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दर्दे दिल

Posted On: 3 Oct, 2011 Others में

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solitude

 

ये  मै  किस  राह  पर  निकाल  पड़ा  हूँ?

न  मंजिल  का  पता  है  ना  ही  ये  पता  है  की  इस  राह  की  कोई  मंजिल  है भी  या नहीं! ये  जानता  हूँ  की  इस  राह  पर  कांटे  ही  कांटे  हैं , पर  फिर  भी , मै  इस  राह  पर  चल  पड़ा  हूँ.

 

ऐसा  क्यों  होता  है  की  हम  अक्सर  जानते  हैं  की  ऐसा  करने  से  कुछ  हासिल  नहीं  होगा , फिर  भी …., ऐसा  क्यों  होता  है  की  हम  दिल  के  हाथों  मजबूर  हो  जाते  हैं  और  दिमाग  की  नहीं  सुनते ?

 

आजकल  कुछ  ऐसी  ही  स्थिति  है  मेरी , हर  पल  एक  बेचैनी  सी रहती है , हर  पल  प्रतीक्षा  रहती  है   की  कब  उससे  बात  होगी , कब  उसका  मेल / एस एम एस  आएगा , कब  ……………? पता  नहीं  ये  रोग  कैसे  लगा  लिया  है  मैंने . धीरे  धीरे  कोई  मन  में  बस  गया  है , पता  ही  नहीं  चला  की  ये  हुआ  कैसे , पर  जब  तक  समझता , कोई  दिल  में  ………

 

पर  किसी  के  लिए  ऐसी  भावना  रखना  ही  तो  बड़ी  बात  नहीं  है , इसके  प्रेम  रुपी  फूल  में  कांटे  भी  तो  होते  हैं ! ये  कांटे  कभी  हालात  के  होते  हैं  तो  कभी  सम्भंधो  के , जो  इस   फूल  के  खिलने  से  पहले  ही ………,

 

मै  जानता  हूँ , के  वो  जानती  है  की  मै  उससे …………….., पर  मै  ये  भी  जानता  हूँ  की  जब  उसे  मेरे  बारे  में  सब  कुछ   पता  चलेगा  तो  वो , इस  राह  पर  मेरे  साथ  चलने  में  सक्षम  नहीं  हो  पायेगी . इसके  लिए  उसे  दोष  भी  नहीं   दे  सकता . मुझे  मेरी  और  उसकी  मजबूरिया  पता  हैं . आज  समाज  में  जोड़ने  वाली  भाषा  केवल  प्रेम  ही  है  पर  बांटने  के  लिए  बहुत  सारे  ………………., कभी  धर्म  तो  कभी  जात , कभी  अमीरी  तो  कभी  गरीबी , कभी  क्षेत्र  तो  कभी  प्रांत , कभी भाषा और ना जाने  ………………,

 

वो  बहुत  बहादुर  है  पर  मै  जानता  हूँ  की  वो  मेरे  साथ  नहीं  चल  पायेगी , मै   उसके  हालात  जानता  हूँ , मै  उसकी  मजबूरिया  जानता  हूँ , वो  किस  बहादुरी  से, साहस के साथ   जीवन  की  इस  कठिन  दौड़ ,   हर  बाधा  से   लड़  रही  है  वो  सच  में  अतुलनीय  है , प्रन्श्नीय  है  , दिल  से  उसके  लिए  ………………….

 

 पर  मै  ये  भी  जानता  हूँ  की  उसके  लिए  बड़ा  कठिन  मार्ग  होगा  मेरे  साथ  चलना , क्योंकि  उसके  लिए  जिस  तरह  का  बलिदान  उसे  करना  पड़ेगा  वो  उससे  माँगना  भी  मेरे  लिए  कठिन  होगा …….…, ये  मेरा  स्वार्थ  होगा  की  मै  उससे  ऐसा  कुछ  कहूँ .

 

मै  नहीं  जानता  की   इस  रिश्ते  का  आगे  क्या  होगा ? पर  इतना  पता  है  की  जीवन  में  किसी  ना  किसी  रूप  में , मै  उससे  सदा  जुड़ा  रहूगा , क्योंकि  वो  मेरे जीवन के एक   हिस्सा   बन  चुकी  है , भले  ही  इस  रिश्ते  का  स्वरुप  नदी  के  दो  किनारों  की  तरह  हो  जो  सदा  साथ  तो  रहते  हैं  पर  कभी  नहीं  मिलते .

 

दूर कहीं ग़ज़ल के बोल सुनाई दे रहे हैं की “रिश्ता क्या है तेरा मेरा, मै हूँ शब् और तू है सवेरा…..”

