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अन्ना जी और मेरी अलग सोच

Posted On: 19 Aug, 2011 Others में

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आज काफी समय के बाद फिर कुछ लिखने को दिल चाह रहा है, पर क्या और कैसे लिखूँ?
 
 
३२ पोस्ट होने के बाद भी ये प्रश्न सदा ही परेशान करता है.
 
 
खैर, आज जब की सारा वातावरण “अन्नामय” हुआ है, और कोई भी न्यूज़ चैनेल खोलो “अन्नाकार” सुनने को मिलता है, “समाचार” नहीं , सोचा इसी विषय पर कुछ लिखा जाये और इसकी प्रेरणा मुझे अपने घर बात करने से मिली.
 
 
मेरे बहन के बेटे ने बताया की मामा, यहाँ पर भी कल एक बड़ा मार्च निकला था अन्ना हजारे जी के समर्थन में, जिसमे बहुत सारे लोग थे. बात – बात में ये भी पता चला की एक मित्र है हमारे जो की कोर्ट में काम करते हैं, अच्छी सैलरी है पर सैलरी से ज्यादा वो रोज़ मिलने वाले ……….. के लिए जाने जाते हैं, उपरी आमदनी इतनी है की ………. खूबसूरत बंगला नुमा घर, गाड़ी और हर सप्ताह पत्नी और बच्चो के लिए नए नए कपडे………. आदि आदि, वो इस मार्च में बड़े जोर शोर से थे……. सुन कर हंसी आ गयी…..,, आज अन्ना जी को सपोर्ट करने में वकील, नेता और ना जाने कौन कौन से लोग हैं, जिनके बारे में निश्चित है की उन्मसे १०० में से ९५% करप्ट हैं, वो उछल उछल कर ………………., और वही लोग ज्यादा शोर कर रहे हैं की भ्रष्टाचार को …………………..,
 
 
मैंने कहीं पढ़ा था या शायद सुना था की पहला पत्थर वो मारे जिसने पाप ना किया हो, आज जिसे देखो वही हाँथ में पत्थर लेकर खड़ा है, और अधिकतर का दामन ……………….,
 
 
आज जिस अन्ना जी की आंधी में देश रंगा है, कितने लोग जानते थे कुछ महीने पहले उन्हें ? मै आपसे पूछता हूँ क्या अन्ना जी से पहले किसी नो भ्रष्टाचार का विषय नहीं उठाया………………., तो आज फिर अन्ना जी ही को गाँधी जी के अवतार के रूप में क्यों देखा  जा रहा  हैं? मै जानता हूँ की मेरे विचार मंच पर के हर विशिष्ट और आदरणीय लेखक से अलग है पर मै नहीं जानता की ऐसा क्यों हैं? मै मानता आया हूँ की अगर आपको आदर्श बनना है तो आपका दामन बिना किसी धब्बे के, दाग के हो, और ये जग विजित है की अन्ना जी पर भ्रष्टाचार का आरोप सिद्ध हो चूका था, भले किसी भी रूप में,
 
 
 
यहाँ आप से ये निवेदन है की मुझे आप कांग्रेस पार्टी का समर्थक या एजेंट ना समझ ले, निसंदेह ये पार्टी और सरकार अब तक की सबसे भ्रष्ट सरकार है, निकम्मी है, आम आदमी की सरकार का नारा लगाने वाली ये सरकार आम आदमी से कितनी दूर हो गयी है इसका पता तो इसे जैसे ही चुनाव होंगे, चल जायेगा. बात अन्ना जी और आज के इस महा आन्दोलन की हो रही है……. पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगता है की इस पूरे आन्दोलन को कहीं ना कहीं, बड़े सोचे समझे प्लान के अनुसार चलाया जा रहा है, कौन है इसके पीछे इसका पता नहीं पर ये मेरी सोच है……. वरना केवल चंद दिनों में इतना बड़ा वर्ग इस तरह से …..
मुझे पता है की आप सब को शायद ये मेरा संदेह और लेख, शायद पसंद ना आये पर ये मेरी सोच है…….  और हो सकता है की मेरी शंका निर्मूल हो,
 
 
 
इश्वर से प्रार्थना है की अन्ना जी वही अवतार हों जिसकी आपने प्रार्थना की हो, पर वास्तविक बदलाव तभी आएगा जब एक आम आदमी बदलेगा, जहाँ भ्रष्टाचार जीवन का क हिस्सा बन गया हो, वहां पर हर किसी को खुद के गिरेबान में झाक कर देखना  होगा, दुसरे पर ऊँगली उठाते समय ये देखना होगा की हम कितने पानी में हैं. बदलाव घर से होगा,  खुद से होगा……….
 
 
 
अन्ना जी के समर्थन में उतरने से पहले हमें खुद को देखना होगा, की क्या हम वास्तव में उनका समर्थन कर रहे हैं या केवल उस भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं, दूसरो के देख कर, पर इसके वास्तविक अर्थ को समझे बिना.
 
 
अंत में, आप सब से नम्र निवेदन है की मेरे इस लेख से अगर आप सहमत नहीं भी हों, जिसके चांसेस बहुत अधिक है, तो भी अपना स्नेह बनाये रखियेगा, क्योंकि वही मेरी शक्ति है.

