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चलो चलें (जलें)

Posted On: 17 Nov, 2011 Others में

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लेख  लिखने  के  पहले  ही ,अपने  कुछ  मित्रों  से  क्षमा  चाहता  हूँ , क्योंकि  जिस  विषय  पर  लिख  रहा  हूँ , वो  कई  लोगों  कि   बड़ी   मुंहलगी वस्तु   है.

  

आज  आपके  सामने  धूम्रपान,यानि  स्मोकिंग  के  बारे  में  लिखना  चाहता  हूँ, जो  कि,कुछ  लोगों  के  अनुसार  बड़े  लाभ  कि  चीज़  है  और  कुछ  लोग  इसे  ………

 

धूम्रपान  का  इतिहास  बड़ा  ही  पुराना  है,सदियों  नहीं  बल्कि  हज़ारों   साल  से  इसका  उपयोग  अलग - अलग रूप  में  होता  आ  रहा  है, मैंने  कई  बार  इस  बारे  में  जान्ने  का  प्रयास  किया   के   इसका  उपयोग  करते  क्यों  है ? इसके  क्या  लाभ / हानि  हैं?

 

जहाँ  तक  मुझ  अबोध  ने  पाया,वो  ये  के अक्सर  लोग  इसकी  शुरुआत  केवल  मज़ा  लेने  या  दूसरो  कि  देखा  देखि  या  कि  अपने  आपको  मैचो  दिखने  के  लिए  करते  हैं . धीरे  धीरे  ये  उनकी  दिनचर्या  का  एक  हिस्सा  बन  जाती  है  और  वो  फिर  इसके  बिना  रह  नहीं पाते.वो  उनकी  आदत  बन  जाती  है  और  इतनी  मुन्ह्लागी  हो  जाती  है  कि  छह  कर  भी  वो  इससे  छुटकारा  नहीं  पा  पाते.

 

ये  मेरा  (सौ/दुर  )भाग्य  है  कि  मै  आज  तक  इस    को  अपने  मुंह  से  नहीं  लगा  पाया , यदपि  घर  में  पिता  जी  इसके  आदि  थे  पर  पता  नहीं  क्यों, मै  उनका  अनुसरण  नहीं  कर  पाया , जबकि  और  बातो  में  उनकी  कापी  करने  का  ……………, एक  कारण  ये  भी  हो  सकता  है  कि  मुझे  धुंए  से  एलर्जी  थी  और  इसके  धुए  के  कारण  सांस  कि  तकलीफ  होने  लगती  थी.

 

इससे  जुडी  बहुत  सारी  मज़ेदार  बातें  भी  है  कि  इसके  कई  फायदे  हैं – इसका  प्रयोग  करने  वालो  को  दिल  के  दौरे  कम  पड़ते  हैं  तो  कहीं  ये  कि  मोटापा  कम  करता  है  to कहीं  घुटनों  के  तकलीफ  …… आदि  आदि. इसमें कहाँ तक सत्यता है ये मै नहीं जानता. इससे  जुड़े  बहुत  सारे  जोक्स  भी  मुझे  पढने  को  मिले  के  जो  धूम्रपान  करेगा  उसके  घर  में  चोर  नहीं  आयेंगे  क्योंकि  वो  सारी  रात  खांसते   खांसते  बीतायेगा  और  चोर  समझेगा  कि  ये  …….., वैसे  ही  कुत्ते  उससे  दूर  रहेगे  क्योंकि  वो  धूम्रपान  के  कारण  इतना  कमज़ोर  हो  जायेगा  कि   उसको  चलने  के  लिए  लाठी  का  सहारा  लेना  पड़ेगा  और   कुत्ते  लाठी  देख  कर  दूर  …………………,

अधिकतर  लोग  कहते  हैं  कि  ये  तनाव  को  भगाने  का  काम  करता  है , और  इस  से  टेंशन  दूर  हो  जाता  है . शायद  ये  सही  हो  पर  मेरे  समझ  में  ये  नहीं  आता  कि  क्या  इससे  टेंशन  पूरी  तरह  से  दूर  हो  जाता  है  या  इससे  वो  समस्या  जिसकी  वजह  से  टेंशन  होता  है  वो  भी  दूर  हो  जाती  है ? टेंशन  को  दूर  करने  के  लिए  ऐसी  चीज़  का  प्रयोग  जो  कि  हमारे  जीवन  को  ही  ……………….. कहाँ  तक  सही  है ? मेरे  विचार  से  तनाव  को  दूर  करने  के  लिए  खुली  हवा  में  जा  कर  गहरी  सांस  लेना  बड़ा  लाभदायक  है  न  कि  अपने  कलेजे  को  चिमनी  से  जलाना . ये  जानते  हुए  कि  इसके  कारण  न  केवल  हम  अपने  आपको  बीमार  बना  रहे  हैं  बल्कि  हमारे  साथ  जुड़े  हर  उस  व्यक्ति  को  जो  हमें  आपसे  से  अधिक  प्रिय  है , को  भी  ……………., कहाँ  तक  समझदारी  है ?

