ही दिखते हैं| ये अपने आप में वो खासियत है जो सब में नहीं होती| सबको बड़ा बनाए रखना और स्वयं विनम्र बने रहना आपकी बहुत बड़ी खासियत है| मैं कह सकता हूँ की आप हम से कहीं ऊपर हैं| रही लेख की बात तो मैं आपसे सर्वथा सहमत हूँ कि देश सर्वोपरि है और उससे बढ़ कर कुछ नहीं….

    abodhbaalak के द्वारा
    January 31, 2012

    राजेंद्र भाई ऐसा नहीं है की मई सदा ही ………………., पर ऐसा बहुत कम ही होता है जहाँ मुझे ……. मेरा प्रयास रहता है की जितना भी हो सके लोगो को प्रोत्साहन मिलता रहे, जीवन में नीचे गिराने वाले तो बहुत मिलते है भाई, सराहने वाले कम, आपसब का प्यार है की आप मुझे जैसे अबोध को मान देते हैं, और यही प्यार मेरी शक्ति भी है. इसे बनाये रखियेगा यही आग्रह है. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

manojjohny के द्वारा
January 29, 2012

अबोध जी आप अबोध नहीं हैं। आप सुबोध या प्रबोध हो सकते हैं, अबोध नहीं। मैं भी आपके साथ इश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि हमें सही और गलत को समझने कि शक्ति दे, हम जात -पात , धर्म, क्षेत्र , प्रान्त से ऊपर उठ कर केवल और केवल भारतीय बने.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 30, 2012

    मनोज जी मेरी अबोधता ही मेरी शक्ति भी है और मेरी ……… आपका आभारी हूँ की आपने मेरी बातों का समर्थन किया, चले हम सब मिल कर ही ये प्रर्थन करें क्योंकि जितनी ज्यादा आवाजें एक साथ मिलेगी आवाज़ उतनी ही ………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com

baijnathpandey के द्वारा
January 28, 2012

आदरणीय श्री अबोध जी हार्दिक अभिवादन कोई महान इंसान ही इस कदर विनम्र हो सकता है, वर्ना आपकी शब्दों में वो अचूक ताकत है की पत्थर को भी पिघला कर मोम बना दे . अपनी छोटी सी छोटी बात में भी आप बहुत बड़ी बातें कह जाते हैं जो हमें निस्संदेह सोंचने पर मजबूर कर देती हैं …………… वसंत पंचमी की कोटिशः शुभकामना व आभार !!!

    abodhbaalak के द्वारा
    January 28, 2012

    बैजनाथ जी आप सब का स्नेह है, जो मुझे जैसे अबोध को इतना मान इस मंच पर मिलता है, वरना मई क्या हूँ ये मुझसे भला कौन जान सकता है. कभी कभी तो अपने को पहचानना भी मुश्किल हो जाता है मेरे भाई. बस प्रार्थना यही है की इस स्नेह को, प्यार को सदा बनाए रखियेगा. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    baijnathpandey के द्वारा
    January 28, 2012

    आपकी अबोधता मे भी सुबोधता की झलक है :D ये दिल किसी का होकर बदले तो किस कदर, छोटी सी बात है मगर बात है यही

    abodhbaalak के द्वारा
    January 29, 2012

    ये दिल किसी का होके बदल जाए तो भी है क्या? गर जिसके लिए ये बदले उसे एहसास तक न हो. खाएं हैं जख्म हमने इसी दिल की वजह से भगवन मेरे जैसा कोई दूना इंसान भी न हो आपकी शायरी पर तुकबंदी की है, अब जैसे भी हो. बहुत बहुत आभार, http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Syeds के द्वारा
January 28, 2012

अबोध जी, यह घटनाएं तो पैगम्बर मोहम्मद(स.अ.व.व.) के उत्तराधिकारी इमाम अली(अ.स.) की हैं…उसको साझा करके दुबारा याद दिलाने के लिए धन्यवाद… बेशक आप कौमी एकता के लिए मिसाल हैं…. http://syeds.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    January 28, 2012

    सय्यद जी मेरे ज्ञान को बढाने के लिए आपका आभार, बात किसी के द्वारा भी की गयी हो पर दिल को छूने वाली थी, सीधा साधा लोजिक …………. आपने बड़ा मान दिया है मुझे कौमी एकता की मिसाल कह के, हालांकि मई केवल “अबोध” हूँ, ज्ञान की बात गलती से ही होती है ………….. :) आशा है की आगे३ भी आपका प्रोत्साहन सदा मिलता रहेगे http://abodhbaalak.jagranjunction.com

