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आत्म - मंथन

Posted On: 21 Oct, 2011 Others में

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Grandma-Moses1

आज  आपको  एक  बार  और एक  कहानी  सुनाने  जारहा  हूँ  जो  कि  पिछले   दिनों  एक  पर्सोनालिटी  डेवेलोपमेंट  प्रोग्राम  के  बीच  सुनने  को  मिली. हो  सकता  है  कि  आपमें  से  भी  कुछ  लोगो  ने  इसे  पहले  सुना  या  पढ़ा  हो.

 

ये  कहानी  है  ग्रांड माँ   मोस्से  कि , और  अगर  आपने  उनके  बारे  में  नहीं  सुना  हो  तो  इंटरनेट  पर  केवल  उनका  नाम   डाल  कर  देखें , अनगिनत  वेब  साईट  पर  आपको  उनका  नाम  …………………

 

उनका  जन्म  १८  सितम्बर  1860 को  अमेरिका   के  न्यू   योर्क  के   एक  गाँव  ग्रीनविच  में  हुआ  था . बचपन  में  उन्हें  पेंटिंग  का  बहुत  शौक   था  पर  उनके  माता पिता   ने  उनकी  बहुत  ही  कम  आयु  में  शादी  करा  दी  और  वो  अपने   पति  के  साथ  खेतो  में  काम  करने  लगी .

 

समय  बीतता  गया  और  जब  वो  70 साल  कि  हुई  तो  उनके  पति  का  देहांत  हो  गया , उसके  बाद  भी  वो  अपने  बेटों  और  उनके  बेटों   और  उनके  ……….., के  साथ खेतो मे  काम  करती  रही . तब  तक  वो  लगभग  68 बच्चो  कि  माँ / दादी /पर  दादी  बन  चुकी  थी . इस  आयु  में  आ  कर  वो  खेतो  में  काम  करने  के  लायक  नहीं  रह  पायी  थी  और  फिर  उन्होंने  एक  बार  फिर  से  अपने  बचपन  के  प्यार     यानी  पेंटिंग  को  अपने  जीवन  का  हिस्सा  बनाया .

 

उनके  प्रारंभिक  चित्र  लोगों  को  केवल  उपहार  देने  के   काम  आते  थे , और खुद  उनके  अनुसार  उन्होंने  अपने  पोस्ट  मैन  को  केक  बना  कर  गिफ्ट  देने  से  आसान  ये  समझा  कि  वो  चित्र  बना  कर  उसे  ………., उनके  प्रारंभिक  चित्र  केवल  गाँव  कि  जीवनी  को  और  वहां  के  प्राक्रतिक  सुन्दरता  को  दर्शाते  थे .

 

उनकी  शुरूआती  पेंटिंग   केवल  2-3 डॉलर  में  बिका  करती  थी . उनके  गाँव  के  जनरल   स्टोर  वाले  ने  उनकी  पेंटिंग्स  से  अपनी  दुकान  को  सजा  रखा  था , एक  दिन  एक  आर्ट  कलेक्टर  और  इंजिनीयर  लौईस  कल्दोर  का  उधर  से  गुजरना  हुआ  और  उसने  ये  पैनितिंग्स  देखि  और  साड़ी  कि  साड़ी  खरीद  ली , उसके  बाद  वो  ग्रांड माँ  मोसेस  के  घर  गया  और  उसने  १०  पेंटिंग्स  और  कह्रीदे , और   साडी  पेंटिंग्स  अपने  साथ   न्यू  योर्क  ले  गया .

 

कुछ  समय  के  बाद , ग्रांड माँ  मोसेस  पेंटिंग्स  कि  दुनिया  में  अनजान  नहीं  रही  और  उनकी  पेंटिंग्स  आर्ट  गेल रीज   में  लगने  लगी . उनकी  केवल  एक  पेंटिंग    इतने  में  बिकने  लगी  जितना   उन्होंने  अब  तक  के  पूरे  जीवन  में  सपरविआर    काम  कर  के  नहीं  कमाया  था . उन्होंने  अपने  जीवन     के  आखरी  20 साल  में  लगभग  3600 पेंटिंग्स  बनायी  और  उनके  अंतिम  10 वर्ष  में  उनकी  हर पेंटिंग  1 लाख  डालर  कि  बिक  रही  थी . 2006 में  उनकी  एक  पेंटिंग  “sugaring off” 1.2 मिल्लियन   डालर   में  बिकी .