 

मै  समझता  हूँ  इस  बात  को  पर  दिल  है  की  ………………

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84 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

D33P के द्वारा
January 28, 2012

मोहब्बत क्या है .किसी ने कहा है … मोहब्बत मुकद्दर है कोई एक ख्वाब नहीं, ये वो अदा है जिसमें सब कामयाब नहीं, जिन्हें पनाह मिली उनको उँगलियों पर गिन लो, मगर जो फनाह हुए उनका कोई भी हिसाब नहीं

    abodhbaalak के द्वारा
    January 29, 2012

    दीप्ति जी बिलकुल सही कहा है आपने, की जिनको पनाह मिली वो गिनती में हैं और जो फना हुए …. शायद मई भी …………, या यकीनन मई भी ……………. काश मई भी कह सकता की तू नहीं कोई और सही …….. बहुत बहुत आभार आपका ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    D33P के द्वारा
    February 22, 2012

    अबोध जी जो मोहब्बत करते है उनके अन्दर इतना तो हौसला होता ही है कि वो फ़ना होने से पहले जिन्दगी को हासिल करने की सोचे _

    abodhbaalak के द्वारा
    February 26, 2012

    दीप्ति जी अब तो मुहब्बत के नाम से भी दर लगने लगा है, जाने दें, इस फ़साने को यही रहने दें आभार आपके ……

Tufail A. Siddequi के द्वारा
October 28, 2011

भाई साहब अभिवादन ! सुन्दर रचना है…… बधाई आपको. http://siddequi.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    October 31, 2011

    शुक्रिया तुफैल भाई, आभार आपका…..

Meenakshi Srivastava के द्वारा
October 17, 2011

अभोध जी , यदि पता है कि हम गलत राह में चल पड़ें हैं ; तब तो विवेक से काम लें संभल जाएँ दूसरी बात दृढ विश्वास रख ,कर्म करें ; फल कि चिंता न करें -

    abodhbaalak के द्वारा
    October 18, 2011

    मीनाक्षी जी विवेक और ह्रदय में अक्सर आदमी दिल की ही सुनता है, खास कर के मेरे जैसा ……… आपका आभार की आपने अपने अनमोल राय ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Amresh Bahadur Singh के द्वारा
October 17, 2011

Dear Abodhji …… दिल की बाते सब को अच्छी लगती है ……… प्यार करना भी सब को बहुत अच्छा लगता हैं … पर सचा प्यार करने वाले इसे तरह दर्दे दिल में उलझ के रह जाते है … वो हममे ही देखा के प्रसन और अधिक प्रसन होती रहती है .. वो हमेशा आप में ही कमी निकालेंगे ……… ========== पर आप की ये पंक्तिया दिल के गहराई तक पहुच रही है ………… बहुत ही अच्छा और नेक रचना है ………..

    abodhbaalak के द्वारा
    October 17, 2011

    अमरेश बहादुर जी बहुत बहुत आभार आपके कमेंट्स का, प्रेम का एक अलग ही रंग होता है …………. पर दर्द भी ……… आभार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

krishna के द्वारा
October 15, 2011

बहुत ही अच्छी रचना है……

    abodhbaalak के द्वारा
    October 16, 2011

    आभारी हूँ सर अपाक की आपने इसे पढ़ा और अपने विचार देने लायक समझा http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Sushma के द्वारा
October 11, 2011

Priya Abodhji…….. Pyar ke ehsas ko zinda rakhiye….. bahut hi sundar prastut kiya h apne………. pyar me pana ya khona nahi hota…… bas hum jise pyar karte h wo khush rahe hamesa……… dil se dua honi chahiye……. Congrates for the Lovable Article on Love……..

    abodhbaalak के द्वारा
    October 12, 2011

    बहुत सुन्दर वाक्य के साथ आपने अपनी बात राखी है सुषमा जी…………. प्यार में पाना क्या और खोना क्या …………….., और साथ में जिसे हम प्रेम करे….. आभारी हूँ आपका की आन्पे इस तरह से अपनी बात कही.. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Shalini Sharma के द्वारा
October 11, 2011

लगता है आप अपनी भावनाऊ लिखकर ही बताना चाहते है उससे बताना नही चाहते है आप उससे बताइए …. अच्छी रचना के लिए बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    October 12, 2011

    शालिनी जी आपका धन्यवाद की आपने पहली बार मेरे ब्लॉग पर अपने विचार रखे…. देखते हैं की क्या होता है इस रिश्ते का………………. आसान नहीं होता है आगे भी अशर रखूं की आप अपने विचार से ………? http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Sunnu के द्वारा
October 10, 2011