 

इसको  छोड़ना  आसन  नहीं  है  अगर  एक  बार  ये  आपके  मुंह  लग  जाए , यही  नहीं  हर  बुरी /अच्छी  आदत  को  छोड़ना  आसान  नहीं  है.बहुत  मज़बूत  इच्छा  शक्ति  कि  आवश्यकता  होती  है , और  इसे  एक  बार  में  छोड़ा  भी  नहीं  जाना चाहिए , नहीं  तो  इसके  परिणाम  स्वरुप  कई  दूसरी  बीमारियों   के  होने  का  पता  चला  है ,  इसको  छोड़ने  के  लिए  मन  में  ठान  लें , ये  सोचे  कि  इसको  छोड़ने   से  मुझे  न  केवल  शारीरिक  लाभ  होगा  बल्कि  आर्थिक  रूप  से  भी  इस  पैसे  का  उपयोग   कहीं  और  बेहतर  जगह  हो  सकता  है , ये  सोचें  कि  मै  अपने  परिवार  को  बेहतर   भविष्य  दे  सकूंगा , बेहतर  वातावरण  दे  सकूंगा.

 

कोशिश  करें, क्योंकि  कोशिश  करने  वालो  कि  कभी  हार  नहीं  होती, बस  कोशिश इमानदारी  से  होनी  चाहिए, क्योंकि  कोशिशें  ही  अक्सर  कामयाब  होती  है.

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76 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

naturecure के द्वारा
December 3, 2011

आदरणीय भाई साहब , .सादर प्रणाम ! बहुत गंभीर विषय पर आपका यह आलेख, निश्चित रूप से मुहलगों को सोचने पर मजबूर करेगा | सुन्दर ढंग से शिक्षाप्रद रचना हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद |

    abodhbaalak के द्वारा
    December 7, 2011

    कहाँ डाक्टर साहब, कोई नहीं सोचने वाला…… ऐसे मुंह लगे मुश्किल से ही ………… आभार आपका जो आपने अपने विचार से मुझे सम्मानित किया. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

bharodiya के द्वारा
December 3, 2011

अबोधभाई नमस्कार सी.एन.जी (सिगरेट का धुआं) पर चलनेवाली गड्डी में जो नुकसान होता है वो नीचे वाजपाईभाई ने अच्छी तरह बताया है । सी.एन.जी से गाडी चलाने मे मजा आता है या टेण्शन दूर होता है ये भ्रम है, आदत हो जाती है वो भी भ्रम ही है । आदत नही एक जरूरत बन जाती है । आदत छुट सकती है जरूरत नही । गड्डी का दो प्रकार है । एक में जीतना भी सी.एन.जी डालते रहो उस का गियर ऐसा होता है के वो सी.एन.जी को ध्यान में नही लेता, अपना पूरानावाला काम किये जाता है । ऐसी गड्डी सी.एन.जी आसानी से छोड सकती है । दूसरी मे गियर सी.एन.जी के आधार पर चलने लगता है । सी.एन.जी नही मिलने से गड्डी रूक जाती है । छोडने के लिये कितने भी कसमे-वादे करवाओ वादे तो वादे ही रहते है ।

    abodhbaalak के द्वारा
    December 7, 2011

    भरोदिया जी, बड़े ही मज़ेदार ढंग से आपने इस विषय पर अपने विचार रखे हैं, और सच ही कहा है की सी एन गी नहीं मिलने से गाड़ी ………….. आभारी हूँ आपका, सदा मिलने वाले सुन्दर कमेन्ट के लिए और प्रोत्साहन के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
December 1, 2011

आदरणीय भ्रमर जी ….. सादर प्रणाम ! आपसे एक विनम्र निवेदन है की या तो लड़किया (अनछुई कलिया) दो देखना और अगर एक ही हो तो उसको मेरी तरफ से हमारे शादी के लायक +बेसब्र अबोध बालक जी को गिफ्ट कर देना क्योंकि उन्होंने सन्नी लियोन पर मेरे हक में अपना दावा छोड़ा था ….. हा हा हा हा हा हा हा जय श्री राधेकृष्ण surendra shukla bhramar5 के द्वारा December 1, 2011 प्रिय राज भाई वैसे तो आप जानते हैं की केवल एक दो नहीं भौंरे तो न जाने कितनी कलियों को चुन चुन सुन्दरता को चाहने वालों -आशिको तक सन्देश पहुंचा देते हैं …वैसे रही प्यारे अबोध जी की बात तो वे बड़ी मुश्किल से तो सामने आते हैं बड़े दिनों बाद अब कलियों फूलों के चक्कर में पड़े तो न जाने और कितना छुप जाएँ … ह हा….. वैसे आप कहे हैं तो उनके पास जाऊंगा …देखता हूँ उनका मन आज कल कैसा है …. एक प्रश्न आप से गुप्त रूप से पूछना चाहता हूँ ये फिल्म उतनी क्यों नहीं चली जिस पर आप कई बार आये ? जब अधर छुए तो तन मन कांपा …………आप की नजर ? जय श्री राधे भ्रमर ५

    abodhbaalak के द्वारा
    December 3, 2011

    ??????????????? भय्या भ्रमर जी, असल बात तो आप दबा ही गए, जो की राज भाई ने आपको करने के लिए ……….. :) रही बात मुश्किल से सामने आने की, तो भय्या क्या करें, एक तो दिमाग तेज़ नहीं चलता, थोडा मोड़ा प्रयास करके लिख लेता हूँ, दूजा आजकल काम कुछ ज्यादा है, ईयर एंडिंग है और लोगों के वेतन बढवाने के लिए ( मेरा काम यही है) लिए प्रोसेस आदि आदि, प्रयास कर रहा हूँ की इस वीक में कुछ लिख कर पोस्ट कर दूं जैसा की अपने गुरूजी से वादा किया है की १५ दिन में एक …………… अडवांस में आभार, उस काम के लिए जिसे करने के लिए हमारे गुरु ……….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    December 3, 2011