 

इस  पूरी  रचना  का  अभिप्राय  ये  था  कि  हमें  जीवन   में   वो   करना  चाहिए  जो  हम  पसंद  करते  हैं . हम  सब  में  एक  छिपी  हुई  नैसर्गिक  प्रतिभा  होती  है  जिस  से  हम   अक्सर  अनजान  रहते  हैं . जीवन  में  हम  अक्सर  काम  दूसरो  के  लिए  करते  हैं , माँ  पिता  जो  चाहते  हैं  वो  बन  जाते  हैं , लोगो  कि  अपेक्छायों  को  पूरा करने में हम अपने अन्दर झांक कर देखते ही नहीं हमें चाहिए कि हम अपनी पसंद को ही अपना   कर्म क्षेत्र बनाये  और अगर हम ऐसा करेंगे तो हमारा काम काम न हो कर हमारी पसंद बन जायेगा और फिर उसे करने में हमें आनंद आएगा और अपने आप जेवण में सफलता के शिखर पर …………..

 

अपने अन्दर कि छिपी नैसर्गिक प्रतिभा को हमें स्वयं ही पहचानना होगा  क्योंकि हमें हमसे अच्छा  और  कौन  जान  सकता  है? उसे  पहचानिए  और  फिर  उसे  निखारने  के  लिए  जो भी  आवश्यक  प्रयास  हो , वो  करें , और  फिर  जीवन  में  अंतर  देखें  . ज़रूरी  नहीं  है  कि  आप  को  आर्थिक  रूप  से  उतना  ही  लाभ   मिले  जो  आप  को  अपने  वर्तमान  में  मिल  रहा  है  पर  कम  से  कम  आप  वो  तो  कर  रहे  होंगे  जो  आपको  पसंद  है .

 

पर  क्या  हम  ऐसा  कर  सकते  हैं  क्योंकि  बदलाव  सदा  ही  ………….., क्या  हम ?

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85 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajkamal के द्वारा
October 30, 2011

प्रिय अबोध जी ….. सस्नेह+ स्प्रेम नमस्कारम ! आपका मुबार्कबाद सहित आभार न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    abodhbaalak के द्वारा
    October 31, 2011

    राज भाई, आप कहाँ हैं? काफी समय हो गया आपका कोई पोस्ट नहीं आया, लगता है की अभी तक आपका डीवाईस ………………. मंच पर आपको काफी मिस किया जा रहा है ये तो आप भी जानते होंगे :)

Timsy Mehta के द्वारा
October 30, 2011

आदरणीय महोदय, अच्छा लगा आपके विचार पढ़कर. मेरा ये मानना है, कि कलम का सम्मान तभी हो सकता है, जब उसे सुन्दर उद्देश्य से प्रयोग किया जाए. आपके द्वारा रचित इन शब्दों में कलम की विजय दिखी. समयावकाश के कारण अधिक पढ़ पाने में असमर्थ हूँ. पुन: बधाई.

    rajkamal के द्वारा
    October 30, 2011

    टिमसी जी आपका मेरे मनपसन्द अभिनेता अमित जी पर लिखा लेख पढ़ा –भाषा शैली और विचार बढ़िया लगे …..मैं यही कहना चाहूँगा की आप शराबी +आनंद + मुकद्दर का सिकंदर + शोले नामक उनकी सिर्फ यही चार फिल्मे ही देख लीजिए –लेकिन घर पर नहीं सिनेमा मे ….. फिर आप यकीनन मजबूरीवश नहीं बल्कि स्वेच्छा से उनके फैन क्लब मे शामिल होना पसंद करेंगी …… जय अमिताभ ! हा हा हा हा आपका मुबार्कबाद सहित आभार न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| (आपके ब्लाग पर यह कमेन्ट पोस्ट नही हो पाया -इसलिए यही पर भेज रहा हूँ )

    abodhbaalak के द्वारा
    October 31, 2011

    तिम्सी जी आपके कमेन्ट भी आपके विद्वता का संकेत देते हैं, जैसे की आपके लेख. मई बस ऐसे ही लिखने का प्रयास करता रहता हूँ, अच्छा नहीं लिखता ये मेरे को भी पता है, आप जैसे लोग पढ़ लेते हैं और उसपर अपने विचार……………… आभार, आशा है की आगे भी आपके मार्गदर्शन मिलते रहेंगे

    Charchit Chittransh के द्वारा
    November 4, 2011

    मित्र ; आपके इस लेख का उद्देश्य सार्थक होकर महत्वपूर्ण है ! शायद उपरोक्त टिपण्णी का कारण शाब्दिक त्रुटियाँ है जिनका अभी तक ना सुधारा जाना आपका (भी ) समयाभाव ही हो सकता है या मेरी तरह अपनी (ही ) पोस्ट को दुबारा ना पढ़ने की गंदी आदत ! हालाकि जिस बिंदु पर टिपण्णी की गई है उसे पुनरावलोकन कर ही पुनर्प्रतिक्रिया देना अधिक उपयुक्त है !