अबोध जी, शायद आप जितना ज्ञानी तो मैं नहीं हूँ किन्तु जीवन में काफी अनुभव हासिल किया है. कही तरह के लोग कही तरह का त्याग कही तरह ही आग और कहीं तरह भावनाएं महसूस की हैं. सब कुछ देखने के बाद आज केवल यही निष्कर्ष बाकि रहा गया है है की प्रेम और त्याग को किसी तरह की आशा नहीं होती. सच्चे पेम से कभी दुःख नहीं मिलता.चाहे जिससे हम प्रेम करते हैं उसे हासिल कर सके या नहीं. प्रेम एक भक्ति होती है. जो की किसी पत्थर की मूर्ति के लिए भी की जा शक्ति है. उसमे हमें कुछ भी पाने की चेष्टा नहीं होती होती. किन्तु जब हम अपने प्रेम से दुखी हो जाते हैं और उसका प्रचार करने लगते हैं तो वास्तव में हम प्यार जैसे पवित्र शब्द को गन्दा करते हैं. प्रेम में कोई खोट नहीं होती.जब इन्सान भगवान से प्रेम करता है तो इस तरह की भावना क्यों दिल में नहीं आती.क्योंकि भगवान् से शायद वो एक सच्चा प्रेम होता है. बुरा मत मानियेगा, किन्तु आपके इस ब्लॉग के बाद से आपने भी उस्सी तरह की एक तस्वीर मेरे सामने पेश कर दी है की इन्सान के प्रति हमारा प्रेम काफी अलग होता है.उसमे केवल एक स्वार्थ होता है. आप खुद भी सोच सकते हैं की आप केवल इसलिए दुखी है आप जिससे प्रेम करते हैं उससे हासिल नहीं कर सकते.लेकिन हासिल करना ही प्रेम नहीं होता. जहाँ यह सब बातें ख़त्म हो जाती हैं वहां से प्रेम की वास्तविक तस्वीर उभरती है. दुखी तो इन्सान अपनी पसंद की कार न ले पाने पर भी होता है. मैं भी सोचता हूँ की काश मेरे पास कभी बुगाटी हो पर मैं जनता हूँ की यह असंभव है.मैं और बुगाटी नदी के दो किनारे हैं. मेरे मन में बार बार अपनी बुगाटी चलाने का ख्याल आता है.किन्तु इसका मतलब यह तोह नहीं की मैं बुगाटी से प्यार करता हूँ. वो तो मेरी एक इच्छा है क्यूँ की वो मुझे अच्छी लती है. इसलिए दुखी मत होइए जनाब प्यार किसी को दुखी नहीं करता बल्कि हर हाल में सुख ही पहुंचाता है. जिसदिन आप प्रेम और पसंद में अंतर समझ जाएँ आप शायद प्रेम का वास्तविक मतलब समझ जायेंगे. बढ़िया लेखन के लिए हार्धिक बधाई.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 11, 2011

    सुन्नु जी पहले तो आपके बहुत ही सुन्दर कमेट्स के लिए आभारी हूँ. वैसे ये बताईये की अबोध ज्ञानी कैसे हो सकता है? मई तो अबोध ही हूँ………… बहुत ही सुन्दर बात कही है आपने की प्रेम निस्वार्थ होना चाहिए … रही बात प्रेम और पसंद के अंतर की, लगता है की अपने गुरु shree shree rajkamal जी se is vishay me poochhna padega की bhayy mujhe hua kya है? aapse aage bhi isi tarah se mera margdarshank karte rahne ka anurodh है … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

aditya के द्वारा
October 10, 2011

“रिश्ता क्या है तेरा मेरा, मै हूँ शब् और तू है सवेरा…..” “मै समझता हूँ इस बात को पर दिल है की ………………” “……………..मानता ही नहीं” बहुत खूब अबोध जी, चलो बधाई, आपको बचपन में ही युवाओं वाला रोग लग गया है. बधाई. आदित्य http://www.aditya.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    October 11, 2011

    आदित्य जी बचपन में? अरे राज जी का लेख पढ़िए, मेरे शादी वो अपनी साली से लगा रहे थे, इस लिए उनको हकीकत तो बताना था न की भय्या हम पहले ही ………………. आभारी हूँ आपका की आपने मंच पर आते साथ ही हमें याद रखा, हम तो खैर आपको भूले ही नहीं थे…… :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

nishamittal के द्वारा
October 9, 2011

आपका दर्दे दिल देर से पढने का कारण है,बहुत दिन तक अनुपस्थित रहना आपसे सहानुभूति है,ईश्वर आपकी मनोकामना पूर्ण करे.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 10, 2011

    आदरणीय निशा जी आपकी कमी तो मंच पर महसूस की जा रही थी, क्योंकि आपके पोस्ट बिना किसी गैप के….. आपकी सहानुभूति के लिए और विचार, दोनों के लिए आपक आभारी हूँ, http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

komal के द्वारा
October 9, 2011

Namashkaar Abodh ji….samajh nahi pa rahi hun ki kya kahun or aapko koi salah kaise dun…..hamesha ki tarah aapne apne bolg mein bhi kai baatein adhuri chor di hain…..is sunya ka kya arth hai ye to bade bade gyaani bhi nahi samajh paaye phir hum to….aap apna khayaal rakhiyega. bahut achaa likhte hain aap, lekhan jaari rakhiyega….

    abodhbaalak के द्वारा
    October 10, 2011

    धन्यवाद कोमल जी बस प्रयास कर रहा हूँ की कुछ पढने लायक लिख सकूं, मेरे लेखों का स्तर क्या है वो मै भली भाँती जानता हूँ, बहुत सी बातें न ही कहीं जाएँ तो ही अच्छा होता है, और इसी लिए ……….., आभारी हूँ आपके विचार और सराहना के लिए http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

