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ख्वाब

Posted On: 5 Sep, 2011 Others में

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देख लो ख्वाब मगर ख्वाब का चर्चा ना करो
लोग जल जायेंगे सूरज की तमन्ना ना करो
 
वक़्त का क्या है किसी पल भी बदल सकता है
हो सके तुम से तो तुम मुझ पे भरोसा ना करो
 
किरचियाँ टूटे हुए अक्स की चुभ जाएँगी
और कुछ रोज़ अभी आइना देखा ना करो
 
अजनबी लगने लगे खुद तुम्हे अपना ही वजूद
अपने दिन रात को इतना भी अकेला ना करो
 
ख्वाब बच्चों के खिलौनों की तरह होते हैं
ख्वाब देखा ना करो, ख्वाब दिखाया ना करो
 
बेख्याली में कभी उंगलियाँ जल जाएँगी
राख गुज़रे हुए लम्हों की कुरेदा ना करो
 
मोम के रिश्ते हैं गर्मी से पिघल जायेंगे
धुप  के शहर में “आजेर” ये तमाशा ना करो
 
कफील आजेर की इस खूबसूरत ग़ज़ल को आपके साथ बाँट रहा हूँ, खुद अपने आपको इस लायक नहीं पाता की कोई ऐसी कविता या ग़ज़ल लिखों जो इस मंच की स्तर की हो इस लिए अगर कभी कोई कविता या ग़ज़ल अच्छी लगती है तो आपके साथ ……, आशा है की आपको पसंद आएगी.

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55 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
September 24, 2011

प्रिय अबोध जी, इस बेहतरीन रचना को मंच पर लाने के लिए हार्दिक धन्यवाद! ‘ख्वाब टूटें तो अक्सर लोग बिखर जाते हैं, यहाँ टूटी है हकीकत तो गिला किससे करे, अश्क आँखों में ही घुटते हैं सूख जाते हैं!

naturecure के द्वारा
September 14, 2011

आदरणीय भ्राता श्री, सादर प्रणाम ! सुन्दर गजल की प्रस्तुति के लिए आभार |

    abodhbaalak के द्वारा
    September 15, 2011

    आदरणीय कैलाश जी आपके विचार के लिए आभारी हूँ, बस कभी कभी कोई ग़ज़ल जो दिल को छू जाती है उसे आप सब के साथ …… आगे भी अपने …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

vikasmehta के द्वारा
September 11, 2011

सुंदर गजल

    abodhbaalak के द्वारा
    September 11, 2011

    धन्यवाद , आपने इसे अपने कमेन्ट के लायक तो समझा :) आगे भी अपने विचारों से …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sadhana thakur के द्वारा
September 10, 2011

एक बहुत ही अच्छी गज़ल पढने का मौका मिला ,,धन्यवाद् अबोध जी ……

    abodhbaalak के द्वारा
    September 11, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद साधना जी आपके प्रोत्साहन और कमेंट्स के लिए आगे भी आपसे …………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

संदीप कौशिक के द्वारा
September 8, 2011

अबोध जी, बहुत ही सुंदर ग़ज़ल ! दिल को छू गयी……। इसे मंच पर साझा करने के लिए आपका हार्दिक आभार । :)

    abodhbaalak के द्वारा
    September 9, 2011

    संदीप जी आपकी शायरी का तो मै दिल से कायल हूँ, और अगर आपको ये पसंद आई तो ………. आभार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

syeds के द्वारा
September 8, 2011

अबोध जी, बेहद खूबसूरत ग़ज़ल को हम सबके सामने रखने के लिए धन्यवाद… http://syeds.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    September 9, 2011

    शुक्रिया सय्यद जी, उत्साह बढ़ने और आपके कमेन्ट के लिए धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

div81 के द्वारा
September 8, 2011

बहुत ही खूबसूरत गज़ल को हम सबके साथ साझा करने के लिए आप का आभार

    abodhbaalak के द्वारा
    September 9, 2011

    धन्यवाद दिव्या जी, आभारी हूँ की आपने किसी भी तरह, कमेन्ट तो किया :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Santosh Kumar के द्वारा
September 8, 2011

आदरणीय अबोध जी ,..अत्यंत सुंदर पोस्ट ,..साधुवाद आपके बात पर मैं चित्रांश जी क्व विचार से पूरा सहमत हूँ ..सादर धन्यवाद

    abodhbaalak के द्वारा
    September 8, 2011

    संतोष जी आपके प्रोत्साहन और विचार के लिए धन्यवाद, चित्रांश जी की पोस्ट पर मेरे दिए गए विचार या इस रचना के विषय में उनके विचार ? …… समझ नहीं पाया? आभारी हूँ आपका के आप समय निकल कर…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Santosh Kumar के द्वारा
    September 11, 2011