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67 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

gopesh के द्वारा
January 4, 2012

आदरणीय अबोध बालक जी मुझे ये ब्लॉग पहले ही पढ़ लेना चाहिए था , आपने बिलकुल उचित लिखा है और मुझे यकीन है की कई बुध्जिवियों को ये रास भी नहीं आएगा! वास्तवमें हम भारतीय बड़ी जल्दी लोगों से प्रभावित हो जाते हैं , इसमें कोई संदेह नहीं की वर्तमान सरकार के नेतृत्व में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा को भी लांघ गया है , पर इसका जिम्मेदार सिर्फ एक दल या फिर राजनीति को ही मानना उचित नहीं है , क्यूंकि हम सब इसमें पूरी तरह शामिल हैं , कोई कांग्रेस या बी.जे. पी के लिए भ्रष्टाचार नहीं करता वो अपने परिवार को दुसरे से ज्यादा खुश रखने के लिए करता है ,मैंने भी देखा है जो सरे आम भ्रष्ट हैं वो अन्ना अन्ना करके अपने को देश का सबसे बड़ा सेवक सिद्ध कर लिया है , और उनकी टीम के कुछ सदस्यों का संदिग्ध गतिविधियों में सम्मिल्लित होना अछि बात नहीं है अतः हमें दूसरों में दोष निकालने से पहले अपना दमन साफ़ करना होगा! हमें विस्मय हुआ तब जब उन्होंने राजनीति में आने की समर्थ होने के बावजूद इससे न जुड़ने की बात की क्यूंकि उनकी निगाह में राजनीति गन्दी है! अब भला आप बताईये की क्या बिना राजनीति में अछे लोगों के आये हुए कोई भी जन कल्याणकारी काम व्यापकता से कर सकते है , कभी नहीं अच्छे लोगों का राजनीति में आना इस देश की सबसे बड़ी आवश्यकता है! अच्छे लेख के लिए आपका हार्दिक आभार!

chaatak के द्वारा
September 24, 2011

प्रिय अबोध जी, मैं यहाँ पर विशेष रूप से आपके द्वारा उठाये गए एक सवाल पर केन्द्रित करना चाहूँगा- एक तरफ आप कहते हैं- ‘मै आपसे पूछता हूँ क्या अन्ना जी से पहले किसी नो भ्रष्टाचार का विषय नहीं उठाया………………., तो आज फिर अन्ना जी ही को गाँधी जी के अवतार के रूप में क्यों देखा जा रहा हैं?’ और दूसरी तरफ ‘अन्ना जी के समर्थन में उतरने से पहले हमें खुद को देखना होगा, की क्या हम वास्तव में उनका समर्थन कर रहे हैं’ आपके प्रश्न से लगता है जैसे आप अन्ना जी को गांधी जी के अवतार के रूप में देखे जाने को ठीक नहीं मानते क्योंकि अन्य लोग भी उनके जैसे हैं और दूसरी और ऐसा लगता है जैसे आप अन्ना जी को पाक साफ़ मानते हैं इसलिए सिर्फ पाक-साफ़ लोगों का ही उनके साथ शामिल होना आपको पसंद है| फिर एक और जगह भटकाव नजर आता है जब आप लिखते हैं ‘इश्वर से प्रार्थना है की अन्ना जी वही अवतार हों जिसकी आपने प्रार्थना की हो,’ यानी आप कहीं न कहीं अन्ना के लोगों की उम्मीदों पर खरा साबित न हो पाने वाली स्थिति से डरते भी हैं| कुल मिला कर पोस्ट शायद अपनी बात स्पष्ट करने की कोशिश करते करते भटक गई| ये सिर्फ मेरी राय है हो सकता है मुझे ऐसा प्रतीत हुआ हो| आशा है मेरी राय को अन्यथा नहीं लेंगे|

Charchit Chittransh के द्वारा
September 5, 2011

अबोध जी ; आपका उठाया हुआ मुद्दा असंगत हो ही नहीं सकता ! लगभग हर बिंदु से मेरी सहमति किन्तु मेरी विस्तृत प्रतिक्रिया “गैर जरूरी था अन्नाजी का अनशन ” ब्लॉग के रूप में शीघ्रातिशीघ्र देने का प्रयास करूँगा !

    abodhbaalak के द्वारा
    September 6, 2011

    चित्रांश जी आपके प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ, आपकी पोस्ट अवश्य पढ़ कर ………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Kailash C Sharma के द्वारा
September 2, 2011

बहुत सार्थक आलेख. भ्रष्टाचार हटाने की पहल हमें सबसे पहले अपने आप से करनी होगी. केवल क़ानून बनाने से कुछ नहीं होगा, जब तक कि हमारी मानसिकता नहीं बदलती है.

    abodhbaalak के द्वारा
    September 4, 2011

    सर आपके कमेन्ट, प्रोत्साहन, और समर्थन के लिए आपका आभारी हूँ, अपनी राय से सदा अवगत करते रहें यही अनुरोध है. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

munish के द्वारा
August 30, 2011

प्रिय अबोधबालक जी, वास्तव में भ्रष्टाचार इस व्यवस्था का एक स्थायी अंग बन चुका है. जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में इस कदर घुलमिल गया है की ये हमको भी ध्यान नहीं रहता की हम भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं. इसलिए ये कहना की भ्रष्टाचारी ही इस आन्दोलन में शिरकत कर रहे हैं, इसलिए उन्हे आन्दोलन करने का अधिकार नहीं हैं……..गलत है…….. हमारी व्यवस्था ऐसी बन चुकी है की न चाहकर भी भ्रष्टाचार में शामिल होना ही पड़ता है……… लेकिन यदि सभी लोग एकमत होकर व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाते हैं इसमें क्या गलत है……. आपकी आशंका निराधार नहीं है लेकिन मेरे विचार से आपने उसको आन्दोलन से गलत जोड़ा है और गलत समय पर जोड़ा है. क्योंकि की किसी भी आन्दोलन के मध्य में इस तरह के विचार यदि आयेंगे तो हो सकता है की आन्दोलन की गति को अवरुद्ध करे, ………! मैंने बहुत पहले रोजमर्रा की जिंदगी में हो रहे भ्रष्टाचार के ऊपर एक पोस्ट लिखी थी उसका लिंक दे रहा हूँ http://munish.jagranjunction.com/2011/05/19/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81/