वाहिद काशीवासी के द्वारा
January 26, 2012

आपकी प्रार्थना सच हो यही मैं भी सोचता हूँ। आपका अबोधत्व यूँ ही बरकरार रहे। :-D

    abodhbaalak के द्वारा
    January 28, 2012

    वाहिद भाई आपके और मेरे जैसे बहुत सरे हैं पर वो भी इन राजनेताओं और भड़काने वाली बातो से …… काश हम अपने विवेक से काम लेकर ……….. बहुत बहुत आभार आपके प्रोत्साहन और स्नेह के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com

JAMALUDDIN ANSARI के द्वारा
January 26, 2012

अबोध बालक जी नमस्कार, आप का लेख बहुत अच्छा लगा !

    abodhbaalak के द्वारा
    January 28, 2012

    जमाल भाई शुक्रगुज़ार हूँ आपका की aapne इस लेख को पढ़ा और उसे पसंद किया, ये आप सब का प्यार है की मेरे लेख पढ़े और पसंद किये जाते हैं, और आपसे गुजारिश है की आगे भी इस प्यार को कायम रखे http://abodhbaalak.jagranjunction.com

anandpravin के द्वारा
January 26, 2012

आबोद जी, मैंने आपका ये पहला लेख पढ़ा, और माफ़ी चाहूँगा इतनी दिनों बाद प्रतिक्रया दे रहा हूँ आपके इस लेख को पड़ने के बाद मैंने आपके और भी बहुत सारे लेख पढ़े और उससे आपके शैली के बारे में पता लगा आप वरिष्ट है और मैं न्यून इसी लिए देर ही सही पर दुरुस्त बधाई देना चाहूँगा धन्यवाद

    abodhbaalak के द्वारा
    January 28, 2012

    आनंद जी आभारी हूँ की आपने इस लेख को पढ़ा और उसके बाड़ी और भी कई लेख पढ़े, सच तो ये है की मई खुद भी नहीं जानता की मेरी शैली क्या है :) खैर, मई तो अबोध हूँ, और वरिष्ठता से अबोधता पर कोई असर नहीं पड़ता …….. आशा है की आप के विचार आगे भी मिलते रहेंगे http://abodhbaalak.jagranjunction.com

January 25, 2012

प्रिय अबोध जी, हम सब ही अपने-अपने मनोभावों को शब्दों का रूप देकर काग़ज़ पर उतारते हैं । आप तो इस मंच के प्रारम्भिक लेखकों में से एक हैं, भला आपको कोई कैसे भूल सकता है ? :) आप जैसे महानुभावों के मार्ग-दर्शन की वजह से ही मुझ जैसा ‘नादान+अंजान’ आज भी इस मंच पर है…..वरना… :D !! प्रेरक प्रसंग….!! आलेख में याद करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !! :)

    abodhbaalak के द्वारा
    January 26, 2012

    संदीप जी एक करेक्शन करना चाहूँगा- मई इस मंच के प्रारम्भिक लेखको में से नहीं हूँ, हाँ लभग डेढ़ साल हो गया है इस मंच से जुड़े, और मेरे विचार से ये मंच उससे कहीं पुराना है. आप इस मंच के न एक केवल एक प्रमुख शायर हैं वरण आपके लेख भी किसी भी तरह से उससे ….. मेरे लिए तो ये ही बड़ी बात है की मई आपके लिए प्रिय हूँ. :) ये प्रेम और स्नेह बनाये रखियेगा http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Ravi के द्वारा
January 25, 2012

सही कहा आपने…ईश्वर स्थूल रूप से ना होते हुए भी इस जगत में हैं…बहुत ही अच्छी बातें कहीं हैं आपने ब्लॉग के माध्यम से..

    abodhbaalak के द्वारा
    January 26, 2012

    धन्यवाद रवि जी संभवतः ये आपका पहला कमेन्ट है मेरे ब्लॉग पर, इस लिए वेलकम…. आभारी हूँ आपका की आपने इस लेख को पढने और उसपर अपने विचार रखने लायक पाया. आगे भी अपने विचारों से अवगत कराने का अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
January 25, 2012