वाहिद काशीवासी के द्वारा
October 9, 2011

देर से नज़र पड़ी इसलिए देर से ही पढ़ पाया अबोध भाई। फिर भी मैं यही कहूँगा कि आप चातक जी की सलाह पर अमल करने में विलम्ब न करें। ईश्वर आपको सफल करे।

    abodhbaalak के द्वारा
    October 9, 2011

    वाहिद भाई लगता है की सोचना पड़ेगा क्योंकि मंच के बड़े बड़े लोग इस अबोध को अगर कोई सलाह देंगे तो ……………. पर इश्क की राह है बड़ी कठिन ……………., देखते हैं डूबते हैं या पार …. आभारी हूँ आपके ………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

mparveen के द्वारा
October 8, 2011

अबोध जी नमस्कार, प्रतिकिर्या में देरी के लिए क्षमा करें …. आपकी पोस्ट आज बहुत खोजने पे मिली है .. और मिली है तो पढ़ी और पढ़ के पता चला की …… तेनु इश्क दा लगिया रोग तेरे बचने दी नेयाँ उम्मीद … ऐसा एक गीत सुना है हमने और सही है अब तो रब ही खेर करे …प्रेम रोग ऐसा है एक बार लग गया तो जिन्दगी भर किसी डॉक्टर से इलाज नहीं …………. बहुत ही सही व्याख्यान किया अपने प्रेम के लक्षणों का … धन्यवाद ….

    abodhbaalak के द्वारा
    October 9, 2011

    परवीन जी मै तो सदा ही जब किसी के पोस्ट पर कमेन्ट करता हूँ तो अपने ब्लॉग की लिंक दे देता हूँ, वैसे क्षमा चाहता हूँ की आपको मेरी पोस्ट बहुत ………… ह्म्म्म, प्रेम रोग, ……………. आजकल के दौर में ये रोग ऐसे तो हर युवक को ही लग जाता है पर प्रॉब्लम ये है की ये हर दुसरे तीसरे महीने अलग अलग ………….. :) देखते हैं की मेरी इस बीमारी का इलाज दुसरे महीने मिल जाता है या की लम्बी ……… आपका आभार की आपने अपने विचार …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

chaatak के द्वारा
October 6, 2011

प्रिय अबोध जी, आपकी इस प्रेम की पाती को पढ़कर हाले-दिल का बहुत कुछ अंदाजा हो गया, बस आपकी इस पाती को वो भी पढ़ लेते तो बात बन जाती| राहें किसकी मखमली होंगी और किसकी काँटों भरी कोई नहीं कह सकता निराशाजनक सोच के साथ प्रेम को गँवा देने से अच्छा है पैगाम पहुंचा दीजिये| भविष्य की चिंता कतई न करें अगर उनकी शंकाए भविष्य को लेकर हों तो उन्हें बताइये कि ये चिंता करना अब एल आई सी वालों का काम है| टी.वी. नहीं देखती क्या? शुभकामनाएं! पैगाम वाली बात सीरियसली लेना !

    abodhbaalak के द्वारा
    October 7, 2011

    प्यारे चातक जी हाले दिल तो हाले दिल है भाई मेरे, जो दिमाग की कहाँ सुनता है…. सच है की अगले पल की किसे खबर है पर क्या करें, आज कल प्रेम भी बड़े मोल भाव के बाद किया जाने लगा है, :( आपके पैगाम वाली बात को ………….., देखते हैं सर जी आभारी हूँ आपका http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

atharvavedamanoj के द्वारा
October 6, 2011

वाह भाई वाह, अबोध जी…. लगता है कुछ इश्क दा मामला है|खुदा खैर करे…अगर यह एकतरफा है तो बस यहीं पर हाँथ जोड़ लीजिए और अगर……………. दोनों तरफ है आग बराबर लगी हुई …………..तो हुजूरे आला देर किस बात की?आशा है, कुछ खुशखबरी जल्द ही सुनने को मिलेगी|आमीन..जय भारत, जय भारती|

    abodhbaalak के द्वारा
    October 7, 2011

    मनोज भाई, ये इश्क नहीं आसान, बस इतना समझ लीजिये एक आग का दरिया…………………………….. बस साहब, हम ठहरे अबोध, कर तो लिया पर अब ………. बस दुआ करें की रब भला करे …. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

manoj के द्वारा
October 5, 2011

अच्छी पोस्ट. लगता है की आपको इश्क हो गया है. बच के रहिएगा अबोध ji

    abodhbaalak के द्वारा
    October 7, 2011

    मनोज जी (?) आपका ईमेल आईडी पता नहीं चल रहा है इस लिए पता नहीं चल प् रहा है की आप कौन हैं, पर मेरे विचार से पहली बात आपका कोई कम्नेट…. रही बात इश्क की, तो जनाब आपको तो पुरस्कार मिलना चाहिए की आपने इतने अन्दर की बात का पता चला …… :) कमेन्ट और प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ, आगे भी …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajkamal Sharma के द्वारा
October 5, 2011