    abodhbaalak के द्वारा
    September 2, 2011

    चलें सर अब तो ये आन्दोनल ने भी कुछ समय के लिए ….. अब इसके इम्प्लीमेंट होने तक क्या क्या होता है हम भी आपसे कसाथ देखते हैं बेस्ट ऑफ़ लक http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

ajaykumar2623 के द्वारा
August 30, 2011

सर भ्रष्टाचार को समाप्त करने की अन्ना की मांग एकदम सही है लेकिन अब अन्ना की कुछ मांगे गलत हैं. अन्ना द्वारा न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग गलत है क्योंकि न्यायपालिका कई दोषियों को सजा देने का काम भी karti है तो ऐसे में हो सकता है कोई सज़ा प्राप्त व्यक्ति बदले की भावना से किसी न्यायधीश पर भरष्ट होने का गलत आरोप लगा दे……………. तो ऐसे में जज कैसे निष्पक्ष होकर न्याय कर पायेगा…….. इसलिए सज़ा तो गलत या झूठा आरोप लगाने वाले को भी कड़ी से कड़ी मिलनी चाहिए.वरना न्याय व्यवस्था चरमरा जायेगी… और इससे हो सकता है उन लोगों को भी नुकसान हो जो अपने पर हुए अन्याय के लिए इन्साफ मांगने न्यायलय की शरण में जाते हैं…… तब उन्हें एहसास होगा की अन्ना का समर्थन करके उन्होंने कितनी बड़ी गलती की थी …………………. प्रधान मंत्री को कई बार देश हित में कई अजीबो गरीब तरह के फैसले भी करने पड़ते है ऐसे में अगर प्रधानमंत्री लोकपाल जांच में फंसा तो देश का तो बंटाधार हो जाएगा ……….. जो भी बात प्रधानमन्त्री बोलता है तो वो देश के 121 करोड़ लोगो की और से बोलता है,ऐसे में लोकपाल के दायरे में उसे रखने की बात सरासर गलत है एक आम आदमी जब अपने घर के दो चार सदस्यों की समस्या सुलझाने में पागल होने लगता है, तो प्रधानमत्री किस सूझ बूझ से निर्णय लेता होगा ये तो वही जानता है. जहाँ तक बात विपक्ष के शोर शराबे की है तो सत्ता तो विपक्ष की भी आएगी, तो विपक्ष (जो उस वक्त सत्ता में होगा) कैसे निर्भीक होकर काम करेगा ??????????? फिर चाहे वो भाजपा हो या कोई और……….. हाँ जजों की संपत्ति की जांच के लिए क़ानून बनाया जा सकता है जो उनपर रिश्वतखोरी का आरोप लगने, या उनके कदाचार साबित होने पर उन्हें अपदस्थ करने में सक्षम हो……….. खैर मैं ज्यादा क्या लिखूं क्योंकि कुछ लोगों को बुरा लग सकता है. वैसे भारत में जब तक कोई चीज़ खुद के सिर पर ना गिरे लोगों को कुछ एहसास नहीं होता …………. लेकिन इतना ज़रूर कहूँगा की संविधान से ऊपर कोई नहीं है ना तो प्रधानमंत्री, ना न्यायपालिका, ना लोकपाल और ना ही अन्ना हजारे इस बात की क्या गारंटी है की लोकपाल ढूध का धुला होगा । रही बात भ्रष्टाचार की ,तो उसके पक्ष में मैं भी नहीं हूँ, और हाँ मैंने ये कहना चाहा है कि सज़ा का प्रावधान गलत या झूठी शिकायत करने वाले के लिए भी होना चाहिए.

    abodhbaalak के द्वारा
    August 30, 2011

    आपके कमेन्ट और विश्लेषण के लिए धन्यवाद अजय जी आपकी लगभग साडी ही बातें सही हैं इस पूरे आन्दोलन को लेकर, लेकिन अभी हम उन पहलुओं पर सोच ही नहीं रहे हैं न जो की ……. आशा है की आगे भी आपके विचार मिलते रहेंगे .. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

amitadixit के द्वारा
August 27, 2011

आप बड़े प्रासंगिक विषयों पर लिखते हैं और मैं अप्रासंगिक… :-) अण्णा या आंदोलन से असहमत होने का आपको अधिकार है। 1 ये सही है कि कोई एक कानून देश से भ्रष्टाचार नहीं मिटा सकता है, लेकिन दंड का खौफ उसकी आवृत्ति और गति दोनों पर लगाम लगा सकता है, यदि ऐसा न होता तो फिर दुनिया में किसी भी तरह के कानूनों की जरूरत ही नहीं होती। 2 ये राजनीति बहुत घटिया चीज है और यूँ भी हम षडयंत्रों के दौर में रह रहे हैं। हम कभी समझ ही नहीं सकते हैं कि कौन, किसके खिलाफ और क्या षडयंत्र बुन रहा है। यहाँ गाँधी तक को नहीं छोड़ा गया तो फिर बेचारे अण्णा हजारे क्या चीज है…? 3 भ्रष्टाचार मिटाने के लिए सबसे पहले हमें खुद को ही साधना होगा, सही है, लेकिन तब तक तो कानून की जरूरत पड़ेगी ना… ;-)