इंसान ऐसा ही है, ना पूरी तरह से मजबूर और ना ही पूरी तरह से सक्षम .जो इस पूरी सृष्टि को चला रहा है वही इसका बनाने वाला भी है और उसे ही इश्वर कहते हैं.हमें सही और गलत को समझने कि शक्ति दे, हम जात -पात , धर्म, क्षेत्र , प्रान्त से ऊपर उठ कर केवल और केवल भारतीय बने. आने वाला 26 जनवरी हमारे लिए केवल एक छुट्टी मनाने का दिन ना होकर एक ऐसा दिन हो जो हम्मे एक नयी उर्जा फूक दे , एक नयी उमंग दे… प्रिय अबोध जी सुन्दर प्रसंग और सीख ..सब उस परम शक्ति को मानें जानें उसका तो भय रखें मन में सच्चाई और प्रेम की राह चल पड़ें सब कुछ बदल जाए …सब कुछ सार तो आप ने लिख ही डाला और क्या लिखना .. साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय सार सार को गहि रहे थोथा देई उडाय… हम तो आप की हाँ में हाँ मिला देंगे बस ….वसंत पंचमी और गणतंत्र दिवस की अग्रिम शुभ कामनाएं .. भ्रमर ५

    abodhbaalak के द्वारा
    January 26, 2012

    भ्रमर जी आपका धन्यवाद की आपने मेरे हाँ में हाँ मिला कर इसे और भी मजबूती दी है. आपके कमेन्ट सदा ही मेरा मार्गदर्शन करते हैं, और उनकी प्रतीक्षा लेख पोस्ट करने के तुरंत बाद ….. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Lahar के द्वारा
January 25, 2012

प्रिय अबोधबालक जी नमस्कार बहुत दिनों से समय की व्यस्तता के चलते आपके लेख पढ़ नहीं सका जिसके लिए क्षमा चाहता हूँ | आपको भूलना तो असम्भव है | एक बार फिर आप अच्छे लेख के साथ उपस्थित हुए है |

    abodhbaalak के द्वारा
    January 26, 2012

    लहर जी मैंने सदा माना है की आप सब का स्नेह है जो की लिखने को प्रेरित करता है, भले ही लेखों का स्तर जैसा भी हो, हार्दिक आभार की आपने इसे पढ़ा और पसंद किया, आगे भी अपने विचारो से अवगत कराने के अनुरोध अहि. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
January 25, 2012

बहुत सुन्दर रचना अबोध जी. बधाई! मन के विचार ऐसे ही व्यक्त करते रहें.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    बहुत बहुत आभारी हूँ राजीव जी आपका. आप जैसे लोगो का स्नेह ही है जो की मुझे लिखने के लिए प्रेरित करता रहता है. आगे भी आपसे मार्गदर्शन का सदा अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 25, 2012

आदरणीय अबोध जी. सादर अभिवादन. आप नाराज हैं मुझसे ? २१ जनवरी को आपके इसी पोस्ट पर अपना निवेदन किया था. आप जानते हैं पहला प्यार और पहला आशीर्वाद किसी के जीवन में क्या मायने रखता है. कृपया अपने अमूल्य समय में से एक बूँद मुझे भी देने की कृपा करें.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    प्रदीप जी ऐसा आपने कैसे सोच लिया? आपने देखा ही होगा की मई कई दिन तक किसी के भी कमेन्ट का उत्तर नहीं दे सका था…. आजकल समय का बड़ा तोडा है या ये कहें की मई टाइम को सही ढंग से मैनेज नहीं कर प् रहा हूँ, आप सब का प्यार ही तो है जो की मई मंच पर सदा बने रहने का और आप सब के साथ अपनी बात रखें और आपकी कही हुई बात पर अपने विचार रखने का प्रयास करता रहता हूँ. आशा है की आपकी शंकाएं ……… :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

manoj के द्वारा
January 24, 2012

अबोध जी क्या बात है आजकल आप आध्यात्म की और बड़ी तेज़ी से बढ़ रहे हैं, इश्वर करे की आप सच के मार्ग पर चलते रहें सुन्दर आह्वान देती रचना

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    अरे नहीं मनोज जी, ऐसा कुछ नहीं है, संभवता मेरे पिछले कुछ लेख आपको ऐसा बोध करा रहे हिं पर ऐसा है नहीं, मई अबोध ही हूँ और धर्म और आध्यात्म तो ………. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका आभारी हूँ, और आगे भी …… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

January 24, 2012

ये तो केवल आपकी विनम्रता ही है, की आप बार-बार स्वयं को यूं घोषित करते हैं की आप लेखक नहीं हैं. मन से निकली बात ही तो सबसे ज्यादा नुकीली होती है! किसे नहीं बेध पाएगी वोह! राष्ट्रभक्ति की दिशा में ये आह्वान महान प्रयास है. हम सब को सोचने की आवश्यकता है, की लोकतंत्र के मायने क्या ते, क्या दिख रहे हैं, और अब क्या किया जाना चाहिए. अन्यथा, परिणाम खुद ही बता देंगे जल्दी ही! जय हिंद! जय हिंद! ‘टिम्सी’ मेहता, न की तिम्सी मेहता. :)