http://rajkamal.jagranjunction.com/2010/10/16/%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9f/ http://rajkamal.jagranjunction.com/2010/08/31/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/ प्रिय अबोध जी ….नमस्कार ! आजकल आप बेहद उम्दा लिखने लगे है …. फ़िक्र मत कीजियेगा मेरी बातो से नजर नहीं लगेगी बल्कि मेरी तो यह कामना है की आप अपनी सख्शियत के छुपे हुए पहलुओ को हम सभी के सामने लाकर हमारी मन और आत्मा की प्यास को इसी तरह से तृप्त करने का पावन कार्य करते रहे …. आमीन :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/30/“आदरणीय-निशा-मित्तल-–-दा-ल/ पूज्यनीय माता जी के श्री चरणों में साष्टांग दंडवत बारम्बार प्रणाम ! प्रिय भ्रमर जी …..सादर प्रणाम ! माता रानी के दर्शनों के बाद सपरिवार उनकी शोभा +गाथा को पढ़ना मन को सकूं दे गया …. आप बंजारे होकर भी बंजारे नहीं हो सकते …. क्योंकि जो असली बंजारे होते है वोह -जो प्यार किया सो प्यार किया जो नफरत की सो नफरत की वाले गाने पर अमल करते है ….. जय हो माता जगत जननी जी की :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/30/“आदरणीय-निशा-मित्तल-–-दा-ल/ http://rajkamal.jagranjunction.com/2010/10/16/%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9f/ http://rajkamal.jagranjunction.com/2010/08/31/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/ priy अबोध जी …..सप्रेम नमस्कार ! मेरे उन तिन में से दो लेखों तक ही पहुँच पाया हूँ ….. शायद आपने इनको पढ़ा भी होगा पहले ….. उम्मीद है की आपकी जिज्ञासा अब शांत हो गई होगी ******************************************************************************************* हर किसी को नहीं मिलता यहाँ पर प्यार जिंदगी में खुशनसीब है वोह जिनको मिला है प्यार जिंदगी में …. खुशनसीबी वाली शुभकामनाओं सहित **************************************************************** प्रिय अबोध जी ….नमस्कार ! आजकल आप बेहद उम्दा लिखने लगे है …. फ़िक्र मत कीजियेगा मेरी बातो से नजर नहीं लगेगी बल्कि मेरी तो यह कामना है की आप अपनी सख्शियत के छुपे हुए पहलुओ को हम सभी के सामने लाकर हमारी मन और आत्मा की प्यास को इसी तरह से तृप्त करने का पावन कार्य करते रहे …. :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/30/“आदरणीय-निशा-मित्तल-–-दा-ल/

syeds के द्वारा
October 5, 2011

प्रिय अबोध जी, राजकमल जी सही कहते हैं अब अबोध बड़ा हो गया है… उसकी भी शादी हो जानी चाहिए…खुदा आपको आपकी मुहब्बत से दूर न करे….और दुआ यह है की आप दोनों हमेशा साथ रहे… जिंदगी के हालत खूबसूरती से लिखने के लिए बधाई के पात्र हैं…. http://syeds.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    October 5, 2011

    हम्म्म्म राज जी तो सदा ही सही कहते हैं प्यारे सय्यद भाई…………, और इसी लिए तो वो गुरु हैं मंच पर बहतु सारे…….. रही बात मोहब्बत की, तो मोहब्बत सदा ही आग में चलने का ……….., , किसने कहा था की एक आग का दरिया है और डूब के जाना है………… आपके प्रोत्साहन के लिए आपका आभारी हूँ, अपने कृपा दृष्टि बनाये रखें…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

राही अंजान के द्वारा
October 4, 2011

आदरणीय अबोध जी, सुंदर रचना….किसी न किसी पल हर दिल की कहानी यही हुआ करती है !:) भगवान आपके दिल की हसरत…. :)

    abodhbaalak के द्वारा
    October 5, 2011

    priy संदीप जी पहले तो आप ये बताएं की आप संदीप से राही अनजान कैसे और कबसे हो गए? मैंने सोचा ये नया ब्लोगर कौन है पर जब लिंक पर ………… वैसे प्रोत्साहन और प्रार्थना दोनों के लिए …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    राही अंजान के द्वारा
    October 5, 2011

    :D :D :D बस शब्दों ने दिल को छू लिया….और कभी न कभी हर किसी के पास यही दर्दे-दिल हुआ करता है, सो “राही अंजान”….. ! ;)

rajkamal के द्वारा
October 4, 2011

TESTING

    rajkamal के द्वारा
    October 4, 2011

    प्रिय अबोध जी …..नमस्कार ! आपकी इस कथा से मुझको परीक्षित साहनी और विद्यासिन्हा की कहानी “तपस्या” याद आ रही है ….. सच्चाई चाहे कुछ भी हो लेकिन आपकी लेखनी का बदला हुआ अंदाज सबको दीवाना बनाए दे रहा है ….. आपका सुबोध :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/30/“आदरणीय-निशा-मित्तल-–-दा-ल/

    abodhbaalak के द्वारा
    October 5, 2011

    भय्या अब यहाँ पर तो इस फिल्म की CD मिलने से रही वरना मई ज़रूर देखता मैंने पहले आपसे कहा की कुछ नया ज़ोन तरी कर रहा था जो की पहले नहीं किया इसलिए ….. पर क्या पता ये मेरे जीवन का एक सच ही हो…………. :( अपना प्रेम सदा बनाए रखे… वैसे उस समस्या के बारे में आपने कुछ बताया नहीं, जिससे आपका पोस्ट आया ही नहीं था ? http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajesh Dubey के द्वारा
October 4, 2011