    आदरणीय अबोध जी ,.सादर नमस्कार मैं चित्रांश जी के इसी रचना पर कमेन्ट का समर्थन करता हूँ ..साभार

    abodhbaalak के द्वारा
    September 11, 2011

    :) दिल से आपके इस उत्तर और विचार, दोनों का आभारी हूँ बस अपनी कृपा द्रिषित बनाये रखियेगा … :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Tufail A. Siddequi के द्वारा
September 8, 2011

अबोध जी एक सुन्दर रचना को मंच पर साझा करने के लिए धन्यवाद. http://siddequi.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    September 8, 2011

    आपका शुक्रिया तुफैल जी, के आपने इस रचना को समय निकल कर पढ़ा और उर पर अपनी राय व्यक्त की, आगे भी आपसे अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराने का अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Ravindra K Kapoor के द्वारा
September 7, 2011

एक सुन्दर रचना को मंच पर साझा करने के लिए धन्यवाद. कफील आजेर की इस खूबसूरत ग़ज़ल में दिल को चुने वाली बात है. सुभकामनाओं के साथ….रवीन्द्र

    abodhbaalak के द्वारा
    September 8, 2011

    आदरणीय रविन्द्र जी आभारी हूँ आपके प्रोत्साहन और प्रतिक्रिया के लिए, आगे भी आपसे …………………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajkamal Sharma के द्वारा
September 7, 2011

आप ही का गैस ठीक है ….. उनको दिया गया उत्तर मेरे ब्लॉग पर है ….. धन्यवाद

Vinita Shukla के द्वारा
September 7, 2011

बहुत ही सुन्दर पोस्ट अबोध जी. मंच पर इसे साझा करने के लिए धन्यवाद.

    abodhbaalak के द्वारा
    September 7, 2011

    विनीता जी, आपके प्रोत्साहन और स्नेह के लिए आभारी हूँ, प्रयास रह्गेगा की अगर भविष्य में भी कुछ मुझे अच्छा लगा तो सबके साथ ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Ramesh Bajpai के द्वारा
September 7, 2011

मोम के रिश्ते हैं गर्मी से पिघल जायेंगे प्रिय श्री अबोध जी रिश्तो की यह अनबूझ पहेली और धूप की यह दुनिया | यही हकीकत है | फिर विछोह से डर क्यों लगता है | जीवन की हकीकत को बया करती इस सुन्दर पोस्ट को साझा करने का शुक्रिया |

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    September 7, 2011

    आदरणीय वाजपेई जी …..सादर प्रणाम ! आपकी मुंहबोली बिटिया रानी मेरे पास अपनी शिकायत लेकर आई थी ….. वैसे तो अपनी तरफ से मैंने भरकस प्रयास किया था ….. लेकिन अगर कोई कमी रह गई हो + कोई भूल चूक हो गई हो तो आप क्षमा करते हुए संभाल लीजियेगा …… धन्यवाद

    abodhbaalak के द्वारा
    September 7, 2011

    आदरणीय बाजपेई जी आभारी हूँ आपका की आपने सदा की भांति इस बार भी अपने विचार से मेरी पोस्ट की शोभा बढ़ाई है, सदा की भांति इस बार भी निवेदन रहेगा की आगे भी ….. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajkamal Sharma के द्वारा
September 6, 2011

प्रिय अबोध जी …..सस्नेह नमस्कारम ! आपके उस लेख का लिंक नीचे दिए दे रहा हूँ …. इसमें लिखे गए आखिरी शब्दों को जरूर पढ़े ….. मुझको यह न केवल याद थे बल्कि मेरे इस दिल में भी बसे हुए है इस लिए मुझको आज भी याद है और हमेशा ही रहेंगे ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/2010/11/22/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2/

    abodhbaalak के द्वारा
    September 7, 2011

    राज भाई, असल में मै शीर्षक दूंढ रहा था की शायद गाली के नाम से …… धन्यवाद आपका की आपने समय निकला और उस पूरी रचना को …… तुस्सी ग्रेट हो पा जी, :) वैसे उस पोस्ट में लिखे सारे शेर मेरे खुद की थे, इस लिए वो सच में स्पेशल है, एक बार फिर से धन्यवाद. आपका अपनापन सदा ही मेरे लिए …………… वैसे बाजपेई जो को किस बिटिया के लिए मैसेज भेजा जा रहा है? गेस तो है पर फिर भी …… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rajkamal के द्वारा
September 6, 2011

