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अनकही अनसुनी शायरी

Posted On: 13 Oct, 2011 में

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“तेरी काली घनी जुल्फों में, दिल मेरा कहीं पे अटका
चला न करो गोरी बल खाकर, मेरे दिल को लगे है झटका”
 
 
 “वोह खुद को छुरी, और दूसरों को खरबूजा, ऐसे ही नहीं कहते है
वहां पर कटने वाले तो कटते ही है, काटने वाले भी कट जाते है”

 

“सुना था की शमा जलती है तो, परवाने उसपे जल -२ के मरा  करते है
कोई हमे देखे तो जाने की हम कैसे जल -२ के जिया करते है”

 

“गम नहीं दिल टुकड़ो  में है
टुकड़ो में ही सही है तो हसीनाओं के पास”

 

“तुम याद रखे जाने के लायक ही  नहीं हो
और हम भूल जाने के कायल भी नहीं है”

 

“लूटा है किसी ज़ालिम ने अपना बन   कर
हकीकत भी आई मेरी जिन्दगी में तो सपना बन कर”

 

“आज मौसम का मिजाज कुछ बदला-२ सा है
फिजा का रंग भी कुछ बदला -२ सा है
लगता है की कुदरत को भी खबर हो गई है मेरे यार के आ जाने की”

 

“गर आदमी जो चाहता वोह सब उसे मिल गया होता
तो आज आदमी खुदा होता और खुदा “खुदा” न होकर न जाने क्या होता”

 

“जब से हमने कर ली है गुनाहों से तौबा
फरिश्ते भी अब  हमे सजदा करने लगे है”
“मालिक तेरे जहाँ ने बदनाम करके छोड़ा
हम सीधे साधे लोगों का जीना हराम करके छोड़ा”

 

“हमने कहा खुदा से की हमे देख आने दो
कौन हमारी कब्र पर रो रहा है
अपने आंसुओ से उसको भिगो रहा है”
कहा खुदा ने की उसके कारण ही तो तो कब्र में सो रहा है
हमी कह देंगे उससे कि शोर मत करो ,
चुप हो जाओ-मेरे बच्चे कि नींद में खलल हो रहा है”

 

“तरसती है दुनिया जिस मुकाम को
वोह आज हमने तेरी नजरो में उठ कर पाया है
मर कर ही सही तेरे होठों पर मेरा नाम तो आया है”

 

“आँख जब खुले तभी सबेरा होता है
कोई रौशनी की  उम्र नहीं पूछता
दूर जब अँधेरा होता है”

 

“हम नक़्शे कदम पे नहीं चलते
कदमो के निशां बनाते है –
रास्ता पूछ ले गर कोई
उसे मंजिल का पता बताते है”

 

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72 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

D33P के द्वारा
January 28, 2012

जब से हमने कर ली है गुनाहों से तौबा फरिश्ते भी अब हमे सजदा करने लगे है”… बहुत उम्दा शायर है आप ,आपकी शायरी ने दिल लूट लिया अबोध जी

    abodhbaalak के द्वारा
    January 29, 2012

    दीप्ति जी ये मेरी शायरी नहीं है , इसका श्री हमारे राजकमल जी को जाता है मैंने केवल उसमे थोडा सा जोड़ घटाव ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com :) आभारी हूँ आपका, इन सारे कमेंट्स के लिए …. :)

Lahar के द्वारा
October 19, 2011

प्रिय अबोध बालक जी सप्रेम नमस्कार आपने शेरो – शायरी का एक खुबसूरत गुलदस्ता प्रस्तुतु किया है धन्यवाद |

    abodhbaalak के द्वारा
    October 21, 2011

    लहर भाई ये गुलदस्ता तो यकीनन है पर इसके रचियेता हमारे राजकमल जी हैं. बंधाई के वास्तविक हक़दार वओ हैं . :) आपके कमेन्ट के लिए आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Tufail A. Siddequi के द्वारा
October 18, 2011

भाई साहब अभिवादन. “तरसती है दुनिया जिस मुकाम को वोह आज हमने तेरी नजरो में उठ कर पाया है मर कर ही सही तेरे होठों पर मेरा नाम तो आया है” बहुत खूब. बधाई. http://siddequi.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    October 18, 2011