आज समाज में जोड़ने वाली भाषा केवल प्रेम ही है पर बांटने के लिए बहुत सारे ………………., कभी धर्म तो कभी जात , कभी अमीरी तो कभी गरीबी , कभी क्षेत्र तो कभी प्रांत , कभी भाषा और ना जाने ………………भाई आपने इन पंक्तियों में जीवन का सारा दर्शन ही भर दिया है. बहुत सुन्दर. मन प्रसन्न हो गया.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    राजेश जी आपका आभारी हूँ की आपने इस लेख को अपने विचार देने के लायक समझा…. जीवन का सार………, मुझ जैसा अबोध कहा दे सकता है, बस एक प्रयास किया है की …., आपको पसंद आया तो लगता है की कुछ न कुछ तो सफलता मिल ही गयी .. आगे भी मार्गदर्शन करते रहें.. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Vinita Shukla के द्वारा
October 4, 2011

दर्देदिल ऐसा ही होता है; वह भाषा, प्रान्त, जात- बिरादरी आदि की सीमाओं से नहीं बंधता. नदी के दो किनारों की तरह ये साथ, एक अजीब सी कसक दे जाता है.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    विनीता जी आभारी हूँ आपका की आंपने इस लेख को पढ़ा और अपने विचार व्यक्त किये. दर्द का एहसास उसे ही होता है जिसने खुद कभी ……….. पर ये ऐसा दर्द है जो की हर कोई ही …….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sadhana thakur के द्वारा
October 4, 2011

अबोध भाई ,ये क्या हाल बना रख्खा है ,कुछ लेते क्यों नहीं .?अबोध भाई होता है .कभी -कभी ऐसा भी होता है …एक बार इश्क करने का हक बनता ही है यारों . मत भूलो जिंदगी में जिंदगी एक बार ही जी जाती हैं …

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    साधना जी, केवल एक बार…………. :) पर मई तो कई लोगों को जानता हूँ जो की हर ३-४ माह के बाद………… बस अब आपने कहा है तो कुछ लेने का प्रयास करता हूँ आभारी हूँ आपका की आपने ……… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

malkeet singh "jeet" के द्वारा
October 4, 2011

कदम जो बढेगे “जीत ” जरा हौसलों के साथ ठोकर लगते पत्थर भी मंजिल का पता देंगे ………….अबोध जी खूब रंग जमाया

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    मलकीत प्रा, आपका धन्यवाद की आपने बड़ी ही सुन्दर पंक्तियों के साथ …….. वैसे भी तो कहते ही हैं की खूब रंग जमेगा जब मिल बैठेंगे ……….. कृपा बनाये रखे और अपने विचारो से अवगत …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Ashwani के द्वारा
October 4, 2011

बहुत तन्हा लगते हो लगता है प्यार में चोट खाए हो … बहुत अच्छा लगा .ऐसा लगता है आप गजल बहुत सुनते हो .अबोध जी आप कैसे है ?

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    तनहा तो हूँ अश्विन भाई पर प्यार में चोट खाया नहीं हूँ, प्यार तो क्या चोट खाना……….प्यार तो प्यार है, जीवन है. जी हाँ, ग़ज़लें बहुत पसंद हैं पर अधिकतर जगजीत सिंह जी को ही सुनता हूँ, बस ठीक हूँ, आप कहें, कैसे हैं? बहरैन में सब ठीक है न? अपना ख्याल रखियेगा … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

akraktale के द्वारा
October 4, 2011

आदरणीय अबोध जी नमस्कार, कशिश और कोशिश में कमी नहीं है, प्यार की ये बारिश भी थमी नहीं है, निकल ही जायेंगी तूफान में भी राहें, मुश्किलें है,मगर बर्फ अभी जमी नहीं है. सदैव की भांति सुन्दर आलेख अपने भाव पूरी तरह व्यक्त करता है.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    बहुत ही खूबसूरत शेर के साथ आपने आपने कमेन्ट को रखा है, सच में कोशिश में कमी नहीं होनी चाहिए बाद में चाहे भाग्य में ……….. मेरा इस विषय पर लिखें का प्रयास लगता है की सफल …………. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Alka Gupta के द्वारा
October 4, 2011

अबोध जी , बहुत पते का आलेख है यह….बेजोड़ और सुन्दर आलेख के लिए बधाई !

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    आदरणीय अलका जी पते का तो नहीं है, बस दिल में इस बार चाह की कुछ ऐसा लिखूं ……… आपको पसंद आया तो लगता है की कुछ हद तक सफलता मिली है मुझे…. अपना स्नेह सदा बनाएगा रहिएगा यही अनुरोध है… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Santosh Kumar के द्वारा
October 4, 2011

आदरणीय अबोध जी ,..सादर प्रणाम भाई जी ,….क्या कहूं ?……श्रद्धेय रमेश जी का अनुसरण करता हूँ ,..आपको हमारी दुवाएं लगें और नदी पर एक सेतु बने जो किनारों को जोड़ सके ,……वैसे गुरुदेव का तीर सही निशाने पर था ,..अब आप अबोध नहीं रहे ,..अबोध भी हैं तो बालक तो बिलकुल नहीं रहे ,……जीवन में यह परिवर्तन आपको बहुत मुबारक हो ,…माँ दुर्गा आपकी समस्त सद्कामनाये पूरी करें ,….