प्रिय अबोध जी ….सस्नेह नमस्कार ! आपने मेरी सलाह मानी उसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद ! जहाँ तक मुझे याद पड़ता है आपने कुछेक शेयर पेशे खिदमत किये थे जिनका शीर्षक “गाली” था शायद ….. वोह फीचर्ड होने के साथ -२ सर्वाधिक पठित की सूचि में भी चमके थे ….. लेकिन अफ़सोस की फिर दुबार आपने वैसी कोई “गाली” नहीं निकाली ….. मुबारकबाद http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/04/“नाकाम-–-मोहब्बत”/ :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) :o ;) :(

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    राज जी मैंने अपनी सारी पोस्ट देख डाली, पर मुझे कोई ऐसी पोस्ट नहीं मिली जिसका शीर्षक गाली या इससे मिलता जुलता था, वैसे भी मै ठहरा अबोध, मै क्या जानू की गाली क्या होती है :) रही बात आपके बात मानने की तो आप ठहरे मेरे मुंहबोले गुरु…………… बात तो माननी ही पड़ेगी, बस अपना स्नेह बनाये रखियेगा गुरुवर, यही आपस आग्रह और अनुरोध है. (वैसे सोच रहा हूँ की गली पर भी एक पोस्ट लिख ही डाली जाए :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

akraktale के द्वारा
September 6, 2011

हमेशा बोलते रहते हो पर बात नहीं बनती, एक बार हमको भी सुन लेते तो  बात वहीं खत्म हो जाती. अबोधजी सराहनीय है. ऐसी गजलें तो बारबार पढने और गुनगुनाने का मनकरता है.

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद आपके प्रोत्साहन और प्रतिक्रिया के लिए… आगे भी आपसे ऐसे ही अपने विचारों से अवगत कराने के अनुरोध अहि… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

RASHID के द्वारा
September 6, 2011

अबोध भाई,, ज़िंदगी मे कुछ लोग ऐसे मिलते है जिनको भुलाना मुमकिन नहीं होता है ! सारी नसीहते बेकार हो जाती है और बस दिल वही अटक जाता है , पता नहीं यह प्यार वरदान होता है या अभिशाप !! शायद आप ने जोश मलीहाबादी की यह ग़ज़ल सुनी हो ! कहूँ किस तरह से की वह बेवफा है मुझे उसकी मजबूरीयों का पता है

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    राशिद भाई बहुत ही खूबसूरत पंक्तियों के साथ आपने अपने कमेन्ट दिए है, यकीनन प्यार कुछ ऐसी ही ……………….के आदमी सब कुछ भुला देता है और उसे हर जगह …. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Rahul Dwivedi के द्वारा
    September 13, 2011

    अबोध जी बढ़िया ग़ज़ल पेश की आपने. पर राशिद भाई जहाँ तक मुझे याद आ रहा है ये शेर खुमार बाराबंकवी साब का है…….

    abodhbaalak के द्वारा
    September 14, 2011

    धन्यवाद राहुल जी आपके सुन्दर कमेन्ट और प्रोत्साहन के लिए, अब आप और रशीद भाई देसैद कर लें की ये पंक्तियाँ किसी हैं :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 6, 2011

प्रिय अबोध बालक जी बहुत सुन्दर सब कुछ खुद कर लेना कहाँ तक संभव है बहुत कुछ अच्छी चीजों को शेयर कर सामने लाना संकलन करना म्हणत करना भी बहुत बड़ा काम है आभार आप का जो इतनी अच्छी गजल सामने लाये -निम्न बहुत सुन्दर किरचियाँ टूटे हुए अक्स की चुभ जाएँगी और कुछ रोज़ अभी आइना देखा ना करो ख्वाब बच्चों के खिलौनों की तरह होते हैं ख्वाब देखा ना करो, ख्वाब दिखाया ना करो भ्रमर ५

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    भ्रमर जी जब आप जैसे लेखक, जिसे मै विलक्षण प्रितभा समझता हूँ, अपनी बात कहते हैं तो कुछ और ही …. आभारी हूँ आपका, और प्रयास रहेगा की आगे भी कभी …. अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखें … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Charchit Chittransh के द्वारा
September 5, 2011

मित्र ; आपको पहले भी कई बार पढ़ा है इसीलिए आपके निवेदन से सहमत नहीं हूँ ! यदि आप इस मंच के योग्य नहीं लिख सकते तो हम सब भी अयोग्य ही हुए !किन्तु आपकी यह पहल स्वागत योग्य है ! इस बहाने शायद भविष्य में भी , हम सब कुछ नामचीन कलमकारों को पढ़ने का सौभाग्य पा सकेंगे ! एक मजेदार बात बताऊँ मैं इस शेर के मायने कुछ इस तरह पढ़कर आपसे पूछने वाला था की तीसरी बार में समझ आ गया – ख्वाब बच्चों के , खिलौनों की तरह होते हैं ख्वाब देखा ना करो, ख्वाब दिखाया ना करो ! तीसरी बार इस तरह ख्वाब , बच्चों के खिलौनों की तरह होते हैं ख्वाब देखा ना करो, ख्वाब दिखाया ना करो ! जय हिंद !!!!!!!!!!!!!!!