    आपका बहुत बहुत शुक्रिया तुफैल जी, सारे शेर हमारे राजकमल जी ने बड़े ही प्यार से मुझे भेंट किये थे की मई उन्हें पोस्ट कर दूं, ये उनका प्यार ही था जो ……. आपका आभारी हूँ, वैसे तारीफ तो सब हमारे गुरूजी की है :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

chaatak के द्वारा
October 18, 2011

हमारी राह में कांटे बिछा के खुश था वो, मगर उसके भी तकिये पर कहीं बेचैनी थी!

    abodhbaalak के द्वारा
    October 18, 2011

    चातक जी ये हुआ आपका संन्य देओल वाला ढाई किलो का …………….. २ पंक्ति में बड़ी ही सुन्दर …………… वैसे आपने ये तो जान ही लिया होगा की ये सारे के सारे शेर हमारे राजकमल जी ने लिखे हैं इस लिए अगर इनकी शान में कुछ शब्द कह देते तो ……… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

वाहिद काशीवासी के द्वारा
October 17, 2011

लूटा है किसी ज़ालिम ने अपना बन कर हकीकत भी आई मेरी जिन्दगी में तो सपना बन कर क्या बात है वाऽऽऽऽऽह। अबोध जी भाईसाहब को हमारा सलाम पहुंचा दीजियेगा हमसे तो ख़फ़ा-ख़फ़ा से नज़र आ रहे हैं ना जाने क्यूँ।  आभार व अभिवादन,

    abodhbaalak के द्वारा
    October 17, 2011

    वाहिद भाई मुझे लगता नहीं की आपको मेरे ज़रिये सलाम कहलाने की ज़रुरत है, आप और राज भाई तो ………. वैसे मुझे लगता तो नहीं की राज जी खफा होंगे और वो भी आप पर…. वैसे राज जी की शायरी पढ़ कर बहुत सारे लोग वह वह …………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

malkeet singh jeet के द्वारा
October 17, 2011

अबोध जी बस इतना कहूँगा “गज़ब ,गज़ब ,गज़ब ,” मै तो पहले ही नहीं मानता था अब लोग भी कहेंगे , आप अबोध तो बिलकुल नहीं रहे

    abodhbaalak के द्वारा
    October 17, 2011

    malkeet ji भय्या ये सारी की सारी रचना हमारे राजकमल जी की हैं, बंधाई के वास्तविक हक़दार वो है, उस बार उन्होंने हास्य और व्यंग के बजाये इस …………… रीज़ल्ट आपके सामने हैं :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 16, 2011

प्रिय अबोध जी अभिवादन बदला बदला सा रंग..निखरता रंग आप के मोहिनी कलम का ..मन मोहक ..किस किस को ..चुन कर तारीफ़ के पुल बाँधूँ सब एक से बढ़ कर एक “जब से हमने कर ली है गुनाहों से तौबा फरिश्ते भी अब हमे सजदा करने लगे है” “मालिक तेरे जहाँ ने बदनाम करके छोड़ा हम सीधे साधे लोगों का जीना हराम करके छोड़ा” क्या विरोधाभास और सुखद अहसास …आभार आप का ….यों ही गुल खिलते रहें .. भ्रमर ५

    abodhbaalak के द्वारा
    October 17, 2011

    भाई मेरे कुछ भी नहीं बदला, क्योंकि ये सारे शेर मेरे हैं ही नहीं :) राजकमल जी के बाग़ के फूल हैं ये सारे इस लिए साड़ी तारीफें ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sadhana thakur के द्वारा
October 15, 2011

अबोध जी ,बहुत अच्छी शायरी ,मन को भा गई ……..