    Timsy Mehta के द्वारा
    November 9, 2011

    राजकमल जी, हार्दिक धन्यवाद. हो सकता है, किसी दिन पसंद-नापसंद बदल भी जाए..! और हाँ, अबोध बालक जी, मेरी उपरलिखित टिप्पणी में प्रकट रूप से एक त्रुटी देखी जा सकती है. शायद समयाभाव कभी-कभी ऐसा भी करा देता है. किसी भूल अथवा नासमझी से समयाभाव को समयावकाश लिख दिया था. कृपया ‘समयाभाव’ ही पढ़ा जाए. :)

mparveen के द्वारा
October 30, 2011

जी अबोध जी वाही करना चाहिए जो हमें अच्छा लगे … हम सभी के अन्दर कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है बस उसको पहचान ना पड़ता है बस फिर उसी दिशा में प्रयास करें तो सफलता आपके क़दमों में ….. बहुत ही अच्छा आलेख एक प्रेरणा का स्रोत …. देरी से प्रतिकिर्या के लिए क्षमा करें ….

    abodhbaalak के द्वारा
    October 31, 2011

    परवीन जी, देर आये दुरुस्त आये, …… :) आप मेरी रचनाओं को पढ़ लेती हैं ये ही क्या कम बड़ी बात है, और उसपर से आप उसपर अपने विचार भी रखती हैं और मेरा प्रोत्साहन………., आपका आभारी हूँ, और अनुरोध है है की आगे भी ……………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

naturecure के द्वारा
October 29, 2011

आदरणीय भाईसाहब सादर प्रणाम ! आपकी सराहना हेतु आभार ! योग गुरु तो नहीं पर आपके आशीर्वाद से “प्राकृतिक चिकित्सा,पंचकर्म, योग,एक्यूप्रेशर,चुम्बक चिकित्सा, स्पर्श चिकित्सा एवं होम हर्बल थेरापी” की शिक्षा प्राप्त की है और जो भी थोडा-बहुत ज्ञान प्राप्त किया है उसे आप सब में बांटने का प्रयत्न कर रहा हूँ

    abodhbaalak के द्वारा
    October 31, 2011

    कैलाश जी आप तो विद्वान है, आपकी रचनाएं आपके गुणों को …………….. आभारी हैं हम की आप अपने ज्ञान को …… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rajeevdubey के द्वारा
October 28, 2011

अबोध जी, प्रेरणादायक लेख पर साधुवाद…

    abodhbaalak के द्वारा
    October 29, 2011

    आपका धन्यावाद राजीव जी अच्छा लगा की आपने भी मेरे लेखों को पढना ………….. :) आगे भी आपसे ……… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Tufail A. Siddequi के द्वारा
October 28, 2011

आदरणीय भाई साहब सादर अभिवादन ! एक प्रेरणादायक सुन्दर पोस्ट. बधाई आपको. http://siddequi.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    October 29, 2011

    शुक्रिया तुफैल जी, आपका प्रोत्साहन पा कर अच्छा लगा, आगे भी ……………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
October 26, 2011

आदरणीय भाई साहब सादर प्रणाम ! आपको तथा आपके पूरे परिवार को दीप पर्व की बहुत बहुत शुभ कामनाएं |

    abodhbaalak के द्वारा
    October 29, 2011

    कैलाश जी, मेरे विचार से मैंने आपको ई मेल किया था दीवाली की विश का, अगर न किया हो तो क्षमा कर दें और मेरी और से भी आपको सपरिवार दीवाली के ढेरो ………………………… बन्धाइअयन …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

vinitashukla के द्वारा
October 23, 2011

एक प्रेरणादायक सुन्दर आलेख. बधाई आपको.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 24, 2011

    विनीता जी आपके विचार और प्रोत्साहन के लिए आभार आपको सपरिवार दीवाली के ढेरो बन्धाइयन http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sumandubey के द्वारा
October 23, 2011

अबोध जी नमस्कार , सार्थक लेख दीपावली की शुभकामना .