    abodhbaalak के द्वारा
    August 27, 2011

    अमिता जी आपके विचार भी आपकी vidvanta का ………… बात प्रासंगिक या अप्रासंगिक की नहीं बल्कि किसी तरह लिखा जाये उसकी हो रही थी, मेरे लेख अभी भी किसी नौसिखिया ……. खैर, आपने जो ३ बिंदु दिए हैं उनके उत्तर में यही कह सकता हों की १> आपको नहीं लगता की इस देश में न्याय मिलना कितना सुस्त है, मुक़दमे बाप से चल कर पोते तक….. , इस लिए कानून ही नहीं बल्कि उसे सही तरह से और तीव्र गति से .. २> सचह है की आज तो किसी को नहीं छोड़ा जा रहा है पर किसी पर विश्वास कैसे किया जाये इसका मापदंड क्या होगा? ३?फिर बात कानून की आ गयी, कानून तो संसद की द्वारा ही बनेगा और संसद में सांसद होते हैं जो कैसे होते हैं वो …… आशा है की आगे भी आप अपने विचारों से अवगत कराती रहेग्नी. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    ajaysingh के द्वारा
    August 27, 2011

    ” हाँ  कानून संसद द्वारा ही बनेगा, और संसद में सांसद होते हैं, जो कैसे होते हैं ….. ”  लेकिन ये सांसद जनता के नौकर होते हैं, इन नौकरों से कैसे काम कराना है जनता जानती है. देखिये जो लोकपाल 40 वर्षों से ये क़ाहिल नौकर नहीं बना रहे थे, उसे जनता ने उनकी औकात बताते हुए कैसे बनवा रही है और अपने मनमाफिक भी. !!!!!!अन्ना जी द्वारा किये गये संघर्ष की प्रथम सफलता पर आपको भी हर्दिक बधाई!!!!!!!

ajaysingh के द्वारा
August 26, 2011

आज भ्रष्टाचार के विरुद्ध देश की जनता ने कमर कस ली है, किन्तु कुछ अपने ही लोगों ने ये प्रश्न उठा रखा है कि हम जनता के लोगों को पहले खुद मे सुधार लाना होगा तब भ्रष्टाचार के विरुद्ध लडा जाना चाहिये. फिर पहले कौन.. ? पहले आप (स्वयं हम) या पहले आप (सरकार)…. हम मजबूर,गरीब,अधिकारविहीन (वोट को छोड कर),याचक और आप सत्ताशीन,अधिकारसम्पन्न, शक्तिशाली .हम अपनी सायकिल से किसी को टक्कर मार दें तो कितना नुकशान होगा आप कार से किसी को टक्कर मार दे तब ? स्पष्ट है कि….. जो जितना ऊँचा पद सत्ता में चाहेगा, उसे उतना ही ज्यादा उत्तरदायी होना होगा. जनता सबसे नीचे है अतः उसका उत्तरदायित्व सबसे कम है. भ्रष्टाचार की नाली ऊपर से नीचे बहती है,अतः यह ऊपर से ही नियन्त्रित होगा. आज हम ऊपर वालों कों सुधार लें कल ऊपर वाले हमको सुधार देंगें (अपनी सरकारी मशीनरी से). हम अकेले रिश्वत देते हैं वो हम जैसे कई लोगों को रिश्वत देने के लिये मजबूर करते है. हम गलत करते होंगे किन्तु गलत का विरोध कर रहे हैं, वो गलत को सिस्टम को हिस्सा बनाने पर तुले हैं. अब हमारी कमियों की ओर उँगली उठा कर हमारी आवाज को न दबायें. भ्रष्टाचार के विरुद्ध सभी बुद्धिजीवियों से यही अनुरोध है कि…..  व्यवस्था सुधार और समाज सुधार के अन्तर पर विचार करे, समाज सुधार स्वयं के सुधार से प्रारम्भ होता है किन्तु व्यवस्था सुधार नियम कानून द्वारा  ऊपर से ही सम्भव है.

    abodhbaalak के द्वारा
    August 27, 2011

    अजय जी, सबसे पहेल तो आपका धन्यवाद, की आपने बड़ी ही शालीन भाषा में मुझे अपनी बात कही, वरना अन्ना जी की विरुद्ध मंच पर लिखे और लेखकों को तो ………. आप की बात दिल को लगती है की पहले जो ऊँचे पदों पर हैं उनको भर्ष्टाचार …… , पर उसके लिए कानून बनाना होगा और कानून संसद में बनेगे और संसद में ………………., वो कैसे हैं आप भली बहती जानते है, अब अगर कानून बन भी जाये तो लागू करन आसान है? एक केस यहाँ सालों चलता है, फैसला इतनी देर में हॉट है की….. संभवतः यही कारण है की मन में शंकाएं …. आपके विचार के लिए आपका आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    ajaysingh के द्वारा
    August 27, 2011