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    टिम्सी जी ( न की तिमसी जी :) ) मुझे नहीं लगता की ये मेरी विनम्रता है, बल्कि सच्चाई कहें तो …… खैर, आज जबकि हम देश के बाहर हैं, यहब भी लोग भारतीय होने के बजे, उत्तर परेश, बिहार, बंगाल, केरला, मद्रास के तो है पर इंडिया के …….. इसी लिए मैंने लोगो से अनुरोध किया की प्रान्त की बात न करके देश की बात करें, आपकी सराहना के लिए आपका बहुत बहुत आभारी हूँ, और आशा ही नहीं विश्वास है की आगे भी …. वैसे आजकल मई किसी के भी पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं रखा पा रहा हूँ, इस लिए आपसे और बाकी सभ लोगो से क्षमा चाहूँगा, बस कुछ समय की बात और है, उसके बाद फिर से….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

razia mirza listenme के द्वारा
January 23, 2012

. आपने बहोत कुछ कह दिया है इस छोटी बात में | . देश सर्वोपरि है और उससे बढ़ कर कुछ नहीं | यकीनन! और हाँ अगर कोई देश से परदेस जाता है तब कोई हमवतनी उसे याद करता है तभी उस परदेश जानेवाले को उस हमवतनो के लिए जो इज्ज़त बढ़ जाती है ये तो कोई आपसे ही सीखे |

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2012

    धन्यवाद रज़िया जी जैसा की मैंने अपने लेख में लिखा है, की हमें बांटने के तो बहुत से बहाने बना लिए गए हैं पर जोड़ने के लिए कम से कम कुछ तो हो, और अपना देश, अपनी मट्टी- इससे बढ़ कर और क्या हो सकता है, आपकी सराहना और प्रोत्स्साहन के लिए आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

razia mirza listenme के द्वारा
January 23, 2012

. आपने बहोत कुछ कह दिया है इस छोटी बात में | . देश सर्वोपरि है और उससे बढ़ कर कुछ नहीं | यकीनन! और हाँ अगर कोई देश से परदेस जाता है तब कोई हमवतनी उसे याद करता है तभी उस परदेश जानेवाले को उस हमवतनो के लिए जो इज्ज़त बाधा जाती है ये तो कोई आपसे ही सीखे |

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    आपने गलती से मेरे कमेन्ट की संख्या बाधा दी है या …………. :)

sumandubey के द्वारा
January 22, 2012

अबोध जी , नमस्कार आपने बहुत कुछ न कह के बहुत कुछ कह दिया .आपकी बातो से सहमत हू . हम भारतीय हो इसके अतिरिक्त सब अपने घर में हो पर तब नेताओं का क्या होगा जाती आरछ्न के नाम पर लड़र्येगे कैसे सारे मुद्दे ख़त्म हो जायेगे ,

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2012

    सुमन जी सच कहा है आपने, की अगर हम केवल भारतीय हो तो इन नेताओं को लड़ाने के मौके कैसे मिलेंगे …. पर हम इन चालबाजियों को समझते भी तो नहीं है न? या ये कहें की जानकार भी …. आभारी हूँ आपका की आपने अपने कमेन्ट से मुझे इज्ज़त दी. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajkamal Sharma के द्वारा
January 22, 2012

प्रिय अबोध जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! जिस तरह से आप इन दिनों अध्यात्म की तरफ अपने नैनो कदम तेजी से बढाते हुए इश्वर तथा उसे जुड़ी हुई बातो + मान्यताओं तथा सिधान्तो की बाते करने लगे है उससे पता चलता है की अब आप अबोधता को छोड़ कर सुबोधता में प्रवेश कर रहे है ….. यह बहरी और भीतरी रूपान्तरण आपमें सकारात्मक और उपयोगी तथा सुखदायक बदलाव लेकर आये इसी कामना और तमन्नाओं के साथ हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा रचना लिखने के लिए आभार – वैसे आजकल इस मामले में मेरी हालत भी कमोबेश आप जैसी ही है हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2012

    प्यारे गुरु जी ऐसा नहीं है की मई अध्यात्म की और………… पर आजकल के इस तरह के लेखों के पीछे भी एक राज़ था पर खैर वो जाने दें, वैसे भी अब शायद इस तरह के विषयों पर न लिखूं, ( आखिर अपनी अबोधता जो बचानी है) और रही बात हमारी और आपकी हालत एक जैसे होने की तो आखिर आप मेरे गुरु ठहरे और दिल को दिल से राह होती ही है, इस लिए …. :) सदा की तरह, आपका दिल से आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    January 25, 2012