    abodhbaalak के द्वारा
    October 24, 2011

    सुमन जी आपका प्रोत्साहन का आभारी हूँ, आपको भी दीवाली की शुभकामना http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

वाहिद काशीवासी के द्वारा
October 23, 2011

अबोध भाई, किसी की कही हुई एक बात याद आ गई आपकी पोस्ट पढ़ कर। जिस दिन हमारा शौक़ ही हमारा पेशा बन गया उसके बाद से हमें अपनी ज़िंदगी में एक भी दिन काम करने की ज़रूरत नहीं रह जाएगी। अति उत्तम पोस्ट। 

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    वाहिद भाई, ये quote मैंने भी पढ़ा है, और सही भी है ये, की अगर हमारा पसंद ही काम बन जाए तो, …….., और मैंने इसे अपने लेख में मेंशन भी किया है. आपका आभारी हूँ की आपने इस पोस्ट को न केवल पढ़ बल्कि इसपर अपने विचार भी ……….. :) आपको सपरिवार दीवाली के लाखों करोड़ों बन्धाइयन … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

akraktale के द्वारा
October 23, 2011

आदरणीय अबोध जी नमस्कार, आपने बहुत ही अच्छी रचना से आत्म संतुष्टि की जरुरत और पैगाम दिया है. हम सारी जिंदगी नौकरी या कोई व्यापार कर के रुपया तो बहुत कमाते हैं किन्तु आत्म संतुष्टि शायद नहीं. इसीलिए हम अपने कार्य स्थल पर कुछ बैचेन रहते हैं. यदि यही काम हमारी रूचि का हो तो हम वहां से हटना कभी पसंद ही नहीं करेंगे अर्थात अधिक रूचि अधिक समय अधिक व्यापार और अधिक धन. बहुत सुन्दर साधुवाद.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    प्रिय भाई, सही कहा है आपने, की आत्म संतुष्टि ………….. पर क्या करें, हम जो हैं न, वो बस हम ही हैं, :) आपके प्रोत्साहन और विचार, दोनों के लिए आपका आभारी हूँ आने कृपादृष्टि बनाए रखें यही अनुरोध है आपको भी सपरिवार दीवाली के लाखों करोड़ों बन्धाइयन … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

October 23, 2011

 अबोध जी, प्रेरक प्रसंग प्प्रस्तुत करने लिए बहुत बहुत साधुवाद !”जीवन में हम अक्सर काम दूसरो के लिए करते हैं” बिलकुल सच आपने कहा है….कभी अपने लिए जो पसंद हो अगर करके देखो तो कुछ बात ही और होती है। मेरा एक शेर है इसी बात पे: जो दिल मे आए वो करो, पागल कहे या पीर, दुनिया कहेगी कुछ न कुछ उस पे न जाइए ….अच्छा लगा !!दिवाली की शुभकामनाएँ !!

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    सूर्य जी बहुत ही खूबसूरत पंक्तियों के साथ आपने अपनी बात राखी है. पर हम अक्सर दूसरो के कहे को, और उनकी द्वारा लगाईं गयी अपेक्शायों को पोर करने में……………. वैसे मेरे पोस्ट पर आपकी ये पहली प्रतिक्रिया है इस लिए आपका …………. अनुरोध है की आगे भी अपने …………. आपको सपरिवार दीवाली के लाखों करोड़ों बन्धाइयन … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

आर.एन. शाही के द्वारा
October 23, 2011

बातों-बातों में बहुत बड़ी शिक्षा दे गए अबोध जी, बधाई !

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    आदरणीय शाही जी बहुत समय के बाद आपकी दर्शन हुए, लगता है की आप काफी व्यस्त हैं क्योंकि आपके लेख पढने को नहीं मिल रहे. आभार आपका, स्नेह बनाए रखें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

bharodiya के द्वारा
October 22, 2011

अबोधभाई नमस्कार बधाई आपका ईस ग्रांड माँ मोसेस का परिचय करवाने का । ईन को तो सलाम ही करेंगे, और क्या ।

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    :) धन्यवाद भरोडिया जी बस अच्छा लगा जब इन के बारे में सुना, लगा उम्र बाधा नहीं है ……………. आभार आपका http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajkamal Sharma के द्वारा
October 22, 2011