    अबोध जी , नमस्कार, मेरी प्रतिक्रिया को महत्व देने के लिये धन्यवाद. प्रतिक्रिया तो क्रिया पर निर्भर होती है. आप किसी विचार या व्यक्ति का जितनी शालीनता के साथ विरोध करते है सामान्यत: आपको भी उसी अनुपात में ही  शालीनता  के साथ प्रतिक्रिया प्राप्त होती है.  आप की इस प्रति उत्तर को पढ़ने से तुरन्त पूर्व  मनोरंजन भाई का ब्लाग “क्या चखेंगे अन्ना का आइस्क्रीम” पढ़ा और तदानुसार प्रतिक्रिया भी दी. जी हाँ तदानुसार भाषा भी प्रयोग हुई है. उन्ही के एक और ब्लाग  “दोनों अन्ना भाई-भाई” मे भी उन्होने जैसी भाषा एवं आन्दोलनरत जनता के लिये जैसा सम्बोधन प्रयोग किया है (हाथों में तिरंगा लिए, वंदे मातरम्् गाते लोग रातों रात पैदा हो गए। ठीक वैसे ही जैसे मच्छर बारिश, गंदगी, जलजमाव होते ही भिन-भिनाने लगते हैं, पैदा ले लेते हैं। वैसे भी इन देशभक्तों को मच्छरों से सीख लेनी चाहिए।) मेरी प्रतिक्रिया भी कुछ वैसी ही है. इति.    !!!!!!अन्ना जी द्वारा किये गये संघर्ष की प्रथम सफलता पर आपको भी हर्दिक बधाई!!!!!!!     

    ajaysingh के द्वारा
    August 27, 2011

    एक बात कहना छूट गया था…    जन लोकपाल बिल मे जो सबसे अच्छी बात लगी वो ये कि ‘कौन सा का दिनों मे होना है अगर वो  उतने दिनो मे  नही हो सका तो सम्बन्धित अधिकारी दण्डित होगा” नदी पार करने के लिये नाव तो होनी चाहिये ना, लेकिन बिना चप्पू चलाये नाव क्या करेगी! भ्रष्टाचार की नदी को लांघने के लिये जनलोकपाल  नाव है किन्तु यदि कोई इसका प्रयोग ही नही करेगा (चप्पू नही चलायेगा) तो उसे इस जनलोकपाल से भी कोई लाभ नहीं होने वाला… 

    ajaysingh के द्वारा
    August 27, 2011

    ” हाँ कानून संसद द्वारा ही बनेगा, और संसद में सांसद होते हैं, जो कैसे होते हैं ….. ” लेकिन ये सांसद जनता के नौकर होते हैं, इन नौकरों से कैसे काम कराना है जनता जानती है. देखिये जो लोकपाल 40 वर्षों से ये क़ाहिल नौकर नहीं बना रहे थे, उसे जनता उनकी औक़ात बताते हुए कैसे बनवा रही है और अपने मनमाफिक भी.

    abodhbaalak के द्वारा
    August 29, 2011

    अजय जी मई विस्मित हूँ की आपने ३ अलग अलग कमेन्ट किये थे पर जब देखा तो आपने अलग अलग…. खैर, आपने कहा की प्रतिक्रीय क्रिया पर निर्भर करती है, तो अगर कोई मेरे साथ किसी तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग करे तो क्या मै भी ? आपकी बात पूरी तरह सत्य है की लोकपाल बिल के बन्न्से से भी कोई अंतर नहीं पड़ेगा अगर उसके लागु करने वाला ही ….. आपको मेरी तरफ से भी बंधाई …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    August 29, 2011

    एक बात और रह गयी थी जो आपके कमेन्ट करने के बाद ध्यान में आई, एक आशंका जो आपके साथ शेयर करना चाहूँगा, की अब ये सारा आन्दोलन जन समूह का था, अब भविष्य में भी अगर किसी भी बात को मनवाना होगा तो जनता का एक बड़ा वर्क ऐसे ही खड़ा हो जायेगा और अपनि बात जन समूह के बल पर बल पूर्वक manayega …. ये एक खतनाक बात नहीं होगी? ये मई आपसे पूछता हूँ,? आप ही बताएं . http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

raj के द्वारा
August 26, 2011

अबोध जी आपका लेख शत प्रतिशत सही व तर्कपूर्ण है व मेरे पिछले अधकचरे से लेख अन्ना बनाम प्रेमचंद का नमक का दरोगा की बानगी ही आज दिख रही है पर किसी भी बदलाव में उनके खुद के आचरण से ज्यादा वे आज किस उद्देश्य के खड़े हुए है यह महत्त्व पूर्ण हो जाता है | कई प्राचीन कथाओं में , वह चाहे राम की लंकापति रावन पर विजय किउन न हो कई ऐसे काह्रित्र सामने आये जो स्वयं चोर डकैत थे पर इस अभियान में साथ थे हाँ कथाकार यह अवश्य जाता देता की इस कार्य से उसका आगे का जीवन बदल गया विचार भिन्नता से निखारते है अतः ऐसे लेख बहुत महत्वपूर्ण हो जाते है, बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    August 27, 2011

    राज भाई, बात तो सही है की इतिहास में ऐसे महा पुरुष हुए हैं जिनका अतीत भले ही …. पर उन्होंने ऐसे कर्म की की अब वो महापुरुषों के श्रेरनी में आते हैं. पर बात वर्तमान की हो रही है. मुझे एक और भाई ने ये लिखा है की कौन कर रहा है ये मत देखो, क्या कर रहा है ये देखो, और यही पर मै आपसे अलग राय रखता हूँ, की जो कर रहा है उसको भी देखो, उसका अतीत भी देखो क्योंकि अगर उसके अतीत में कुछ ऐसा है तो फिर उसके वर्तमान में किये गए कर्म पर ….. चले, मै भी आप सब के साथ इश्वर से प्रार्थना करता हूँ की जो इस देश के भले के लिए हो, वही हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