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    संतोष जी आभारी हूँ आपकी प्रार्थनाओं के लिए और प्रोत्साहन के लिए, इस तरह के राह पर चलना भी तो अबोधता की ही …………… :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    suman dubey के द्वारा
    October 4, 2011

    अबोध जी नमस्कार , संतोष जी की बात से मै भी बातो से सहमत हू ईश्वर करे वो सेतु जल्द बन जाए यही कामना करते है

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    सुमन जी आपकी प्रार्थना के लिए और विचार दोनों के लिए आभारी हूँ, बस देखते हैं की समय हमें …. आगे भी आपसे अपने विचार ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Ramesh Bajpai के द्वारा
October 4, 2011

प्रिय श्री अबोध जी आप के इस दर्दे दिल ने तो मुझे सशंकित कर दिया है बात अगर यहाँ की है तो सब ठीक हो जायेगा | पर आप तो ठहरे परदेशी , बस यही ……… | अब उत्तर देते समय आप इस ओर इशारा भर कर दे | बाकि तो सब संभल जायेगा | हमे दुवाये आप के साथ | यह दुनिया बहुत ब ,,,,,,, हु ,,,,,, त बड़ी है

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    October 4, 2011

    कृपया ” हमारी दुवाये ” पढ़े

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    आदरणीय बाजपेई जी, बात कहीं की भी हो, पर बात है तो …………. दुआ की तो आप सबकी बहुत ज्यादा ही जरूरत है, इस लिए अनुरोध है की ….. आप जैसे अपनों की दुआएं ही शायद ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

jlsingh के द्वारा
October 4, 2011

इसका मतलब तो साफ है, राजकमल साहब ठीक ही समझे हैं, अब गजोधर चाचा को जल्दी ही निर्णय लेना होगा!————.दिल है कि मानता नहीं! आज ही मैंने देखा है — “हम हैं राही प्यार के” अगर ये दिल की बात है तो—–

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    जवाहर भाई गुरु जी ठहरे गुरु जी, उन्ही के कारण तो मैंने इस तरह के कदम उठाने का निर्णय लिया है, …. बस हर जगह दिल और दिमाग की ही बात होती है, कभीं पर आप ने लीवर, फेफड़े और बाकी अंगो का नाम सुना है क्या :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 3, 2011

मै समझता हूँ इस बात को पर दिल है की …मानता है ..एक अलग अंदाज ..प्यारा कोमल भाव और बड़े प्रश्न लिए ..यही जिन्दगी है …अनचाहा होता है और चाहा हुआ ….. जय राधे भ्रमर ५

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    जी सुरेन्द्र जी जिन्दगी तो हर कदम पर इम्तेहान लेती है, और हां छह कर भी वो नहीं कर पाते जो …. और वो कर डालते हैं जो की नहीं ………. बस दिल की कहना मान कर अक्सर .. आभार आपके …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rajkamal के द्वारा
October 3, 2011

प्रिय अबोध जी ….नमस्कार ! आजकल आप बेहद उम्दा लिखने लगे है …. फ़िक्र मत कीजियेगा मेरी बातो से नजर नहीं लगेगी बल्कि मेरी तो यह कामना है की आप अपनी सख्शियत के छुपे हुए पहलुओ को हम सभी के सामने लाकर हमारी मन और आत्मा की प्यास को इसी तरह से तृप्त करने का पावन कार्य करते रहे …. आमीन :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/30/“आदरणीय-निशा-मित्तल-–-दा-ल/ http://profile.ak.fbcdn.net/hprofile-ak-snc4/275754_100002519395207_752451451_n.jpg

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    राज भाई कल से आपके कमेन्ट का वेट कर रहा था पर हैरान था की क्यों नहीं आया, आज दोपर तक आपका कमेन्ट पोस्ट पर नहीं दिखा, संजोग से मई कमेन्ट ऑप्शन में गया तो देखा की वहां पर आपके दो कमेन्ट अप्प्रूव होने के लिए हैं और पीले रंग से हाई लाइटेड हैं,जब मैंने उसे अप्रूव किया तब जाकर…. मंच की महिमा………… समझ में नहीं आया ऐसा क्यों हुआ. बाकी कमेंट्स के लिए तो ऐसा नहीं करना पड़ा ……. ?????

rajkamal के द्वारा
October 3, 2011

यह तुम पर आखिरकार हो रहा किसकी चाहतो का असर है मेरे यार ? प्यार में दिल की बजाय दिमाग से काम लोगे तो दर्द बढ़ेगा मेरे यार ! हेरान हूँ मैं की यह तुमको क्या हो रहा है ? इश्क का असर जिस्म से होकर रूह में पैवस्त हो रहा है …. अब पुराने रंग दूर कहीं छूट गए है नहीं तो कुछ बढ़िया सा तुमको सुनाता सकूं आने की हद तक दिल को तुम्हारे बहलाता ….. ********************************************** प्रिय अबोध भाई …..सप्रेम नमस्कार ! बस इसी प्रकार लिखते रहो और हमारे दिल +दिमाग और रूहों पर अपना कब्ज़ा करते रहो …. मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/30/“आदरणीय-निशा-मित्तल-–-दा-ल/ http://facemoods.com/uninst/aflt/bfus/instlid/3ecd937f0977432183e44fe2386ef6eb ]