प्रिय अबोध भाई ….. सप्रेम नमस्कार ! इसी हफ्ते ही सौ साल से उपर की उम्र के फौज सिंह ने मेराथन दौड़ जीत ली है …..आज ही यह खुशी की खबर सुनी की एक प्राडक्ट के वोह ब्रांड अम्बैस्डर भी बना दिए गए है ….. आपकी रचना की नायिका के बारे में पढ़ा था और आज आपका लेख पढ़ कर फिर से याद आ गया ….. आपकी रचना की एक एक बात गहरी +भीतर तक उतरने वाली +कुछ सोचने पर म्क्बुर कर देने वाली होती है ….. मेरी शुभकामनाये और मुबारकबाद दीपावली की सपरिवार बधाईयां और मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    bharodiya के द्वारा
    October 22, 2011

    अब ये पिले सर्कल क्या है कोइ बताएगा ।

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    राजकमल भाई क्षमा चाहता हूँ की मैंने उनके बारे में नहीं ……………, वो भी प्रशंसा का पात्र है की १०० ………….. टाइम मैनेजेमेंट का एक प्रोग्राम पिच्छले दिनों अत्तेंद किया था जिसमे ग्रंद्मा के बारे में सुना था, सोचा की इनको आप सब के साथ …… आपको अच्छी लगी तो लगा की प्रयास …. :) मुझे याद है की आपने एक बार पूछा था की ये स्माइली कैसे आती है( जिनका आजकल आप जम कर उपयोग करते हैं), अब मई आप से पूछ रहा हूँ की इतनी साड़ी………………, मै तो केवल हंसने और रोने का ही …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    भरोदिया जी ये पीले पीले हमारे भावों को दर्शाते हैं पर आते कैसे हैं ये तो श्री श्री श्री राजकमल जी से मई भी पूछ रहा हूँ :)

    akraktale के द्वारा
    October 23, 2011

    भरोडिया भाई जी ये सारे पीले सर्कल आदरणीय राजकमल जी के साफ़ और खुले मन का प्रतीक हैं, उनके मन के सारे भाव आपके सामने हैं कुछ भी छुपा नहीं है.शायद राज जी भी मुझसे सहमत हों.धन्यवाद.

    rajkamal के द्वारा
    October 23, 2011

    प्रिय अबोध जी ….सस्नेह नमस्कार ! प्रिय भरोदिया जी …… नमस्कार ! आदरणीय अशोक जी …..सादर अभिवादन ! आप सभी को मेरी शुभकामनाये और मुबारकबाद दीपावली की सपरिवार बधाईयां और मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o आदरणीय अशोक जी , मेरी तीसरी आँख कह रही है है की अब मुझको पांच बजे उठ जाया करना चाहिए ….. सुबह की ताजा प्राणवायु और पक्षियो का कलरव +चुस्ती फुर्ती +सेहत और तंदरुस्ती यह सब मुझको मिल कर एक औसत बिहारी के मुकाबले में वास्तव में बेहतर पंजाबी बना देगा ….हाहा हा हा हा ************************************************************************************************* मैं माइक्रोसॉफ्ट के आउटलुक में मेल की सैटिंग देख रहा थी की तभी इत्तेफाक से मुझको इन पीलिया के मरीजों का दीदार हुआ ….. इनके सहारे ही भारी भीड़ में मैं अपना कमेन्ट खोज लेता हूँ ….. एक बार फिर से आप सभी स्नेही सज्जनो +साथियो को सपरिवार दीपावली की मुबारकबाद

राही अंजान के द्वारा
October 22, 2011

अबोध जी…..सादर नमस्कार ! मैं भी आपके विचारों से सहमत हूँ…..लेकिन आजकल के प्रतिस्पर्धा से भरे संसार में इतना मंथन करने के लिए किसी के पास समय ही कहाँ है । सब दूसरों को देख कर ही…. . दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ !! :)

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    संदीप जी सच कहा है आपने, की आजकल की प्रित्स्पर्धा ………… कुछ पाने के लिए बहुत कुछ खोना पद रहा है ………. आभारी हूँ आपका……… वैसे मैंने दीवाली की विश तो अलग से कर ही दी है :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Raj के द्वारा
October 22, 2011

good work abodh ji, keep it up…

Amit Shukla के द्वारा
October 22, 2011

अबोध जी, सादर नमस्कार, प्रेरणा दायक कहानी

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    अमित जी आभारी हूँ आपका की आपको ये रचना प्रेरणादायक लगी. आगे भी अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Tamanna के द्वारा
October 22, 2011