    ज्यादा अध्यात्म की तरफ चले जायेंगे..और भी अबोध या सुबोध … तो फिर आप की शादियों …और …उस पर नजर कम लगेगी …कोई डिमांड नहीं राज भाई है न .. जय श्री राधे भ्रमर ५

    abodhbaalak के द्वारा
    January 28, 2012

    भ्रमर भाई मई बहकने वाला नहीं, कहने का तात्पर्य ये है की अभी भी मई राज भाई की लिस्ट पर …………, और अगर कोई पसंद आ गया तो …………… वैसे आध्यात्मिक होने का मतलब ये थोड़ी न होता है की आदमी मोह माया छोड़ दे, हा हा हा हा हा हा http://abodhbaalak.jagranjunction.com

rahulpriyadarshi के द्वारा
January 22, 2012

आपने इस लेख के माध्यम से जिन छोटी बातों को प्रस्तुत किया है,उन्होंने इतने छोटे आलेख में जीवन के यथार्थ से बड़े सरल अंदाज में रु ब रु करा दिया है,आलेख की समाप्ति करते हुए जो सन्देश दिया है,उसे निश्चय ही अपने जीवन में अंगीकार करना चाहिए.यह रचना मुझे बहुत प्रभावी लगी :)

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2012

    राहुल भाई मई कोई अच्छा लेखक नहीं हूँ और शब्दों के साथ खेलना नहीं आता है, बस जो दिल से निकलता है उसे ही जैसे बने लिख डालता हूँ, आपका आभारी हूँ की आपने इस रचना को न केवल पठनीय वरन प्रभावी ……… :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

dineshaastik के द्वारा
January 22, 2012

अबोध जी नमस्कार, आपका आलेख निश्चित ही रोचक, मनोरंजक है, साथ ही अंत में सुन्दर संदेश देता है। किन्तु क्षमा माँगते हुये आपके विद्वान पात्र (जिसका आपने शायद नामकरण संस्कार नहीं किया है) के आधार - हीन कुर्तकों से सहमत नहीं हूँ। इसमें कोई संदेह नहीं है कि ईश्वर अज्ञान एवं डर की अनैतिक संतान है।इसके जन्म का  एकमारत्र उद्देश्य यह आर्थिक,सामाजिक, राजनैतिक  एवं धार्मिक रूप से सम्पन्न लोगों द्वारा आर्थक, सामाजिक, राजनैतिक एवं धार्मिक रूप से पिछड़े हुये लोगों का शोषण करना था। जिसे करने में वो कामयाब भी रहे। हमारे पिछड़ेपन एवं सदियों तक गुलामी का कारण भी यही ईश्वर तथा धर्म है।  ईश्वर के न होने का प्रत्यक्ष प्रमाण यही है कि- चलो आपके विद्वान महोदय की बात कुछ पल के लिये मान लेते हैं कि ईश्वर ही सब करता है, उसीने सब कुछ बनाया है, जीव-जन्तु, पेड़-पौधे, जल,थल,वायु, आन्तरिक्ष आदि। यहाँ तक कि समय भी उसी ईश्वर ने बनाया है, मैं आपके विद्वान से मात्र एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ कि समय को बनाने से पहले उन विद्वान महाशय के ईश्वर पास समय कहाँ से आ गया। अबोध जी मैं यह प्रतिक्रिया मात्र अपनी शंका के समाधान के लिये प्रस्तुत कर रहा हूँ। मेरा उद्देश्य किसी के हृदय को आघात पहुँचाना नहीं है।कृपया इसे अन्यथा न लें। अंत में आपका संदेश निश्चित ही हृदय में अंकित हो गया जिसके लिये आपका आभार एवं आपको बधाई….

    dineshaastik के द्वारा
    January 22, 2012

    कृपया इसे भी पढ़े– आयुर्वेदिक दिनेश के दोहे भाग-2 http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2012