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    साधना जी इन सारे शेरो की रचना का श्री हमारे राजकमल जी को जाता है जिन्होंने इन शेरो के गुलदस्ते में एक से एक बढ़ कर ……………….. देख लें, राज जी केवल हास्य और व्यंग ही नहीं वरन अगर लिखने पे आ जाएँ तो हर रस के ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीय साधना ठाकुर बहन जी ….सादर अभिवादन ! आपको यह शायरी पसंद आई +मन को भाई यह जान कर आपके भाई का मन गार्डन -२ हो गया …. लेकिन आपको कौन सा शेयर ज्यादा पसंद आया यह अगर बतला देती तो आपकी पसंद को जान कर मन को बहुत ही सकूं मिल जाता ….. आप दोनों का तहेदिल से आभार :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

ajaykumar2623 के द्वारा
October 15, 2011

आदरणीय अबोध जी आपने शायद आधार,अद्वितीय पहचान पत्र के बारे में सुना होगा.मुझे उसमें कई विसंगतिया दिखाई दे रही है जिसकी वजह से शायद ये भारत की गरीब जनता तक ना पहुच पाए.हलाकि मैंने इस सन्दर्भ में आधार हेल्पलाइन से बात की है,वहाँ से मुझे रिफरेन्स आई डी (१५९३९३९) भी दी गयी है लेकिन मुझे नहीं लगता की इस पर कोई विचार होगा.कृपया आप भी मेरे इस लेख का विश्लेषण करें और अपना कीमती सुझाव दें.क्योंकि यदि ये आम आदमी तक नहीं पहुच पाया तो कोई फायदा नहीं होगा सिवाय जनता के पैसों की बर्बादी के. कई बच्चे जो बचपन से गरीबी की वजह से दिल्ली या मुंबई में रोज़गार में लग चुके हैं उनके लिए वोटर आई डी का कोई महत्त्व नहीं है.क्योंकि वो वोट करने जाते ही नहीं. कई लोग जो पढाई ख़त्म करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके पास किसी संस्थान का पहचान पत्र कहाँ से आएगा और वो किराये के मकानों में रहते हैं. क्या उनके सभी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर उन्हें आधार नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि नौकरी तो उन्ही दस्तावेजों से मिलती है.और मुझे नहीं लगता कि कोई विद्यार्थी इतने घोटाले करेगा हाँ अगर संस्थान का आई कार्ड नहीं है तो किसी निकटवर्ती प्रतियोगी परीक्षा का प्रवेश पत्र भी माँगा जाना चाहिए. मुझसे कहा गया की आप किसी ए ग्रेड अधकारी या नेता से लिखवाइए वो भी लेटर हेड पर, तो क्या एक आम गरीब आदमी ए ग्रेड अधिकारी से इतनी आसानी से मिल सकता है. अधिकारी तो आम जनता से सीधे मुह बात तक नहीं करते,तो वो भला किसी के लिए क्यों लिखेंगे. और नेता जी तो चुनाव के बाद दिखते कहाँ हैं मुझे और भी कई बातें बताई गयी जो कि आम आदमी के बस में नहीं है . तो फिर क्यों आधार जैसी परियोजना पर जनता का पैसा बरबाद कर रही है भारत सरकार. कृपया आप http://ajaykumar2623.jagranjunction.com/2011/10/14/aadhar-some-questions-of-public-interest/ तथा http://uidai.gov.in/index.php?option=com_content&view=article&id=157&Itemid=१०८ पर भी विजिट करें

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    अजय जी इस पूरे कमेन्ट में मै दूंढ रहा था की हमारी (राज भाई ) की रचना के बारे में आपने क्या लिखा है, पर मुझे कहीं कुछ मिला नहीं……….. इस लिए समझ में नहीं आ रहा है की मै आपके इस कमेन्ट के उत्तर में क्या लिखूं ……. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    प्रिय अबोध जी ….सस्नेह नमस्कार ! प्रिय अजय जी ….नमस्कार ! अगर शादी वाले घर में कोई आ जाए और वोह शगुन न दे तो क्या हम उसको खाना नहीं खिलाएंगे क्या ? …..जरूर खिलाएंगे इसलिए अजय भाई का भी हार्दिक आभार (हमारी तरफ से इसको ही खाना समझिए ) :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