कभी-कभार हम चाहते हुए भी वह नहीं कर सकते जिसमें हमें खुशी मिलती है. कम से कम भारत जैसे देश में तो नहीं जहां पारिवारिक बंधनों के चलते व्यक्ति को अपनी इच्छाओं को दबाना ही पड़ता है.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    सही कह रही हैं आप, अक्सर हम वो नहीं कर पाते जो करना चाहते हैं, और इसके पीछे ज्यादातर हमारे इमोशनल कारण ही होते हैं, बहरहाल, फिर उन्ही कारणों से हमें सारे उम्र …………… शुक्रगुजार हूँ आपका, की आपने इसे पोस्ट को पढने और कमेन्ट करने के लायक समझा http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

manoranjan thakur के द्वारा
October 22, 2011

कहानी और रचना दोनों बेहतरीन

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    प्रिय मनोरंजन भाई आपका आभारी हूँ की आपका स्नेह सदा ही ……….. बस अपने इस प्रेम को बनाए रखें और ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

syeds के द्वारा
October 22, 2011

अबोध जी, सबसे पहले तो बेहतरीन रचना के लिए बधाई,हर आदमी के अन्दर कुछ न कुछ प्रतिभा/क्षमता होती है…अगर वह उस प्रतिभा के हिसाब से काम करेगा तो..कामयाबी उसके कदम चूमेगी और अगर…प्रतिभा से अलग कुछ करना चाहेगा तो … महँ वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा है.. Everybody is a genius. But, if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will spend its whole life believing that it is stupid. –Albert Einstein http://syeds.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    सय्यद जी सबसे पहले तो बहुत ही सुन्दर कुओटे के लिए आभार, सच कहा है आपने, की सबमे ही कुछ न कुछ खास होता है पर उसे जान कम ही लोग पाते हैं, अगर हम उसे जान लेते तो शयद सफलता …….. आभारी हूँ आपका……….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

vikasmehta के द्वारा
October 22, 2011

अबोध जी नमस्कार ………….आपकी यह पोस्ट बहुत ही शानदार है अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    विकास जी आपको पोस्ट पसंद आई तो लगता है की प्रयास विफल नहीं …………. आगे भी अपनी विचारे से अवगत कराते रहें, ………. आभार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

alkargupta1 के द्वारा
October 22, 2011

अबोध जी , प्रेरणास्पद कहानी है..अपनी प्रतिभा के अनुसार कार्य करने में व्यक्ति अवश्य ही सफल होता है और मानसिक संतुष्टि भी मिलती है…… अच्छी रचना को साझा करने के लिए धन्यवाद ! दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    आदरणीय अलका जी आपका आभारी हूँ की आप मेरे जैसे ब्लोगर की पोस्ट पढ़ कर और उन पर अपने कमेन्ट कर के उनका उत्साह बढ़ाती हैं, जीवन में हम सदा वो कहा कर पाते हैं जो को …………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Alka Gupta के द्वारा
    October 23, 2011

    अबोध जी , आप बहुत अच्छे ब्लॉगर हैं…..आशावादी सोच और आशावादी दृष्टिकोण रखिये…..आप वो लिखते हैं जिसमें जीवन के प्रति कोई न कोई सन्देश होता है… रचनाएँ प्रेरणास्पद होती है…. और हम सब आपकी रचनाओं को पढने के लिए स्वयं ही आकर्षित हो जाते हैं……आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !!!

Rajesh Dubey के द्वारा
October 22, 2011

भाई आपने मेरे मन की बात लिख दी है. प्रत्येक व्यक्ति की अपनी प्रतिभा होती है. लेकिन हम इसको नजर अंदाज कर देते है. आत्म मंथन की बात है कि अपनी प्रतिभा को पहचाने और निखरे.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    राजेश भाई, चलिए, अब आपके मन के साथ मेरा मन भी जुड़ गया :) हम कहाँ आत्म मंथन कर पाते हैं, अब तो समाज में आगे बढ़ने की होड़ में ………………. आपका अबरी हूँ की आपने इस लेख को पानी प्रतिक्रिया के ……… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Paarth Dixit के द्वारा
October 22, 2011

अबोध जी,नमस्कार..एक बहुत ही प्रेरणादायक कहानी हम सबसे साझा करने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार..इस कहानी का सारांश बिलकुल सत्य बात कहता हुआ “इंसान को अपने जीवन में वही कार्य करना चाहिए जिसे वो पसंद करता हो जिस कार्य में उसका दिल लगता हो.. साधुवाद..