    हम लोग तो ईयर एंडिंग मार्च में करते हैं ..आप के यहाँ आज कल …वैसे बहुत सुन्दर कार्य आप का है थोडा हमारे और राज भाई के वेतन पर भी नजर …तब तो जो काम उन्होंने सौंपा सुचारू रूप से हो सकेगा न … आइये फिर कुछ धमाल लेकर ..आप के इन्तजार में न जाने कितने नैन ….. भ्रमर ५

Baijnath Pandey के द्वारा
November 28, 2011

आदरणीय श्री अबोध जी, सादर नमस्कार ध्रूमपान पर एक बहुत हीं सशक्त आलेख | जिन्हें छोड़ना होगा वो तो इसे पढ़कर छोड़ हीं देंगे वरना …………………. कुछ लोंगो का मानना है कि नशा शराब में होती तो नाचती बोतल :D वैसे मेरा मानना है कि आपके इस आह्वान पर हमारा युवा वर्ग तो अवश्य गौर करेगा ( क्योंकि बूढ़ा सुग्गा पोस नहीं मानता :o )…….. बहुत दिनों बाद जागरण पर आपसे रूबरू होकर अच्छा लगा | काफी विचारोत्तेजक आलेख के लिए आपका ह्रदय से आभार !

    abodhbaalak के द्वारा
    November 29, 2011

    धन्यवाद बैजनाथ जी अच्छा लगा आपके विचार पढ़ कर और आपके प्रोत्साहन से, वैसे सच में आपके कदम मेरे पोस्ट पर काफी समय के बाद पड़े हैं, आशा है की अब अगला कदम पड़ने में इतना समय नहीं लगेगा :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

shalini sharma के द्वारा
November 25, 2011

आप ने बिलकुल सही कहा स्मोकिन करना अच्छी बात नही है… अच्छी रचना …………………………….congrates

    abodhbaalak के द्वारा
    November 26, 2011

    शालिनी जी, प्रोत्साहन के लिए और अपने विचार रखने के लिए आपका आभारी हूँ. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

November 23, 2011

अबोध जी ! एक सुंदर और ज्ञानवर्धक लेख के लिए बहुत बहुत बधाई! ”कोशिश करें, क्योंकि कोशिश करने वालो कि कभी हार नहीं होती, बस कोशिश इमानदारी से होनी चाहिए, क्योंकि कोशिशें ही अक्सर कामयाब होती है.” बहुत प्यारा संदेश दिया है आपने! साधुवाद!!

    abodhbaalak के द्वारा
    November 23, 2011

    डाक्टर साहब, मई ज्ञान की बात नहीं करता, अक्सर अबोधता मेरे लेखों से और ……………… इस लिए अगर भूल चूक (जो की अक्सर ही …..) हो जाये तो क्षमा कर दें, लेख आपको पसंद आया इसके लिए आभार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Syeds के द्वारा
November 21, 2011

अबोध जी, हमेशा की तरह सार्थक लेख…धूम्रपान अभिशाप है समाज के लिए….और इसे मिटाना होगा… बेहतरीन लेख के लिए बधाई… http://syeds.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    November 22, 2011

    सय्यद जी, धन्यवाद, सदा की भांति इस बार भी आपके कमेन्ट की प्रतीक्षा कर रहा था ……………… लेख को पसंद करने और सराहना के लिए आभार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

vinitashukla के द्वारा
November 21, 2011

धूम्रपान पर एक सशक्त और प्रभावी आलेख, बधाई अबोध जी.

    abodhbaalak के द्वारा
    November 21, 2011

    धन्यवाद विनीता जी, प्रोत्साहन और समर्थन के लिए.

jlsingh के द्वारा
November 19, 2011

अबोध जी, नमस्कार! चलो चलें, दिल का जिया जलें. साथी रूठे भले, हम तो पिए चलें. एक और कहावत आपको नशाबाज लोगों की तरफ से सुना देता हूँ. खैनी खाए न बीड़ी पीये. ऊ भठियारा(मूर्ख) कैसे जीए. बहुत ही सुन्दर विषय चुना है आपने मैंने भी लिखा था “पीने से अगर नशा न हुआ तो फिर पीया किसलिए!” शायद आपने पढ़ा हो!……

    abodhbaalak के द्वारा
    November 20, 2011

    जवाहर जी पीने वालो को पीने का बहाना चाहिए ये गाना तो आपने सुना ही होगा, और अब तो दर भर के पीने को ……………….. याद नहीं आ रहा है की मैंने आपका ये लेख पढ़ा है या नहीं, देखना पड़ेगा भ्राता श्री. धन्यावाद आपके प्रोत्साहन के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Abdul Rashid के द्वारा
November 19, 2011

प्रिय अबोध जी कुछ बाते सुनने में bhale अच्छा लगे लेकिन भला करेगा ऐसा नहीं नशा हर सूरत में हानिकारक होता है जैसे जब कोई हादसा होता है तो चशमा पहनने वाला तुरंत चशमा उतार कर देखता है इसका यह मतलब नही के उसे सब कुछ दिख जाएगा बल्की मानव शरीर कि इंद्रियों का यह स्वाभाविक अभिव्यक्ति है जो आधुनिक या आरटीफिसियल को नकार कर वास्तविक को प्रकट करता है. नशा इस तरह कि छमता को नष्ट कर देता है स्प्रेम अब्दुल रशीद