    दिनेश जी आपके इश्वर के प्रति विचार से पहले से अवगत हूँ, मई कोई विद्वान् नहीं हूँ, और इस विषय पर ज्यादा कुछ कहने का सामर्थ मुझमे नहीं है, पर इश्वर के अस्तित्व पर विश्वास रखता हूँ, और मानता हूँ की कोई शक्ति तो है जिसने इस पूरी सृष्टि की रचना की है, रही बात समय की, तो इसपर मंच के विद्वान् लोग ही शायद प्रकाश डालें, jahan तक मेरी समझ है तो मई समझता हूँ की समय इश्वर को नहीं बाँध सकता, वो तब भी था जब समय का कांसेप्ट नहीं था और वो जब भी रहेगा जब कुछ भी नहीं होगा. वो सदा से था और सदा रहेगा, आभारी हूँ आपके कमेन्ट का और आगे भी आपसे सदा मार्गदर्शन का अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

alkargupta1 के द्वारा
January 21, 2012

अबोध जी , आपकी छोटी सी बात में बहुत ही गहन भाव निहित हैं….. देश के प्रति बहुत अच्छा सन्देश दिया है.. हम अपने को बांटने वाली हर शक्ति का विरोध करेंगे और उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे….बहुत सुन्दर…बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2012

    सदा की भांति इस बार भी आपका आभारी हूँ अलका जी, की आपने इस रचना को पढ़ा और सराहा , आगे भी मार्गदर्शन का अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Amita Srivastava के द्वारा
January 21, 2012

अबोध जी छोटी सी बात मे बहुत बड़ी बात . और मै तो आपको माफ़ नही करूंगी क्यूँ कि आप मंच पर एक महान लेखक का नाम कैसे भूल गये आप तो पुराने ब्लॉगर है आप से ऐसी उम्मीद नही थी .और उनका नाम है अबोध भाई .वो मंच से गायब होकर मंच को सूना तो कर देते है पर हम उन्हें भूल नही सकते . ऐसे ही लिखते रहिये . जयहिंद .

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2012

    :) अमिता जी आपके स्नेह के लिए आभारी हूँ, पर मई उस लेखक को भूला कहाँ? मई उसे इन विद्वान् लेखकों के सामने कुछ पाता ही नहीं हूँ, इस लिए उसका नाम इस लिस्ट में आता ही नहीं प्रोत्साहने के लए आपका आभारी हूँ, और आगे भी आपसे स्नेह बनाये रखने का आग्रह है http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sadhana thakur के द्वारा
January 21, 2012

अबोध भाई सबसे पहले आपको धन्यवाद् की आपने मेरा नाम याद रखा ,अपनी रचना में स्थान दिया ,वैसे आजकल आपके विचार नहीं मिल रहें है ,आगे उपदेशजनक चर्चा के लिए बधाई …..

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2012

    साधना जी आपको कैसे भूल सकते थे, आप के लेख अपने आप में बड़े प्रभ्व्शाली ……… आजकल मंच पर काफी कम आना हो रहा है, प्रयास रैह्गे की आगे समय निकल कर ……….. क्षमा चाहूँगा की आपके पोस्ट पर कमेन्ट ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

P.Sudha Rao के द्वारा
January 21, 2012

श्री अबोध जी बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर आई हूँ . आपकी रचना आधुनिक समाज का दर्पण है हम एक तरफ शिक्षित होने का दम भरते हैं तो दूसरी और देश को टुकड़ों में बाट रहे हैं स्वार्थ सर्वोपरि होगया है मानवता व देश पीछे छूट रहा है आशा है आप जैसे लोगों की लेखन शैली, शक्ति व विचारों से कुछ लोग सबक ले सकें .

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2012

    सुधा जी आभारी हूँ आपका, की आपने इस लेख को पढने और उसपर कमेन्ट के लायक समझा. सुधा जी, देश से बाहर होने के कारण देश की प्रति प्रेम शायद कुछ ज्यादा हो गया है पर जब अपने देश में अपने ही लोगो को एक दुसरे के प्रति नफरत और ……………….. तो दिल बहुत दुखता है. काश हम केवाल भारतीय होते …….. आपने बड़ी बात कह दी आखिर में, मई किसी को क्या सबक दे सकता हूँ, मई तो खुद ही अबोध हूँ, दूसरो से सीखता रहता हूँ :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Sumit के द्वारा
January 21, 2012

सामाजिक विषय पे, बहुत अच्छा लेख http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/01/19/नारी-और-बेचारा-पुरुष-पति-द/

vinitashukla के द्वारा
January 21, 2012

बहुत सुन्दर आह्वान अबोध जी- ‘हम अपने को बाँटने वाली हर शक्ति का विरोध करेंगे और उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे. बधाई और साधुवाद.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2012

    विनीता जी बहुत बहुत आभारी हूँ आपका की आपने इस लेख को पढ़ा और सराहा. आगे भी आपसे मार्गदर्शन का अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

allrounder के द्वारा
January 21, 2012

जय हिंद अबोध भाई, जो आपकी है वही हमारी भी इश्वर से प्रार्थना है, देश मैं सब मिलजुलकर रहें, और आप यों ही इस मंच को गुलजार करते रहें !