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    धन्यवाद पर्थ जी, आपके कमेन्ट का, सच तो है पर जीवन में अक्सर हम वो कर नहीं पाते जो की …….. आगे भी अपने विचार ……… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

jlsingh के द्वारा
October 22, 2011

बहुत ही प्रेरणा दायक उदहारण! अबोध जी, नमस्कार और धन्यवाद! ….. इतनी सुन्दर कृति को साझा करने के लिए.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    प्रिय जवाहर भाई आभारी हूँ आपका की आपने ……….. अपना स्नेह बनाए रखे http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

alokranjan के द्वारा
October 21, 2011

बहुत ही अच्छी और प्रेरणाप्रद कहानी.सचमुच हमें अपनी पसंद को पहचान कर ही आगे बढ़ना होगा.महानायक अमिताभ बच्चन ७० के दशक में जब बॉलीवुड मी भाग्य आजमाने के लिए मुंबई गए तब उस समय कोल्कता में १५०० रुपये मासिक की नौकरी कर रहे थे.उनके दोस्तों ने उन्हें बहुत रोका की तू इतनी अच्छी सेलरी छोड़ कर कहाँ जा रहा है.अगर उस समय वो अपने दिल की बात नहीं सुने होते तो आज हमें बिग बी के रूप में ये महानायक नहीं मिलाता.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    अलोक जी मेरे ब्लॉग पर कमेन्ट करने वाली की लिस्ट में आपका स्वागत है, :) आपने बड़ी ही सही उदाहरण दिया है अपनी बात को ………….. आगे भी आपसे अनुरोध है की अपने विचार से अवगत करते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Nikhil के द्वारा
October 21, 2011

प्रेरक रचना मंच पर रखने के लिए आभार अबोध भाई. आत्मविश्वास से अगर अपने पसंद की चीज की जाए तो सफलता मिलती ही है. अंग्रेजी में एक कहावत है ” love what you do, do what you love”

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    निखिल जी सही कहा है अपने की अगर आत्मविश्वास से कोई कार्य किया जाए और ………… आभारी हूँ आपका , के आपने इस लेख को अपने विचार रखने के योग्य समझा आगे भी अपने विचारों से अवगत करते रहें … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Amar Singh के द्वारा
October 21, 2011

बहुत प्रेरणा प्रद कहानी, इसे हमें अपने जीवन में अवश्य उतारना चाहिए.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    आभारी हूँ आपका अमर जी, कम से कम हमें प्रयास तो अव्ह्स्य करना चाहिए, की हम ………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

UMASHANKAR RAHI के द्वारा
October 21, 2011

आदरणीय कहानी पढकर लगा की अपनी प्रतिभा को व्यवसायिक नहीं बनाना चाहिए उसका मूल्य एक दिन अवश्य मिलता है कहानी को बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    आदरणीय राही सर ये कहानी तो नहीं थी, बल्कि किसी का जीवन वृत्तांत ………… हमें जीवन में बहुत सी बातें लगता है की करनी या नहीं करनी चाहिए पर हम ………… आभारी हूँ आपका की आपने इस लेख को पढ़ा और अपनी विचार रखे… आगे भी आपसे अनुरोध है की अपने विचारों से अवगत करते रहें ,.,.. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sdvajpayee के द्वारा
October 21, 2011

प्रेरक कहानी। अपनी पसंद के अनुरूप कर पाने का सुख-संतोष कुछ अलग ही होता है।

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    आदरणीय बाजपेई जी आभारी हूँ की आप जैसे विद्वान न केवल मेरी पोस्ट को पढ़े वरन उसपर ………. अनुरोध है की मेरी त्रुटियाँ ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Santosh Kumar के द्वारा
October 21, 2011

आदरणीय अबोध जी ,.सादर नमस्कार बहुत प्रेरक प्रसंग साझा करने के लिए आपका हार्दिक आभार ……. अक्सर बचपन का शौक कामयाब हो जाता है ,..जीवन की जिम्मेदारिओं से जूझते हुए पहचान कम ही हो पाती है,….दीपावली की आपको हार्दिक अग्रिम शुभकामनाएं

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    गुरु भाई आभारी हूँ आपका, के आप ने एक बार फिर से मेरा प्रोत्साहन ….. प्रयास रहता है की कुछ अच्छा अगर मिल जाए तो सबके साथ ………… बस अपना प्रेम बनाए रखें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Abdul Rashid के द्वारा
October 21, 2011