Syeds के द्वारा
October 15, 2011

अबोध जी, बेहद सुन्दर रचना बधाई के पात्र हैं http://syeds.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    सय्यद जी इस रचना के रचियेता, श्री श्री ……….. राजकमल जी हैं और बंधाई के पात्र वो ही हैं, मई तो बस पोस्ट मन हूँ ……….. सॉरी, पोस्ट करने वाला :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    प्रिय सैयद भाई ….आदाब ! प्रिय अबोध जी …..नमस्कार ! आप पोस्टमैन नहीं बल्कि आजकल के नए और बदलते जमाने के कारण डायरेक्टर +प्रोडयूसर है मैं तो कहता हूँ की इस मंच पर ऐसी अनेको फिल्मे बननी चाहिए जिनका निर्माता निर्देशक कोई एक और डायरेक्टर +प्रोडयूसर कोई दूसरा होना चाहिए ….. एक नहीं पहल करने में अपना उल्लेखनीय योगदान देने के लिए आपके समर्पण और त्याग तथा हौंसले को मैं सलाम करता हूँ …. आप दोनों का ही बहुत -२ आभार :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

sumandubey के द्वारा
October 14, 2011

अबोध जी नमस्कार , “जब से हमने कर ली है गुनाहों से तौबा फरिश्ते भी अब हमे सजदा करने लगे है मुझे तो ए लाईने पसंद आयी .

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    सुमन जी इस रचना के रचियेता मई नहीं वरन राजकमल जी हैं, प्रंशसा तो उनकी हैं जो उन्होंने …………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीय सुमन दुबे बहन जी ….. सादर अभिवादन ! आपकी पसंद वाली लाइने देख कर हार्दिक खुशी हुई है मुझको …. वैसे मैंने आज इक फरिश्तों को देखा नहीं बल्कि महसूस जरूर किया है …. गुनाह है की पीछा नहीं छोड़ते और जिस दिन खुद को जीत लिया उस दिन की यह कामना मन में नहीं है की फरिश्ते तो क्या इंसान भी मुझको सजदा करे ….. आपका और प्रिय अबोध जी का तहेदिल से शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

Abdul Rashid के द्वारा
October 14, 2011

प्रिय अबोध जी बेहद खुबसूरत अंदाजेबयां बधाई हो

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    rashid bhai ise khoobsoorat hona hi tha, akhir rachna kis ki hai? ye sari sher hamaare raaj bhai ke hain aur unhone bade pyar se likhe hain. tareef karni hai to unki karen warna mai kya …… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    प्रिय रशीद भाई ….. आदाब ! इसमें हमारे प्रिय अबोध भाई का इनको अपने बैनर तले रिलीज करने के इलावा एक और योगदान भी है …. इन्होने फिल्म की शुरुआत –इंटरवल –और दी एण्ड – का बहुत ही सुन्दर चुनाव किया …. इसी कारण यह फिल्म आपको पसंद आई ….. आप दोनों का शुक्रगुजार हूँ :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

manoranjanthakur के द्वारा
October 14, 2011

फिर से छा गए भाई बहुत खूब

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    मनोरंजन जी तारीफ तो उस खुदा की जिसने हमारे राजकमल जी को बनाया, जो न केवल व्यंगा balke जिस भी विषय पर लिखना चाहें, वो सोना बन जाती है, ये सारे शेर उनके ही हैं :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    प्रिय मनोरंजन ठाकुर जी …..सादर अभिवादन ! अबोध जी जैसा सदाबहार सुपरस्टार हमेशा छाया ही रहेगा …. आपदोनों का हार्दिक आभार :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

Santosh Kumar के द्वारा
October 14, 2011

आदरणीय अबोध जी ,.सादर नमस्कार मौसम से पहले उनका अंदाज बदल जाता है .. कभी बेचैनी,कभी मायूसी कभी बोध जाग जाता है … …………………… पहली बार आपके नए अंदाज में कोशिश की है ,..इस पर भी एक वह कर देना ,.. बहुत अच्छी सच्ची प्रस्तुति ,..हार्दिक आभार

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    संतोष जी हमारे अंदाज़ नहीं बदले हैं, हम क्या और हमारी बिसात क्या? ये शेर हमारे प्यार गुरु जी, यानी राजकमल जी हैं, उन्हें सलाम करें, की वो हरफन मौला हैं, http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Santosh Kumar के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीय रचनाकार को हार्दिक प्रणाम