razia mirza listenme के द्वारा
August 26, 2011

अबोधजी ! सब से पहले तो आपका धन्यवाद करना चाहुंगी की आप हंमेशां से जंकशन से जुडे हर व्यक्ति विशेष का सम्मान करते हो। आपके भेजे हुए मेल पर मेरा जवाब है पढ लेना।और आगे आजकी पोस्ट पर आपके एस वाक्य को मेर पूरा समर्थन है “अन्ना जी के समर्थन में उतरने से पहले हमें खुद को देखना होगा, की क्या हम वास्तव में उनका समर्थन कर रहे हैं या केवल उस भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं, दूसरो के देख कर, पर इसके वास्तविक अर्थ को समझे बिना.।

    abodhbaalak के द्वारा
    August 27, 2011

    शुक्रिया रज़िया जी, काफी समय से आपका कोई पोस्ट नहीं मिला था इस लिए ….. एक बार और शुक्रिया की आपने मेरे लेख को पसंद किया और इसे अपने कमेन्ट के लायक भी समझा…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

surendr shukla bhramar5 के द्वारा
August 26, 2011

प्रिय अबोध बालक जी जब मतैक्य हो अलग विचार रखे जाएँ तो ही मजा आता है आपके जो भी विचार हों हमारे जो भी हों हमारा मकसद साफ़ है जो आप ने नीचे लिखा ..ये एक सुन्दर सन्देश है और बिना इस के कोई भी पाल सफल नहीं हो सकता है लेकिन इतना तो आप को मानना चाहिए ही की जो भी हो रहा है अच्छा हो रहा है कुछ तो कहीं न कहीं होगा ही लाभ किसी को …..जो लोग साथ खड़े है सब दूध के धुले नहीं लेकिन इस कारण पर समर्थन तो दे रहे …राजनीति बहुत गन्दी भी होती है और कल ….स्पष्ट हो जाएगा सब …अब पुलिस डंडा मांगने लगी है …. जहाँ भ्रष्टाचार जीवन का क हिस्सा बन गया हो, वहां पर हर किसी को खुद के गिरेबान में झाक कर देखना होगा, दुसरे पर ऊँगली उठाते समय ये देखना होगा की हम कितने पानी में हैं. बदलाव घर से होगा, खुद से होगा………. भ्रमर ५

    abodhbaalak के द्वारा
    August 27, 2011

    भ्रमर जी धन्यवाद आपके विचार के लिए, पर आज जिस तरह का वातावरण बन रहा है की अगर आपके विचार औरो से अलग है तो आप पर ………………. चलिए, मई भी अपनी शंकाओं की पोटली को बांधकर कुछ समय के लिए रख देता हूँ और देखता की समय के गर्त में …… बदलाव होगा तो घर से होगा ये मेरे भी मानना है , पर पहल करना ही तो … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

नीरज नीखरा के द्वारा
August 26, 2011

नमस्कार अबोध जी, लेख वैचारिक है | कमी तो हर जगह, प्रत्येक व्यक्ति में होती है, लेकिन आज अन्ना हजारे का समर्थन करना ही ज्यादा उचित है भले ही कोई शंका हो क्यूंकि शंका निर्मूल भी हो सकती है लेकिन वर्तमान नहीं |

    abodhbaalak के द्वारा
    August 27, 2011

    नीरज जी सवर्प्रथम तो आपके विचार के लिए आपका आभारी हूँ, आपने इस लेख को विचार रखने के लायक तो समझा, रही बात इस विषय की, तो मई भी आपके साथ, भविष्य में छिपे इसके उत्तर की प्रतीक्षा करूंगा. इश्वर करे सब अच्चा ही हो. आगे भी आपसे अपने विचारों से अवगत करने का अनुरोध है. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

ashish singh के द्वारा
August 26, 2011

नम्स्कार अबोघ जी मै आज पहली बार आपके ब्लाग को देखा.और देखते ही ऐसा लगा कि इसे पढ़ना चाहिये. और इसे मैने पढ़ भी .मै आपकी बातो से शत प्रतिशत सहमत हूँ /

    abodhbaalak के द्वारा
    August 26, 2011

    धन्यवाद आशीष जी वैसे आप कम लोगों में से हैं जो की मेरी बैटन से सहमत है, क्योंकि आज सारा भारत अन्नामय हुआ है, ऐसे में कुछ ऐसा लिखना भी ……… आगे भी आपसे विचारों से अवगत कराने का अनुरोध है .. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

mparveen के द्वारा
August 25, 2011

अबोध जी में पिछले कुछ समय से ब्लोग्स पढ़ रही हू पर आपका ब्लॉग आज देखने का मौका मिला . आप सही कह रहे हैं की अन्ना जी की इस आंधी में सूखे और गीले सब पत्ते उड़ रहे हैं ….. अगर सब सिर्फ अपना ध्यान रखते की “मैं ” भ्रष्टाचार में लिप्त न होऊ तो आज इस आंधी की कदापि जरुरत न होती . कोण भ्रष्ट नहीं है आज ??

    abodhbaalak के द्वारा
    August 26, 2011

    आपका शुक्रिया की आपने मेरा ब्लॉग पढ़ा और उस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की. मेरे इस लेख का मकसद ही था की आज जो अन्ना जी का आन्दोलन है, उसमे बहुत सरे लोग केवल बहती गंगा में हाथ धोने के लिए …… आगे भी आपसे अपने विचार व्यक्त करने का अनुरोध है…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

komal के द्वारा
August 25, 2011

Namashkaar abodh ji aapne ek gambheer subject ko utaane ki himmat ki hai…bahut badiya

    abodhbaalak के द्वारा
    August 26, 2011

    कोमल जी, मेरा प्रयास था की इस अनोद्लन से जुड़े लोगों की सच्चाई भी लोग जाने, मेरी सोच कितनी सही है और ………….., वो तो समय ही बताएगा.. विचारों के लिए आपका आभारी हूँ. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Abdul Rashid के द्वारा
August 25, 2011