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    राज भाई मैंने आपसे एकदम सच्चा कमेन्ट माँगा था , की ये कैसा लिखा है पर आपने पर आपने फिर से शब्दों के जाल में, ………. खैर आपने तारीफ की है तो मुझे प्रसन्न होना ही चाहिए ……. कोशिश की है की इस बार कुछ हट कर ……… अपना आशीर्वाद बनाये रखे गुरुवार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

roshni के द्वारा
October 3, 2011

अबोध जी नमस्कार क्या कहे आपके इस लेख के बारे मे कुछ नहीं कह सकते क्यकी दिल की बाते दिल ही जाने … बस दो शब्द मेरे मनपसंद गीत के सांसों की माला पे सिमरु मे तेरा नाम , मेरे दिल की मे जानु तेरे दिल की राम … बाकि सब किस्मत के खेल है.. चाह सची हो तो नदी के किनारे भी कही न कही मिल ही जाते है .. आभार

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    रौशनी जी ये एक ऐसा रोग है जिसमे पद कर व्यक्ति ….. वैसे जीवन ही किस्मत और कर्म के खेल में …….., देखते हैं, हम भी की किस्मत में क्या है? आभारी हूँ आपका … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Paarth Dixit के द्वारा
October 3, 2011

अबोध जी, नमस्कार…बहुत ही सुन्दर एवं भावुक लेख के लिए हार्दिक बधाई… साधुवाद ..

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    धन्यवाद पार्थ जी किसी ने तो समझा की ये लेख है न की जीवनी :) या ये जीवनी ही है लेख नहीं ? http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Lahar के द्वारा
October 3, 2011

अबोध जी सप्रेम नमस्कार भाई किसकी याद में आपने गजल और लेख दोनों को मिक्स कर के एक नायब रचना दर्दे दिल लिख दी है ? आप नदी के किनारे थोड़े है जो कभी नहीं मिलेंगे ! इन्शाह अल्लाह बहुत जल्दी मिलेंगे ! वैसे कैलाश जी की बात से मै सहमत हु अब आप अबोध नहीं रहे !

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    लहर जी यार काफी दिन से अबोध और बालक रहा हूँ अब सोच रहा हूँ की बड़ा हो ही जाऊं और अबोधता को त्याग कर ………… देखें सफलता मिलती है की नहीं? आप हमारे लिए प्रार्थना अवश्य करियेगा की वो ……….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Abdul Rashid के द्वारा
October 3, 2011

शायद ऐसी कभी मेरा भी दिल यु ही कहता था “मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सनम तेरे नाम से शरू तेरे नाम पर ख़तम”.लेकिन दोस्त “मोहब्बत के सिवा दुनिया में और भी गम है” वो चले गए और मै चाहकर भी नहीं रोक सका इत्तफाक देखिए आज आपने मुझे उनलाम्हो को याद दिला दिया जो बस यादे है आज भी मै उनको देखता हु लेकिन अजनबी की तरह काश ऐसा और किसी के साथ न हो.

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    राशिद भाई आप ठीक कहते हैं की मोहब्बत के सिवा दुनिया में और भी … पर क्या करें, हम तो सदा ही अबोध ठहरे, दिल की ही सुना और दिमाग की ………. अब भी वैसा ही है, ………. सो देखते हैं समय की गर्त में मेरे ………. आभार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
October 3, 2011

आदरणीय बड़े भाई , सादर प्रणाम ! क्या बात है आज बड़े ही सीरियस नजर आ रहे हैं धृष्टता के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ , परन्तु दिल है की मानता नहीं | आपके कुछ प्रश्नों का उत्तर प्रस्तुत है – प्रश्न :-ऐसा क्यों होता है की हम दिल के हाथों मजबूर हो जाते हैं और दिमाग की नहीं सुनते ? उत्तर :-क्योंकि दिमाग दिल से लभग डेढ़-दो फुट उपर होता है | प्रश्न :- पता नहीं ये रोग कैसे लगा लिया है मैंने . धीरे धीरे कोई मन में बस गया है | उत्तर :- क्योंकि लगता है अब आप “अबोध” नहीं रहे |

    abodhbaalak के द्वारा
    October 4, 2011

    डाक्टर साहब हँसाना भी अपने आप में ………… उत्तर बड़े पसंद आये. लेख है जीवनी न समझ ………… पर हो सकता है की जीवनी ही हो

    Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
    October 4, 2011

    यह कैसी कशमकश ………. ??????????????

    abodhbaalak के द्वारा
    October 5, 2011

    मई खुद समझने का प्रयास कर रहा हूँ डाक्टर साहब, की इस कश्म काश में मै कैसे ………. आशा की किरण है देखते हैं की ये क्या रूप लेती है . http://abodhbaalak.jagranjunction.com/


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