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    मौसम से पहले उनका अंदाज बदल जाता है .. कभी बेचैनी,कभी मायूसी कभी बोध जाग जाता है ….. प्रिय संतोष भाई ….. सप्रेम नमस्कार ! आपकी उपर वाली लाइने भी कमाल की बन पड़ी है …..इसलिए अगर आप इस क्षेत्र में भी कलम चलाए तो चांस बहुत ही ब्राईट है …. इनका अंदाज तो इस मंच पर सबसे अलग है ….. यह जब अपनी बात को बीच में छोड़ देते है –विराम देते है तो शायद ही कोई पढ़ने वाला होगा जोकि इनकी अधूरी बात को न समझ सके ….. आप दोनों का दिल की गहराईयों से आभार :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

mparveen के द्वारा
October 14, 2011

“गर आदमी जो चाहता वोह सब उसे मिल गया होता तो आज आदमी खुदा होता और खुदा “खुदा” न होकर न जाने क्या होता”…………….. अबोध जी नमस्कार, बहुत ही सही कहा आपने सबको मन मुताबिक हर चीज़ नहीं मिल पाती और अछा ही है वरना बहुत असंतुलन हो जाता …… फिर ना कोई खुदा को याद करता और खुद को ही खुदा समझता ……. बस इस जीवन में जो मिल जाये उसका आदर करो और जिसकी इच्छा है उसके लिए पर्यटन करना चाहिए बाकि खुदा की मर्ज़ी … और ” खुद को कर बुलंद इतना कि खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी राजा क्या है “…… आपकी शायरी का हर एक पहरा एक सीख है … धन्यवाद……… आशा है आगे भी कुछ ऐसी लाजवाब शायरी पढने को मिलेगी …..

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    परवीन जी बहुत ही खूबसूरत कमेन्ट के लिए आभारी हूँ , मेरी परवाज़ की एक हद है , और इनती खूबसूरत शायरी मेरे बस की बात नहीं है , ये हमारे राजकमल भाई का प्यार है जो की उन्होंने ये साडी रचनाये लिखी और मुझे इस पोस्ट करने की अनुमति दी . प्रंशसा के हकदार तो वो है . आभार.. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीय परवीन जी ….सादर अभिवादन ! हरेक आदमी के मन में असुरी और देवीय विचार हमेशा ही बने रहते है ….. यह भगवान का शुक्र है की उसने जन्म- मौत और रिजक जैसी अहम चीजे अपने हाथ में रखी है नहीं तो दूसरे हालात में असल हालत क्या होती इसको कोई भी नहीं जानता और अनुमान लगाना इंसानी बुद्धि से परे है ….. आप दोनों का बहुत -२ आभार :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

naturecure के द्वारा
October 13, 2011

आदरणीय भाई साहब , सादर अभिवादन ! शुक्र है की आप मायूसी से कुछ तो उबरे नहीं तो पिछली रचना पढ़कर मुझे बड़ी चिंता हो गयी थी ………………….|

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    डाक्टर साहब, मायूसी और ख़ुशी जीवन का अभिन्न अंग है, कभी एक तो कभी दूसरा, एक दुसरे पर हावी ….. वैसे ये सारी शायरी हमारे राजकमल भाई कइ है, :) हम तो बस ऐसे ही लिख daalte हैं, वरना मेरा होरिजों इतना वास्त नहीं है. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीय डाक्टर साहिब ….. सादर अभिवादन ! हमारे प्रिय अबोध भाई हर हाल में मस्त रहते है ….. जिस भी मूड में लिखे वोह दिल की गहराईयों में उतर जाता है …. आप दोनों का बहुत -२ शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    naturecure के द्वारा
    October 16, 2011

    आदरणीय शर्मा जी सादर प्रणाम ! वास्तव में हमारे भाई जी के मूड का कुछ भरोसा नहीं क्षण में आफ , क्षण में आन -डर लगता है कहीं ………………………….हा हा हा अबोध भाई साहब ! अब आप रचना देर से पोस्ट करते हैं….. इतना इंतजार मत करवाया करिए | मन ख़राब हो तो http://naturecure.jagranjunction.com पर थोडा नीम का सेवन कर लीजिये |

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 19, 2011

    आदरणीय भाईसाहब, सादर प्रणाम ! कुछ निवेदन “सेरोगेट मदर ; एक विज्ञान कथा ” के सन्दर्भ में – आपकी याददास्त की दाद मैं पहले भी दे चूका हूँ , आप सही सोंच रहे हैं | आशीर्वाद हेतु आपका बहुत-बहुत आभार !