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    चले सचिन भाई, मिल कर सब एक साथ प्रार्थना करते हैं, क्योंकि एक साथ मिल कर किया हुआ काम ज्यादा …………. आभार आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

arunsathi के द्वारा
January 21, 2012

साधु-साधु अतिसुन्दर

amita neerav के द्वारा
January 21, 2012

बस अभी ही पढ़ी है कविता की ये पंक्तियाँ चिली के एंटी कवि निकानोर पार्रा की…. लगा कि आपके ब्लॉग पर  टिप्पणी के लिए उपयुक्त हैं बड़ा मुश्किल है भरोसा करना उस ईश्वर में जो छोड़ देता है अपने बच्चों को उऩके हाल पर बुढ़ापे औऱ बीमारी के तूफानों की दया पर मौत की तो कोई बात ही नहीं…. अब सोचें कि क्या वाकई ईश्वर है औऱ यदि है तो वो इस अमानवीय तरीके से इंसान के दुखदर्द से निस्संग और  उदासीन कैसे रह सकता है…।  औऱ रही देश की बात तो भई व्य़वस्था का अस्तित्व इतना दानवाकार होता जा रहा है कि उसमें लाखों इंसानों  का खून भी कम पड़ता है।  अजीब लगेगा ये कमेंट, लेकिन ये भी एक दृष्टिकोण है सोचने का…. ;-)

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    अमिता जी आप जैसा विद्वान् तो नहीं हूँ पर आपने जो दो उदारहण दिए हैं, उस पर कुछ कहना चाहूँगा. बच्चो को उनके हाल पर कभी नहीं छोड़ता, वो तो माँ के उदार में भी उसके जीवन का इन्तेजाम करदेता है, और बूढों को उनके बच्चो के सही पालन पोषण की सीख देता है, आज के परिवेश में जिस तरह से बच्चो को पालना चाहिए वो कहाँ रह गया है, अगर सही तरह से बच्चो की परवरिश की जाये तो वो …………………, अब तो जैसे बच्चे देख रहे है वो वैसा ही कर रहे हैं खैर ये मेरी सोच है, की इश्वर के दया है जो हम सांस भी ले रहे हैं, और हमें हर सांस के साथ उसका धन्यवाद करना चाहिए, ये मेरा अपना दृष्टिकोण है …. :) आभार आपके अलग सी प्रतिक्रिया का पर इससे भी सोच को नयी दिशा तो मिल ही जाती है. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

nishamittal के द्वारा
January 21, 2012

गहन विचारों से परिपूर्ण जीवन दर्शन समझाती आपकी छोटी सी बात बहुत प्रभावी है.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    आदरणीय निशा जी आपका बहुत बहुत आभारी हूँ की आपने इस पोस्ट को न केवल पसंद किया बल्कि प्रभावी भी पाया. सदा मार्गदर्शन का अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

mparveen के द्वारा
January 21, 2012

अबोध जी नमस्कार, आपका ये आलेख तो ” छोटा बम बड़ा धमाका ” निकला ….. आलेख का नाम है छोटी सी बात और उसके सार में बहुत बड़ी बात कही . इंसान मजबूर भी नहीं है और सक्षम भी नहीं . जय हिंद अबोध जी !!!

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    परवीन जी कभी कभी कुछ अच्चा पढने को मिल जाता है तो ……………. ये मुझे काफी pasand आया तो सोच आप सब के साथ भी बाँट लूं. आभार आपकी प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन का http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

manoranjanthakur के द्वारा
January 21, 2012

अबोध भाई सुंदर परम सत्य से सीधा संवाद कराती रचना बहुत आभार

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    मनोरंजन भाई बस एक परायास था , की इश्वर के अस्तित्व को बड़े सरलता से समझाई हुई बात को आपसे सब के साथ भी बांटू, आपको पसंद आया तो लगता है की कुछ हद तक प्रयास सफल रहा आभार आप http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 21, 2012