विचार का अलग होना ठीक है नहीं तो हम सावन के अंधे की तरह har चीज़ को एक सा देखेंगे जो विकासशील समाज के लिए अच्छा नहीं. http://singrauli.jagranjunction.com/ भ्रष्टाचार निवारण या दिखावा?

    abodhbaalak के द्वारा
    August 26, 2011

    शुक्रिया अब्दुल राशिद भाई आपने मेरे इस प्रयास को सराहा इस के लिए आपका आभारी हूँ. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Vinita Shukla के द्वारा
August 22, 2011

सच कहा आपने , आम आदमी के बदलने से ही असली बदलाव आएगा. शुभ विचारों से युक्त सुन्दर लेख. बधाई.

    abodhbaalak के द्वारा
    August 24, 2011

    धन्यवाद विनीता जी आपके विचार सदा मेरे उत्साह बढाते हैं. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    sumit pal के द्वारा
    August 30, 2011

    phichle 65 saalon se is desh mein yahi ho raha hai ki ab badal jayenge ab badal jayenge lekin kya ho paya hai aaj tak.65 salon mein sirf is desh ka dhan lootkar videshon mein jama kar rahein hai.kya upar se koi bhagwan aayega jo sabhi ko ek line mein lagakar badal dega. aaj agar beyeman log apne apko badalne ke liye is muhim mein saamil ho rahein to apko taklif ho rahi hai.hum 1500 saalon se videsiyon ki gulaami kar rahe hai to iska sirf ek hi karan hai ki desh hit ke mudde par bhi tumhare jaise laat lagane wale log hain is dhati par.

    abodhbaalak के द्वारा
    September 2, 2011

    सुमित जी, चलें किसी ने तो आप जैसे भाषा के साथ मुझे अपने विचार दिए, इस मंच से मुझे इतना प्यार मिला की अलग विचार रखने के बावजूद भी किसे ने मुझसे आप जैसे स्टाइल में….. एक बात याद रखें, अलग मत रखने से कोई देशद्रोही नहीं हो जाता है और न ही इसको सत्यता पर ऊँगली उठाई जाती है, आज इस मंच पर बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्होंने कहीं अन्ना जी को कांग्रेस का तो कहीं बीजेपी का एजेंट कहा है, पर इससे उनके ….. मेरी एक सोच थी, बल्कि अभी भी हैं, शंकाएं हैं जिसे मैंने मंच के अपने सभी साथियों के साथ बनता है और उन्होंने भी इन शंकायों को दूर करने के लिए अपने विचार दिए हैं, …. आशा है की आपके अच्छे कमेन्ट भी मुझे भविष्य में मिलेंगे …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

वाहिद काशीवासी के द्वारा
August 20, 2011

आपके विचार भी अपनी जगह ठीक हैं अबोध भाई परन्तु चाहे जिस भी कारण हो और जो भी लोग हों बदलाव की अलख जग चुकी है और इसे जगाये रखना ही हमारी ज़िम्मेदारी है।  धन्यवाद

    abodhbaalak के द्वारा
    August 24, 2011

    वाहिद जी आशा करता हूँ की इस पूरे आन्दोलन से कुछ अच्छा निकले. आशा को कभी छोड़ना नहीं चाहिए :)

syeds के द्वारा
August 20, 2011

आदरणीय अबोध जी, बहुत दिनों बाद मंच पर आपकी रचना देखकर ख़ुशी हुयी… दर असल आज हर आदमी भ्रस्टाचार से त्रस्त है…भले ही वोह खुद भ्रस्टाचार क्यूँ न करता हो… कांग्रेस सर्कार अब तक की सबसे भ्रस्त सर्कार है इसमें भी कोई दो राय नहीं…और इनकी विचार धरा भी बदली है….यह भ्रष्ट भी हैं और जो इनके भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठता है उसको यह कुचलने की कोशिश भी करते हैं…बाबा रामदेव के खिलाफ आज से तीन चार महीने पहले तक कोई केस नहीं था… अचानक सैकड़ों केस कहाँ से आ गए …अगर बाबा ने गलती की थी तो पहले क्यूँ नहीं….कांग्रेस सरकार अंग्रेजों की तरह व्यवहार कर रही है…. एक और चीज़ जोड़ना चाहूँगा ,किसी महापुरुष ने कहा है कि .. यह मत देखो कौन कह रहा है… यह देखो क्या कह रहा है…. अच्छे लेख के लिए बधाईयाँ…

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    सर आपके विचार सदा ही प्रोत्साहन देते हैं, क्या मैंने अपने लेख में कहीं भी इस सरकार या कांग्रेस का समर्थन किया है? मई तो आपसे सहमत हूँ की ये एक निकम्मी और भ्रष्ट सरकार है, मेरे प्रश्न इस सारे आन्दोलन से है…………………. रही बात आपके अंतिम पंक्तियों की, ये मत देखो की कौन कर …….., तो सर, मेरा मानना है की ये अवश्य देखो की कौन कर रहा है, क्योंकि अगर करने वाला विश्वसनीय नहीं है तो फिर उसके किये कर्म पर भी ………, एक बार अगर कोई झूट बोल दे, तो आगे वो कितना भी सच बोले, मन में संदेह सदा रहेगा … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Ramesh Bajpai के द्वारा
August 20, 2011