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    वेलकम बैक हुज़ूर, शुक्रिया, नवाजिश, करम के आपने फिर से एक बार अपने ख्यालात से आगाह …… :) गलत उर्दू तो नहीं कह रहा? बस कोशिश करता रहता हूँ और आप सब का प्यार उसे ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 19, 2011

आदरणीय अबोध जी सादर प्रणाम,,,,,,,,,,,,,,धुम्रपान हर हाल में स्वस्थ्य के लिए हानिकारक ही है,एक ब्यक्ति की लत के वजह से कई जिन्दिगियों पर इसका खतरा बढ़ने की संभावना रहती है,,,,,,,,,,धन्यवाद!

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    बात तो सही है धर्मेश भाई, पर क्या करें, आदत तो आदत है और वो बड़ी ही मुश्किल से ……………., कोशिश ये होनी चाहिए की इसकी शुरुआत ही न की जाए पर आजका दौ दिखावे और नक़ल का ……….. आभार आपका, की आपने अपने …….. वेलकम बैक हुज़ूर, http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

satya sheel agrawal के द्वारा
November 19, 2011

अबोध जी .प्रत्येक अभिभावक को अपने नौनिहाल पर ध्यान देना चाहिए. किशोर अवस्था में दोस्तों के सत्संग में इसका चस्का लगता है.यदि वहीं पर अंकुश लगा दिया जाय तो पछताने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.बहुत अच्छे उद्देश्य को लेकर सारगर्भित लेख लिखा है आपने.

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    सत्या जी, मेरा भी यही मानना है की प्रारंभ से ही अगर इसपर रोक………….. अक्सर कम उम्र में ही इसकी लत लग जाती है इस लिए मां बाप का ही ये कर्तव्य है की अपने …. आभार आपका की आपने इसे अपनी प्रतिकिर्या का लायक भी समझा http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Ramesh Bajpai के द्वारा
November 19, 2011

प्रिय श्री अबोध जी सामाजिक सरोकारों की यह मशाल जलनी ही चाहिए |

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    आदरणीय बाजपेई जी प्रयास रहता है की कुछ सार्थक विषयों ………….., जिनका हमारे जीवं एम् कुछ न कुछ……… आपके प्रोत्साहन के लिए आपका आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rajeev jain के द्वारा
November 18, 2011

अबोध जी आप हमेशा ही बोधपूर्ण बात कहते हैं बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    राजीव जी, आप तो मज़ाक कर रहे हैं, मै और बोध………… :) बस कभी कभी गुरु जी मेरे मुझे ड्राफ्ट भजे देते हैं और मै उसे ………… जय हो गुरुदेव की….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

akraktale के द्वारा
November 18, 2011

अबोध जी सादर नमस्कार, सही लिखा शौक शौक में रोग गले लगाना याने नशा करना, चाहे शराब का हो या सिगरेट का. सार्वजनिक स्थानों या दफ्तरों में सिगरेट न पिने का सरकारी कानून बन चुका है मगर उसका प्रभाव कहीं नजर नहीं आता. सिगरेट पिने के लाभ तो आपने बता दिए किन्तु इसके नुक्सान के लिए लोगों को बताने से भी कुछ नहीं होगा. उनको यदि देखना ही है तो टीबी अस्पताल या कैंसर के अस्पताल में जा कर खुद ही देखना होगा तभी शायद सुधर पायें. जब तक सेवनकर्ता की खुद की इच्छा शक्ति प्रबल नहीं होगी तब तक इस लत से पीछा छुडाना मुश्किल है. धन्यवाद.

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    अशोक जी सच कहा है अपने, केवल कहने से और खुद देखने से बहुत फर्क पड़ता है, काश ये लोग ऐसे सेंटर में जाकर देखने की किस तरह से इसके कारण तरह तरह की ……….. और ये भी सच है की आपको हर जगह इसका उपयोग करते लोग मिल जायेंगे, कोई रोकने टोकने वाला नहीं है, जबकि हमारे कानों के हिसाब से …….. आभार आपके समर्थन और विचार का http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

allrounder के द्वारा
November 18, 2011

नमस्कार भाई साहब, जैसा की आपने लेख मैं लिखा है की सिगरेट पीने से टेंसन दूर होती है, ऐसा कुछ लोगों का मानना है, इसीलिए देवानंद जी की फिल्म का एक गाना भी है, हर फ़िक्र को धुंए मैं उड़ाता चला गया, मगर मेरे विचार से यदि हर फ़िक्र सिगरेट का धुंआ उड़ाने से उड़ जाती तो शयद सिगरेट मार्केट मैं ब्लैक मैं मिलती ! एक अच्छे सामाजिक हितकारी लेख पर बधाई !