आदरणीय अबोध जी. सादर अभिवादन. मेरी पहली पोस्ट पर आपने मुझे प्रोत्साहित कर मार्ग प्रशस्त किया. नेट की तकनिकी से अनजान था. कई बार आभार प्रकट करने हेतु लिखा. पर वो गायब हो जाता था. आज मौका मिला है, आपका बहुत बहुत धन्यवाद. इस लेख की क्या तारीफ करूं. मेरी हैसियत नहीं. प्रेरणादायक. बधाई. आपका मार्गदर्शन सदैव अपेक्षित.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    प्रदीप जी आपका बहतु बहुत धन्यवाद की आपने बार बार प्रयास किया और अंत में ……. :) आप सब जैसे लोगो का प्यार है जी मई प्रयास करता रहता हूँ की कुछ न कुछ लिखता रहू, आशा है की ये प्यार आप आगे भी बनाये रखेंगे … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Santosh Kumar के द्वारा
January 21, 2012

गुरुभाई ,.सादर नमस्कार आपकी छोटी सी बात ही तो सबका सार होती है ,.. बहुत सुन्दर सन्देश देती पोस्ट के लिए आभार .. जय हिंद!..भारत माता की जय!..वन्देमातरम!

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    संतोष भाई सबसे पहले तो क्षमा चाहुगा की आपके साथ फैस बुक पर बात नहीं कर सका, मेरा वह कोई खास समय नहीं है, जब समय मिला ….. आप सब का प्यार है जो आप मेरी रचनाओ को न केवल पढ़ते हैं वरन सराहते भी …. शायद गुरु भाई होने के कारण आप :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

akraktale के द्वारा
January 21, 2012

अबोध जी नमस्कार, आपने इतने सुन्दर उदहारण देकर जो देश प्रेम की ज्योत जलाई है यकीं मानिए हम उसे बुझने नहीं देंगे. जयहिंद.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    ashok जी आपका आभारी हूँ, की आपने सदा की तरह इस बार भी मेरी रचना को पढ़ा और उसे सराहा, बस आपका मार्गदर्शन मिलता रहे तो ………. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

jlsingh के द्वारा
January 21, 2012

अबोध जी, नमस्कार! इतनी रात को आपने परमात्मा (ईश्वर) के अस्तित्व और कर्म के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया है जो अकाट्य सत्य है. आपका ह्रदय कितना विशाल है कि आपने लगभग सभी ब्लोग्गर्स की टीम का गुणगान भी बड़े आराम से चन्द शब्दों में कर दिया! …. आपने भारतीय होने का आह्वान कर सबको चौंका दिया. …….. “इश्वर से प्रार्थना है कि हमें सही और गलत को समझने कि शक्ति दे, हम जात -पात , धर्म, क्षेत्र , प्रान्त से ऊपर उठ कर केवल और केवल भारतीय बने. आने वाला 26 जनवरी हमारे लिए केवल एक छुट्टी मनाने का दिन ना होकर एक ऐसा दिन हो जो हममें एक नयी उर्जा फूंक दे , एक नयी उमंग दे , जिसमे हम प्रण करें कि हम अपने को बांटने वाली हर शक्ति का विरोध करेंगे और उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे . देश सर्वोपरि है और उससे बढ़ कर कुछ नहीं.” इससे अच्छा सन्देश कुछ भी नहीं हो सकता है! बहुत बहुत आभार आपका! आपका हार्दिक सम्मान करता हूँ. डाक्टर साहब की प्रतिक्रिया भी लाजवाब है!!! जय हिंद!! जय भारत!!

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    जवाहर भाई , आस्तिक तो हूँ ही , इस लिए इश्वर की सत्ता को सिद्ध करता एक लेख पढ़ा तो सोचा सबके साथ …… रही baat भारतीय होने की तो आपको भी नहीं लगता की हम अब सब कुछ है पर भारतीय ….. आपके प्यार का, आपके प्रोत्साहन का दिल से आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

January 21, 2012

अबोध भाई जय हिन्द ! आखिर आपकी रचना मिल ही गयी ….आपने तो ब्लॉगरों की पूरी टोली का ही महिमा मंडन कर दिया …लोग तो किसी एक विधा मे ही पारंगत हैं और आप तो समस्त विधाओं मे अपना दखल रखते है…..ईश्वर की उपस्थिती को दर्शाती हुई ये उदाहरण मय रचना अच्छी लगी……आपको बहुत बहुत बधाई और आपको बहुत सारा प्यार और समर्थन !!!

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2012

    डाक्टर साहब बस क्या करें, समय की कमी या अपना ख़राब टाइम मनाजेमेंट, और रही बात ब्लोगरस की महिमा की, तो भय्या, है ये लोग प्रंशसा के पार्ट, और उसमे आप भी (अगर उर्दू में कहें तो ) सरे फेहरिस्त है. :) चले आपसे कभी इलाहबाद आया तो मुलाकात होगी मेरी भी http://abodhbaalak.jagranjunction.com/


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