manoj के द्वारा
October 13, 2011

अबोध जी कुछ अच्छे और कुछ टेढ़े मेधे शेर, फिर भी मज़ेदार आपकी रचनाये पढने में आनंद आता है

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    manoj ji jeevan hi aisa hai, kuchh seedha, kuch tedha sab na achhe hain na sab kharab abhaar http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    प्रिय मनोज जी ….नमस्कार ! आपने मेरे शुरूआती दिनों में मेरी शायरी को पसंद करके मेरा उत्साह बढ़ाया था ….. लेकिन एक बार आपने ही कहा था की अगर ऐसी शायरी ……. तो इससे अच्छा ब्लॉग …….. और मैंने ब्लॉग लेखन शुरू कर दिया -लेकिन शायरी छूटी तो आपका साथ भी छूट गया …. मैं इस मंच के सुपरस्टार अबोध जी का आभारी हूँ की उन्होंने मेरी रचना को अपने ब्लॉग पर स्थान देकर मेरा मां बढ़ाया …. आप दोनों का ही बेहद शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

राही अंजान के द्वारा
October 13, 2011

वाह अबोध जी….!! क्या बात….क्या बात…..क्या बात !!!! :) बहुत बहुत खूब !!

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    संदीप जी कहिये वाआआआअह राजकमल जी, क्या बात है, रचना उन्ही की है, मेरा आकाश इतना विस्तिर्ट नहीं है, की मई इतना …….. आभार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    प्रिय राही अंजान “अनजाना” …..जी सप्रेम नमस्कार ! आपने एक बार कही है तो इसके कर्जे के तौर पर हम हमेशा ही आपको “वाह – वाह !! ही कहेंगे …. आप दोनों का दिली शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    राही अंजान के द्वारा
    October 18, 2011

    कर्ज़ा कैसा जनाब……बस हमारे साथ तो दुआएं ही हैंआप लोगों की…..! ये नाचीज़ कभी इतना काबिल नहीं होगा कि आप जैसे माननीयों पर कर्ज़ा…… ;)

pramod chaubey के द्वारा
October 13, 2011

आदरणीय अबोध जी “आँख जब खुले तभी सबेरा होता है….इन लाइनों से हर कोई सबक सीख सकता है। 

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    प्रमोद जी जब आँख खुले तभी सवेरा अगर होगा तो अक्सर बॉस की दांत खानी पड़ेगी, जो उठने का टाइम है वही ………. :) ये रचना राजकमल जी की है और वो ही बंधाई के पात्र है …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीय प्रमोद जी …..सादर अभिवादन ! यहाँ पर जिस सबेरे (ज्ञान ) की बात कही गई है उस तक आप सही रूप में पहुंच गए लगते है …… लेकिन हमारे प्रिय अबोध भाई ने इसको जिस हास्य के रंग में पिरोया है वोह काबिलेतारीफ है ….. हम यही दुआ करते है की उनके “नम्बर” हमेशा ही पूरे रहे अपने बॉस की नजरो में जिस प्रकार की हम सभी की नजरो में इनके रहते है …. इसी कामना के साथ आप दोनों का हार्दिक आभार :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

Rajkamal Sharma के द्वारा
October 13, 2011

प्रिय अबोध जी …..सस्नेह नमस्कार ! “अनकही – अनसुनी – शायरी” बहुत ही माकूल वाजिब और न्यायसंगत शीर्षक !

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    गुरुवर बस यही नाम सूझा, की आपके इस रचना को ……….. अनकही और उन्सुनी थी पर अब तो …………. अपना स्नेह और प्रेम बनाये रखें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

akraktale के द्वारा
October 13, 2011

अबोध जी, “जब से हमने कर ली है गुनाहों से तौबा फरिश्ते भी अब हमे सजदा करने लगे है” बहुत ही उम्दा, मै तो कहता हूँ ऐसे गुनाह और किये जा,करम कर हम पे और दुआएं लिए जा. बधाई.

    pramod chaubey के द्वारा
    October 13, 2011

    क्या बात है, अशोक जी.मजा आ गया।

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    भाई मेरे, इस रचना के रचियेता राज जी हैं अजुर सारे ही खूबसूरत शेर उनके हैं, उन्हें बंधाई दें की उनकी सोच कितनी …….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीय अशोक जी …. सादर अभिवादन ! आदरणीय परमोद जी ….. सादर अभिवादन ! हरेक धर्म के मार्ग पर चलता हुआ गृहस्थी इस अवस्था को प्राप्त कर सकता है …. सभी के लिए शुभकामनाओं सहित आप तीनों का दिल की तीनों तहों से (तहेदिल से ) आभार :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    Roshan Dhar Dubey के द्वारा
    December 21, 2011