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    सचिन भाई, हास्य रस के साथ आपने अपने विचार रखे हैं, हम तो वैसे भी आपके फैन में आते हैं, और सदा आपकी रचनाओं को …………. प्रयास रहता है की कुछ ऐसा लिखा जाए जो की ……….. समर्थन और प्रोत्साहन के लिए आबार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sdvajpayee के द्वारा
November 18, 2011

अबोध जी, घूम्रपान के बारे में लिख कर आपने सराहनीय कार्य किया है। आप तो इस दुष्‍प्रवृत्ति दूर रहे हैं , लेकिन मैंने 25-26 साल अंधाधुध सिगरेट पी है। कुछ अनुभव जन्‍य निवेदन-‍ – धूम्रपान शरीर को ऐसे खोखला करता है जैसे घुन लकडी को। स्‍टैमिना कमजोर हो जाता है। -गले की खराबी ,पाचन  तंत्र कमजोर हो जाना, फेफडे कमजोर होजाने पूरी सांस न ले पाना, चलने-सीढी चढने में सांस फूलने लगना, ठीक से नींद न आना,रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाना, सर्दी-गर्मी ज्‍यादा लगना, ठंठ और ठंठी चीजों से एलर्जी हो जाना, आये दिन कफ-खांसी से दोचार होना, मानसिक एकाग्रता में कमी और स्‍वभाव का चिडचिडा हो जाना  जैसी अन्‍यान्‍य कई बीमारियां धूम्रपान की सीध देन होती हैं।आसपास रहने वाले को, बीबी-बच्‍चों को बिना पिये नुकसान पहुंचता है। - लत लग जाने के बाद छोडना कठिन होता है। सामान्‍यत: हार्ट अटैक वगैरह के बाद ही लोग छोड पाते हैं। धीरे धीरे की अपेक्षा एक बार में झटके से दृढ संकल्‍प पर छूटती है। धीरे धीरे यह लत नहीं छूट पाती। -धूम्रपान के साथ शराब वगैरह की भी आदत है तो करैला नीम चढा हो जाता है।  शोबाजी के अलावा फायदा एक भी नहीं है। नुकसान ही नुकसान है।  -नियमित दिनचर्या है और साफ हवा में ब्‍यायाम-प्राणायाम आदि करते हैं तो 24 घंटे में चार -पांच सिगरेट तक पी  जा सकती है। दुष्‍प्रभाव प्राय: नहीं होंगे। लेकिन , वह भी सुबह और खाली पेट नहीं । -

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    आदरणीय बाजपेई जी धन्यवाद आपके की आपने अपने अनुभव को हम सब के साथ बांटा, सच तो ये है की इसके दुष्प्रभाव से सभी वाकिफ है पर फिर भी………….., और इसी लिए मैंने कहा था की ये ऐसी मुन्ह्लागी है की एक बार लग गयी तो ………. लेख को समय दें, और उसपर अपने अनमोल विचार रखने के लिए आपका आबरी हूँ, सदा अपने मार्गदर्शन ………….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sumandubey के द्वारा
November 18, 2011

अबोध जी नमस्कार,बहुत बढिया आलेख जिसे इसकी लत लग गयी है। छोड़ना मुश्किल है।

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    सुमन जी कोशिश करने वालो को कभी हार नहिः होती, पर कोशिश सच्ची होनी चाहिए, बस यही कह सकता हूँ, आपके प्रोत्साहन और समर्थन के लिए आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

alkargupta1 के द्वारा
November 18, 2011

अबोध जी , बहुत अच्छा लिखा है किसी भी बुरी आदत को त्यागने के लिए दृढ इच्छा शक्ति और दृढ़संकल्प अत्यावश्यक है यह कार्य कठिन तो अवश्य है पर असंभव कदापि नहीं……धूम्रपान जैसे चिंतनीय विषय पर विचारणीय व अति उत्तम संदेशात्मक आलेख !

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    आदरणीय अलका जी, बस अपनी समझ से जो थोडा बहुत समझ में आता है, लिखने का प्रयास करता रहता हूँ, न अपने आपको विद्वान् पाटा हूँ और न …………………, बस जो दिल में आये उसे आप सब के साथ शेयर करने का ……… आप सब के स्नेह और समर्थन का लिए आभारी रहा हूँ और अभी भी …. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

munish के द्वारा
November 18, 2011

अबोधजी, ये धुम्रपान बहुत काम की चीज है…… कुछ तो फायदे आपने लिखे ही हैं……… सिगरेट na होती तो बोलीवुड का vilen bachcha najar aata……. ashok kumar jaise abhineta की अदायगी अधूरी rah जाती…… अमिताभ bachchan की deewar फिल्म बीडी peene का स्टाईल तो yaad ही hoga……. sab धुम्रपान ke कारण ही इतने मशहूर hue…… ये तो सिगरेट का धुआं है jo हमें रेल ke injan jaisa अहसास karata है इंजन की tarah muh se धुआं निकालते रहो, बहुत se सिगरेट के paicket इतने khoobsoorat hote हैं की unhe sajaane के काम में भी लाया ja sakta है ……. aur भी bahoot se फायदे हैं……… fir kabhi likhoonga …… बहुत badhiya vishya uthaaya आपने

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    वाह वाह वाह! क्या क्या ढूंढ कर आपने फायदे बताये हैं मुनीश भाई, दिल को गार्डेन गार्डेन कर के रख दिया, मज़ा ही आ गया. :) आपके इस मज़ेदार और ज्ञानवर्धक कमेन्ट के लिए तहे दिल से आपका धन्यवाद, कृपा दृष्टि बनाए रखन प्रभु, और ऐसे ही……….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Amita Srivastava के द्वारा
November 18, 2011

अबोध जी बहुत अच्छे विषय पर कलम उठाया आपने , पर दुःख का विषय यह है कि इस खतरनाक नशे का सेवन करने वाले बढ़ते ही जा रहे है बल्कि अब हमारे देश मे आधुनिकता के नाम पर ये माडर्न लडकियाँ भी ……….| धन्यवाद |