प्रिय अबोध जी आपने ऐसे अहसास को कुरेद दिया की मन के जज्बात मचलने लगा काश ऐसा होता लफ्जो की जादूगरी बहूत पसंद आया आपने अच्छा किया यह पोस्ट आज कर दिया क्योंकि मै कुछ दिनों के लिए अजमेर ख्वाजा के दर पे जा रहा हूँ और आगरा, देल्ही भी घूमने का प्लान है तब शायद आपलोगों से रु ब रु होने का कम ही मौक़ा मिलेगा ऐसे यह सुन्दर रचना पढने में देरी हो जाता दीपावली की हार्दिक सुभकामनाओ के साथ सप्रेम अब्दुल रशीद

    akraktale के द्वारा
    October 23, 2011

    आदरणीय राशिद जी जाने से पहले दीपावली की शुभकामनाएं लेते जाएँ , राह में जितने भी दीप मिलें समझना सब आपको हमारी शुभ कामनाएं दे रहे हैं. शुभ यात्रा,शुभ दीपावली.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    रशीद भाई शुक्रगुजार हूँ आपका, की आपने अपने मोहबत भरे कमेन्ट से ……. ऊपर वाले से दुआ है की वो आपको सही सलामत हर जगह ……….. उम्मीद है की जल्द से जल्द आप वापस आकर एक फिर से मंच की शोभा……… आदरणीय बाजपेई जी http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

nishamittal के द्वारा
October 21, 2011

प्रेरणा प्रदान करती कहानी,साथ ही सन्देश व्यक्ति की नैसर्गिक प्रतिभा आयु की मोहताज नहीं.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    आदरणीय nisha जी सही कहा आपने, कभी भी देर नहीं होता है कुछ करने के लिए…………….. पर हम हैं की अपने आपको …….. प्रोतासहं के लिए आपका आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Lahar के द्वारा
October 21, 2011

अबोध जी सप्रेम नमस्कार आप ने एक दम सही कहा की हमे वही बनना चाहिए जिसे हमारा दिल स्वीकार करे | हम दूसरो की पल भर की ख़ुशी के लिए तो आपना करियर बदल लेते है लेकिन हमे जन्दगी भर पछताना पड़ता है हम दिल कसोट कर रह जाते है ! मेरा मानना है की जिसे दिल कहे उसी को करो कम से कम खुद तो खुश रहोगे | हम पैसे थोड़े कम कमाएंगे लेकिन हमारी आत्मा तो खुश रहेगी |

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    लहर जी आपके प्रोत्स्साहन के लिए आभारी हूँ, सही कहा है आपने की हमें ऐसा करना चाहिए पर हम करते नहीं हैं, और इसके पीछे कई विवशताएँ हैं …………. आपको दीवाली के ढेर सारी बन्धाइआन http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Amita Srivastava के द्वारा
October 21, 2011

अबोध जी हर आदमी के अंदर एक नैसर्गिक प्रतिभा होती है पर जीवन की भागमभाग मे हम सब कुछ भूल शायद सिर्फ आर्थिक लाभ के पीछे ही भागते रहते है | ग्रांड माँ मोसेस की कहानी हम सबको ये संदेश देती है कि उम्र किसी चीज मे बाधा नही बनती ,जरूरत हौसले के उड़न की है |

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    अमिता जी आपने इस पूरी रचना के सार को ही इन दो पंक्तियों में ………… आर्थिक और एमोतिनल, यही दो कारण हैं जो हमें अपने अन्दर की प्रतिभा …….. अपने स्नेह को बनाए रखें ………., आभारी रहूँगा….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

naturecure के द्वारा
October 21, 2011

आदरणीय भाई साहब, सादर अभिवादन ! योग्यता कभी व्यर्थ नहीं जाती ,ग्रांड माँ मोसेस इसकी मिसाल हैं | बहुत ही प्रेरणादायी पोस्ट ,आपका बहुत-बहुत आभार ! एवं दीपावली की अग्रिम हार्दिक शुभकामनायें |

    abodhbaalak के द्वारा
    October 23, 2011

    प्यारे डॉक्टर साहब, सही कहा है आपने की योग्यता कभी व्यर्थ नहीं जाती और कभी न कभी, कहीं न कहीं………. पर हम अपने ही अन्दर कहाँ झाँक कर देख पाते हैं, बस दूसरों के अपेक्ष्हायों पर ……… आभारी हूँ आपके समर्थन और प्रोत्साहन के लिए, आपको भी सपरिवार दीवाली के लाखों करोड़ों बन्धाइयन … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 25, 2011

    आदरणीय भाई साहब, आपने सही कहा हम अपनी शक्तियों को भूले बैठे हैं ,सारा समय दूसरों की टांग खींचने में गवां देते हैं | आपके स्नेह भरे प्रतिउत्तर के लिए आभार एवं सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं |


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