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    चित्रांश जी आपके सुन्दर कमेन्ट के लिए आपका आभारी हूँ आगे भी प्रयास रहेगा की कभी कभी ….. बस अपने विचार से सदा अवगत करते रहें … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

laxman1989 के द्वारा
September 5, 2011

आपकी लेखनी का जादू वाकई लाजवाब है ..अतिउत्तम

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    लक्ष्मण जी संभवतः आपने देख नहीं, ये मेरी नहीं बल्कि कफील अज़र की है, मैंने तो केवल आपके साथ इसे बनता है… फिर भी आपको पसंद आई इसके लिए धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rajkamal के द्वारा
September 5, 2011

प्रिय अबोध जी ….सस्नेह नमस्कार ! भाई साहिब आपकी तो गालियां भी अतीत में सुपर डुपर हिट रह चुकी है ….इसलिए इस सांझे मंच का स्तर हमारे लिखे हुए से उपर कभी भी नहीं हो सकता …… फिर भी आपके इस भागीरथी प्रयास की सराहना तो करनी ही पड़ेगी और हम चाहते की हमको इस तरह का मौका बार बार मिले …… इस अति विशिष्ट गजल के लिए आपको ढेरो धन्यवाद http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/04/“नाकाम-–-मोहब्बत”/ :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) :o ;) :(

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    प्रिय राज जी, आपसे कुछ इस तरह का भावनातमक जुड़ाव हो गया है की आपके कमेन्ट मेरे लिए कुछ खास ही महत्व रखते हैं. वैसे मुझे याद नहीं पद रहा है की मैंने मंच पर कभी गालियाँ ………… ह्म्म्मम्म प्रयास रहता है की जैसा आपने चाह था, वैसे ही हर १५ दिन पर एक पोस्ट तो कर ही दिया जाएँ बस अपनी कृपादृष्टि बनाये रखियेगा … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

nishamittal के द्वारा
September 5, 2011

सुन्दर रचना मंच पर शेयर करने के लिए धन्यवाद अबोध जी.

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    आदरणीय निशा जी आपका आभारी हूँ की आपने अपने विचार ……. सदा ही आपके कमेंट्स का इंतज़ार रहता है http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Dharmesh Tiwari के द्वारा
September 5, 2011

आदरणीय अबोध जी सादर प्रणाम,,,,,,,,,,,,ख्वाब बच्चों के खिलौनों की तरह होते हैं ख्वाब देखा ना करो, ख्वाब दिखाया ना करो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, इतनी खुबसूरत गजल को साझा करने हेतु धन्यवाद!

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    धर्मेश जी आचा लगा आपके विचार पढ़ कर, काफी समय हो गया था आपकी प्रतिक्रिया मिले हुए…. :) आगे भी आपसे अनुरोध है की अपने विचार …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

वाहिद काशीवासी के द्वारा
September 5, 2011

आजेर साहिब की ये ख़ूबसूरत ग़ज़ल हमारे साथ साझा करने के लिए आपका शुक्रिया सुबोध भाई। ;)

manoranjanthakur के द्वारा
September 5, 2011

पर मुझे एतबार था भरोसा भी यू इतनी सुंदर ग़ज़ल हर रोज लिखा भी तो करो

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    लीजिये साहब आपने भी शायरी शुरू कर दी :) सुन्दर पंक्तियों के साथ आपने ……… आभार http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

alkargupta1 के द्वारा
September 5, 2011

अबोध जी , बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल शेयर करने के लिए बहुत धन्यवाद ! आपका यह प्रयास निस्संदेह प्रशंसनीय है ! बेख्याली में कभी उँगलियाँ जल जाएँगी राख गुज़रे हुए लम्हों की कुरेदा न करो बहुत ही अच्छी पंक्तियाँ हैं !

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    आदरणीय अलका जी आभारी हूँ आपका, की आपने इस पोस्ट के कमेन्ट के लायक समझा …. सदा आपसे मार्गदर्शन का अनुरोध है …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/


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