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    अमिता जी, आपने भी मेरा अंदाज़ ……………………, :) सही कहा है अपने की आधुनिकता के नाम पर इसका प्रचालन बढ़ता जा रहा है जो की एक चिंतनीय ………….. आभार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

mparveen के द्वारा
November 18, 2011

अबोध जी नमस्कार, इसके सेवन से क्या – क्या नुकसान हैं सब जानते हैं जो इसका सेवन करते हैं पर छुटकारा पाना आसान नहीं हैं .. क्यूंकि इसकी लत जिनको पड़ चुकी है वो अब विवश हैं . पर आपने सही कहा अगर कोशिश की जाये तो इतना मुश्किल भी नहीं है ….. अतः सब से जो इसका सेवन करते हैं उनसे मेरा अनुरोध है की इसके फायदों की तरफ ध्यान ना देते हुए जरा इसके नुकसान देखे और इससे समय रहते छुटकारा पा ले …. धन्यवाद…

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    परवीन जी आपके समर्थन, और प्रोत्साहन के लिए आबार, पर सच तो ये है की आदतें बड़ी मुश्किल से ……….., पर अगर मन में ठान कर सच्चाई से प्रयास किया जाए तो ……… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajesh Dubey के द्वारा
November 18, 2011

भाई आपने ठीक हे लिखा है, धुम्रपान के कई फायदे भी दिख रहे है. टेंसन से मुक्ति के इस माध्यम में न रोग रहेगा न रोगी.

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    :) सही कहा राजेश जी, जब रोगी ही नहीं रहेगा तो फिर …………… आभार आपके विचार के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rita singh 'sarjana' के द्वारा
November 17, 2011

अबोध जी , नशा चाहे कोई भी हो वह बुरा ही होता हैं , मुझे नहीं लगता धुम्रपान से कोई तनाव कम हो जाता हैं l पिने वालो के लिए यह सिर्फ एक तर्क हैं l अच्छी पोस्ट के लिए बधाई l

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    rita ji aksar iska उपयोग करने वाले लोग यही कहता है की इससे तनाव …….., मई अपने निजी अनुभव का हवाला नहीं दे सकता क्योंकि आज कभी इसका …………. आभार आपके प्रोत्साहन के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

ranjan Kumar के द्वारा
November 17, 2011

अबोध जी, कहना जितना आसान है करना उतना ही कठिन, कोई भी आदत एकबार लग जाए तो छूटती नहीं, विशेषकर इसतरह की लत, व्यक्ति जकड़ता जाता है. अच्छे लेखह के लिए बंधाई स्वीकार करें

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    रंजन जी, सच कहा है आपने, कहने और करने में अंतर तो होता है पर अगर कोशिश की जाए, ये सोच कर की इससे क्या लाब है और क्या के खो रहे हैं तो ………… आभार आपके विचार और प्रोत्साहन के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rajkamal के द्वारा
November 17, 2011

माय डियर अबोध जी ….. प्रेम से लबालब नमस्कार ! मैंने कहीं पढ़ा था की धूमपान करने वाले के आसपास के लोगों को भी उस “धुएं का कमीशन दस प्रतिशत” बिना मांगे ही मिल जाता है …… यानी की अगर मैं आपके सामने बैठ कर दस सिगरेट (कारतूस) पियूँगा तो कम से कम एक कारतूस तो आपके सीने में भी पहुँच ही जाएगा …… बताइए कब आऊ आपको कमीशन देने ?….. हर बार की तरह से धन्यवाद कहना चाहता हूँ इस ‘हफ्तावसूली’ के लिए भी ….बस अगली किस्त भी समय पर मिल जानी चाहिए ….. मुबारकबाद सहत धन्यवाद

    Santosh Kumar के द्वारा
    November 17, 2011

    ?????????????…………हा हा हा हा हा हा हा हा …???

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    आदरणीय गुरु जी, आपका कमीशन तो मुझे मिलता ही रहता है लेकिन दुसरे रूप में, आपका प्यार, स्नेह, सपोर्ट, मार्गदर्शन, प्रंशसा आदि आदि, आने वाले कुछ दिन तक बहुत अधिक व्यस्त है, वोर्क्लोड़ बढ़ गया है और संभवता अगले १ महीने तक नेट पर उतना समय नहीं दे पाऊंगा जितना देता आ रहा हूँ, पर भीर भी आपकी हफ्ता वसूली की पूरी कोशिश रहेगी……………., आपकी बात ताल सकूँ इतना सामर्थ्य …………… :) आभार , धन्यवाद, थैंक्यू, ………….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    गुरु भाई, दो कारण से आपके इस कमेन्ट का उत्तर दे रहा हूँ, पहला तो आपसे भी जोर का ठहाका लगाना चाहता हूँ, हा हाहा हः हा हा हा हा हा आहा आहा (देख लें, हा हा से – आह तक पहुँच गया) दूसरा, जैसा की पार्थ जे ने कहा की कमेंतेरिया …………………….., एक कमेन्ट बढ़ा लेता हूँ, आइडीया कैसा है :)