    क्या खूब कहा आपने…                             दिल को छु गया….                                                         शुक्रिया..!

    abodhbaalak के द्वारा
    December 22, 2011

    रोशन जी ये मेरी नहीं बल्कि राजकमल जी की लिखी रचनाएं हैं अगर तारीफ करनी है तो उनकी करें

nishamittal के द्वारा
October 13, 2011

“हम नक़्शे कदम पे नहीं चलते कदमो के निशां बनाते है – रास्ता पूछ ले गर कोई उसे मंजिल का पता बताते है अच्छी पंक्तियाँ अबोध जी.

    pramod chaubey के द्वारा
    October 13, 2011

    आदरणीया निशा जी ने अपने लिए पक्तियां ढूंढ ली। अबोध जी आपका जवाब नहीं। 

    jlsingh के द्वारा
    October 14, 2011

    अबोध जी, वैसे तो कविता की हर पंक्ति सराहनीय है, पर निशा जी द्वारा उल्लिखित पंक्ति काबिले तारीफ़ है. सुंडा अभिव्यक्ति के लिए बधाई!– जवाहर.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीय निशा जी यकीनन ये भी एक बहुत खूबसूरत शेर था जो मुझे खुद भी …………… वैसे इस पूरे के पूरे शेर के रचियेता हमारे राज कमल जी हैं और उनकी शायरी के ये रंग कभी कभी ही दीखते हैं . आपका आभारी हूँ …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    जवाहर जी मुझे तो इस गुलदस्ते के सभी फूल बहुत खूबसूरत लगे, कुछ शरारती हैं तो कुछ ………… वैसे राजकमल जी ने एक समाँ बाँध दिया है अपनी शायरी से, आगे भी आशा है की …… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    आदरणीय जवाहर लाल जी …..सादर अभिवादन ! आदरणीय प्रमोद जी …..सादर अभिवादन ! यह गरूर एक सफल आदमी का है लेकिन मैं जिंदगी में इतना सफल नहीं हूँ इसलिए मैं शायरी में तो कह सकता हूँ लेकिन वास्तविक जिंदगी में ऐसी औकात शायद ही कभी बन पाए …. आप सभी का हार्दिक आभार :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    pramod chaubey के द्वारा
    October 18, 2011

    अनकही अनसुनी शायरी…. आदरणीया निशा जी,  आदरणीय अशोक जी, आदरणीय राजकमल जी,  आदरणीय अबोध जी,  आदरणीय जवाहर लाल जी सभी को नमन.

vikasmehta के द्वारा
October 13, 2011

अबोध जी नमस्कार ……………..वोह खुद को छुरी, और दूसरों को खरबूजा, ऐसे ही नहीं कहते है वहां पर कटने वाले तो कटते ही है, काटने वाले भी कट जाते है”………क्या खूब कही

    abodhbaalak के द्वारा
    October 15, 2011

    विकास जी ये सारे के सारे शेर हमारे मुंह बोले गुरु, राजकमल जी के लिखे हैं, मुझे इसका कोई क्रेडिट नहीं जाता, ये तो उनका प्यार है की जब उन्होंने देखा की मै कोई नई रचना लिखने में ,,,,,,,,,,, तो उन्होंने अपनी रचना मुझे पोस्ट करने के लिए दे दी. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajkamal के द्वारा
    October 15, 2011

    प्रिय विकास जी ….नमस्कार ! यह शेयर जब शिकारी खुद शिकार हो जाए वाली हालत पर कहा गया है …. हमारे प्रिय अबोध जी के इस मंच पर किये जा रहे निस्वार्थ कर्मो का और सेवा का हम सभी कभी भी कर्ज चुका नहीं सकते है …. यह उनकी दरियादिली है की मेरी फिल्म को इन्होने अपने बैनर तले प्रस्तुत किया …. आप दोनों का बहुत शुक्रिया :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o


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