Santosh Kumar के द्वारा
November 17, 2011

आदरणीय गुरुभाई ,.सादर अभिवादन पहले तो इस प्रेरक पोस्ट के लिए आपका अभिनन्दन करता हूँ ,,..कोशिशें अवश्य ही कामयाब होती हैं ,..निरुत्साहन की भावना अन्दर से आनी चाहिए…आपने बिलकुल सही कहा की शुरुआत मजे से होती है … धीरे धीरे आदत बन यह बीमारी का रूप धारण कर लेती है ,..कोई गंभीर समस्या आने से पहले आत्मचिंतन कर निश्चय कर लिया जाय तो निश्चित ही छूटती है…स्वयं कभी चैन स्मोकर था लेकिन ईश्वर की कृपा से पूरी तरह छोड़ने में कामयाब रहा …….सुन्दर प्रेरक पोस्ट के लिए आभार

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    संतोष जी सबसे पहले तो आपको बंधाई की आपने चैन स्मोकर होते हुए भी इसे छोड़ने में सफलता पायी, ये आपकी दृढ इच्छा शक्ति का ……….. आसन नहीं है इसे छोड़ना, और मई कई लोग को देख चूका हूँ जो की …………. मुझे अनगिनत बार लोगो ने इसे अपनाने ये सिर्ग तराई kar ने ………… पर बचता आया हूँ और …… आभार आपके आभार का , और प्रोत्साहन का, और ……….., और ………..और ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

manoj के द्वारा
November 17, 2011

सुन्दर पर क्या कतरें लत छूटती ही नहीं, कोशिश भी विफल जाती hain

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    मनोज जी सेंटेंस समझ में ठीक से नहीं आया, कतरे लत ? बहरहाल, सच कहा है की ये आसानी से छूटती नहीं है और कोशिश ……….. बहुत मजबूत इच्छा शक्ति की आवश्यकता है ………….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Piyush Kumar Pant के द्वारा
November 17, 2011

मित्र अबोध जी……. अक्सर हम लोग ये कहते हैं की सिगरेट पीने वाले की सेहत खराब होती है…….. और उसका तर्क ये होता है की ठीक है क्या फर्क पड़ता है…… पर सिगरेट पीने वालों को ये समझना होगा की वो अपनी सेहत खराब करने के लिए स्वतंत्र हैं पर सिगरेट आपसे कहीं अधिक नुकसान आपके आसपास वालों के लिए हानिकारक है जो अप्रत्यक्ष धूम्रपान के शिकार बनते है……… तो कम से कम अगर आप अपने स्वास्थ्य का खयाल नहीं रखना चाहते तो किसी दूसरे के स्वास्थ्य को नुकसान न पहुंचाएं …….. अच्छे संदेश से भरे लेख के लिए आपका शुक्रिया…….

    Santosh Kumar के द्वारा
    November 17, 2011

    पिऊष जी ,.सादर नमस्कार जब तक आवाज नहीं आती तब तक दिल कहता है,…कि पाल ले एक रोग नादाँ जिंदगी के वास्ते ,..सिर्फ सेहत के सहारे जिंदगी चलती नहीं …हार्दिक आभार

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    पियूष भाई सच कहा है अपने, हम आज़ाद देश में हैं और हमें अपनी मर्ज़ी से हर ………….., पर ऐसा तभी तक होना चाहिए जब तक की इससे दुसरे प्रभावित न हो रेह हैं पर , क्या किया जाए, ……….. अब तो ये एक फैशन का प्रतीक हो के रह गया है, छोटे छोटे बच्चे भी ………… आपके प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ, http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

shashibhushan1959 के द्वारा
November 17, 2011

मान्यवर अबोध जी, सादर. बात तो अच्छी बहुत है ये मगर ……….. बात तो सच्ची बहुत है ये मगर ……….. सोचता हूँ छोड़ दूँ इसको मगर ………… क्या कहूँ कुछ कह न पाता हूँ मगर ? . ऐसा मैं नहीं हर पीनेवाला छोड़ने की बात सुनने पर कहता है. उसे यह सोचना और करना चाहिए…… कोशिश करें, क्योंकि कोशिश करने वालो कि कभी हार नहीं होती, बस कोशिश इमानदारी से होनी चाहिए, क्योंकि कोशिशें ही अक्सर कामयाब होती है.

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    आदनीय शशि जी इस मगर ने तो जिगर ………… :) सही कहा है, कम से कम प्रयास तो ज़रूर होना चाहिए, सफलता कभी न कभी तो ………. आभार आपके विचार ……… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

malkeet singh "jeet" के द्वारा
November 17, 2011

सही कहा कई लोग तो “ज्योति से जोत जलते चलो पर ही जी रहे हैं ” बढ़िया पोस्ट

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    :) जी सही कहा मलकीत भाई आपने, जोत से जोत ……….. और साथ में खुद भी, और दूसरों को भी जलाते ………….. आभार आपकी प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

November 17, 2011

बहुत ख़ुशी हुई, ये लेख पढ़कर. धूम्रपान-शराब इत्यादि किसी दीमक से कम नहीं होते. और समस्या ये है, की इनपर कोई पुख्तगी से विचार रखता ही नहीं है. आपने लिखा है… तो बधाई..!

    nishamittal के द्वारा
    November 18, 2011

    अबोध जी नशा ,धूम्रपान पर आपका लेख पढ़ा ,लेख तो कई लिख कर बदनाम हो चुकी हूँ परन्तु थोडा भिन्न कलेवर लिए आपका आलेख अच्छा लगा.

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    तिम्सी जी मुझे ख़ुशी हुई ये जानकार की आप कुश हुई :) हर समाया का एक हल है, पर उसको दूर करने के लिए उस पर सच्चाई के साथ, हर पछ को देख कर कदम उठाना चाहिए, पर …………… और खास कर के जब वो हमारी आदत में से हो, तो फिर और भी मुश्किल हो जाता है आभार आपकी प्रतिक्रिया के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    आदरणीय निशा जी मई ठीक से आपकी बात समझ नहीं सका, किस बात से बदनाम हुई? क्या मेरे से कोई धृष्ट हो गयी, या आप कुछ और कहना छह रही हैं और मई अबोध उसे समझ….? आपने विचार सदा ही मेरे लिए बहुत महत्व रखते हैं और उनकी प्रतीक्षा रहती है, आशा है की आप मेरी शंकाओं का ……………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Paarth Dixit के द्वारा
November 17, 2011

आदणीय अबोध जी, नमस्कार.. बहुत दिनों के बाद इस मंच पे नज़र आये आप..बहुत ही गंभीर मुदद्दे के ऊपर एक अच्छी रचना..धूम्रपान इंसान को अंदर से धीरे-धीरे खोखला कर देती है और जब तक इंसान ये बात जान पाता है तब तक….. इन पंक्तियों से इस गंभीर लेख को आपने हास्य भी प्रदान किया ही है.. “ मुझे पढने को मिले के जो धूम्रपान करेगा उसके घर में चोर नहीं आयेंगे क्योंकि वो सारी रात खांसते खांसते बीतायेगा और चोर समझेगा कि ये …….., वैसे ही कुत्ते उससे दूर रहेगे क्योंकि वो धूम्रपान के कारण इतना कमज़ोर हो जायेगा कि उसको चलने के लिए लाठी का सहारा लेना पड़ेगा और कुत्ते लाठी देख कर दूर” …… समाज के लिए अच्छा सन्देश देती एक अच्छी रचना..हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए.. http://paarth.jagranjunction.com/2011/11/16/कमेन्टटेरिया-के-लक्षण-एव

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    पार्थ जी बस प्रयास रहता की टूटा फूटा ही सही, कुछ लिख डाला जाए और जो की प्रास्नागिक भी हो या ….. अब आप को अच्छा लगा तो, लग रहा है की प्रयास पूरी तरह से विफल नहीं हुआ, आभार, धन्यवाद, थैंक्स, कृपा दृष्टि बनाए रखें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

minujha के द्वारा
November 17, 2011

अबोध जी नमस्कार मेरा तो यही मानना है,कि इंसान की आदत आदत ही रहनी चाहिए उसकी कमजोरी नही बननी चाहिए,और जहां तक  धूम्रपान की बात है तो यही कहुंगी कि खुद जलती है,इंसान को जलाती है और फिर उसका सबकुछ जला डालती है जन जागरण के उद्देश्य से लिखे गए आलेख के लिए धन्यवाद आपका

    abodhbaalak के द्वारा
    November 19, 2011

    आदरणीय मीनू जी अक्सर ऐसा होता है की आदतें कमजोरी में बदल जाती है और आदमी के बस में नहीं होता की एक बार इसे …………………. आपके प्रोत्साहन और स्नेह के लिए आपका आभारी हूँ, प्रयास रहता है की जो थोड़ी बहुत समझ है उसके हिसाब से कुछ लिखता रहूँ, कहाँ तक सफलता मिलती है ये तो …………….. फिर से एक बार अपक आभार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
November 17, 2011

प्रिय अबोध जी अभिवादन बहुत सुंदर विषय आप का ..सार्थक लेख ..यह देखा जाता है की समाचार में कभी किसी चीज के फायदे गिनाये जाते हैं तो कभी नुक्सान ..प्रक्त्यक्षम किम प्रमाणं …हमें अपने आस पास समाज में इसका लाभ देख लेना चाहिए उनके मुह के पास थोड़ी देर बैठ उसकी गंध देख लेना चाहिए ..उसका पैसा कैसे चेन स्मोकर होने से जाता है देख लेना चाहिए …खांसना …कफ .. सांस फेफड़ा सब स्वतः बता देता है …अब चाहे वह दिल जला पढ़े या टेंसन दूर करे ..या उसे अच्छा कहे …उसकी मर्जी …. सुन्दर लेख … आभार भ्रमर ५ आदत को छोड़ना आसान नहीं है.बहुत मज़बूत इच्छा शक्ति कि आवश्यकता होती है , और इसे एक बार में छोड़ा भी नहीं जाना चाहिए , नहीं तो इसके परिणाम स्वरुप कई दूसरी बीमारियों के होने का पता चला है , इसको छोड़ने के लिए मन में ठान लें , ये सोचे कि इसको छोड़ने से मुझे न केवल शारीरिक लाभ होगा बल्कि आर्थिक रूप से भी इस पैसे का उपयोग

    abodhbaalak के द्वारा
    November 18, 2011

    भ्रमर जी सच तो यही है की इस आदत से न केवल शारीरिक हानि खुद इसके उपयोग करने वाले को होती है वरन दुसरे भी उन्चाहे इससे ………………… इससे जितनी साड़ी बीमारियाँ होती है अगर उसको लोग ठीक से जान लें तो शायद …………, पर जैसा की ग़ालिब ने (शायद) कहा था की शराब ऐसे मुंह लगी होती है (यहाँ पर सिगरेट) की जालिम छोटी ही नहीं ……….. :) आभार आपके कमेन्ट और प्रोत्साहन कल इए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/


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