प्रिय श्री अबोध जी यह सच है की अपने अवगुणों को हम स्वयम न तो देखना चाहते है न बदलना चाहते है | पर कही कही से शुरुवात तो होनी ही चाहिए | अगर सब बदले गे तो हम भी कभी न कभी जरुर बद्लेगे | आपका लेख पढ़ कर अच्छा लगा | यह इमानदार प्रयास सराहनीय है | बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    आदरणीय रमेश जी मैने जो लिखा वो आजकी सोच से अलग है पर जो मेरे मन में शंकाएं थी, उसी सच्ची से रखा, मै केवल एक भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहता ………… आज हर तरफ जो नारे लग रहे हैं, मै उन्मसे अक्सर की असलियत जानता हूँ, खुद भ्रष्ट और …….. आभारी हूँ की आपने अपने विचार रकेह…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Santosh Kumar के द्वारा
August 19, 2011

आदरणीय अबोध बालक जी, सादर अभिवावादन मैं इस मंच पर बिलकुल नया और अनुभवहीन हूँ ,..आपकी शंकाओं पर अपने विचार रखने की आज्ञा चाहूँगा ,.. आपकी पहली बात बिलकुल सही है कि, भ्रष्ट लोग भी इस आंदोलनों में भाग ले रहे हैं…इसके कई कारण मेरी समझ में आते हैं — १- वो किसी ऐसी संस्था से जुड़े हो सकते हैं ,.जो मजबूरी में ही सही आन्दोलन को समर्थन दे रही है २-किसी परिचित के बुलावे पर भी जरूर पहुंचते होंगे ,.. चाहे तफरी करने या स्थिति का आकलन करने ३- नेता और व्यावसायिक समाजसेवी तो इस आन्दोलन से दूर रह ही नहीं सकते ( आखिर उनकी दुकानदारी का सवाल है ) ४- एक शेखचिल्ली की गप मार रहा हूँ ..” कुछ लोगों ने मेरे लेख के नायक से मुलाकात ना कर ली हो ” ५- एक महत्वपूर्ण बात मेरी समझ में और आती है ,..”भ्रष्टाचार से भ्रष्टाचारी भी पीड़ित हो सकता है ” आपकी अगली बात पर मेरा मानना है कि हम सब इस भ्रष्टाचार में कहीं न कहीं शामिल अवश्य हैं (चाहे मजबूरी हो ) ,..तो इस महामारी से छुटकारा पाने के लिए क्या ईश्वर के अवतार लेने की प्रतीक्षा करेंगे ?? …यहाँ स्मरण रखना होगा ” आरोप तो कभी न कभी ईश्वर पर भी लगे हैं ” श्री अन्ना हजारे इस महायुद्ध के नायक हैं ,.हमें उनपर पूरा भरोसा रखना चाहिए …….. उनके अपने ट्रस्ट की जांच करने के आग्रह पर सरकार ने जस्टिस सावंत से जांच कराई थी ,..बकौल जस्टिस सावंत “ट्रस्ट के कागजों में कुछ अनियमितता पाई गयी थी जिसे भ्रष्टाचार नहीं कहा जा सकता ” आपकी अगली बात से मैं पूरा सहमत हूँ ,…बदलाव खुद से ही करना होगा ,..और शायद इसके लिए आम मध्य वर्ग तैयार है ,.कुछ ही दिनों में आन्दोलन का विशाल स्वरुप धारण कर लेना इसी मानसिकता को पुष्ट करता है मेरे विचार से हमें इस आन्दोलन को पूरा समर्थन करना चाहिए ,..लेकिन आँखे ,दिल ,दिमाग सब खोल कर …अन्ना जी की टीम के बारे में भी कुछ सवाल अवश्य हैं ,..लेकिन फिलहाल जन लोकपाल बिल समय की मांग है ,..जिसके आगे बाकी सारे प्रश्न फिलहाल औचित्यहीन लगते हैं .. कहीं पढ़ा था ,..विचार के बीज से कर्म रूपी वृक्ष जन्मता है उसी से भाग्य रूपी फल मिलता है……आइये सब मिलकर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें ,.. कारवां बढ़ाते चलें जयहिंद, वन्देमातरम

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    संतोष जी सबसे पहले तो आपको साधू.. आप अगर इस कमेन्ट के बजाये इसे पोस्ट के तौर पर लिखते तो भी ……….. बहुत विस्तृत और सराहनीय, एक बात है, शायद आपने भी सुनी हो, की जब हम किसी को पसंद कर लें तो उसकी कोई बुरे हमें नज़र नहीं आती है, हर अवगुण……….. मै जो सोचता था, उसे मैंने मंच पर रखा, और इसमें किसी तरह का पाखण्ड नहीं किया, मै भीद्चाल का हिस्सा नहीं बनना चाहता इस लिए अपने विचार …. चलिए आप के साथ हम भी समय के चक्र को चलता देखते हैं और देखते हैं की क्या बदलाव होता है, और हाँ, प्रयास रहेगा की सकारात्मक सोच भी ………. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

alkargupta1 के द्वारा
August 19, 2011

अबोध जी , इस भ्रष्टाचार की दुनिया में सभी सभी भ्रष्टाचारी हैं कोई छोटा तो कोई बड़ा….लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि अगर कोई भ्रष्टाचारी भ्रष्टाचार के विरोध में खड़ा होता है तो कही न कहीं वह भी इससे मुक्ति पाना चाहता है….इसलिए जनाक्रोश की आग सर्वत्र भड़क चुकी है…..कुछ अच्छा ही होगा !

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    अलका जी क्या सच में वो भ्रष्टाचार से मुक्ति पाना चाहता है ये केवल दिखावे के लिए, पाखण्ड कहलायेगा ये, … आशा करूंगा की आपकी तरह मई भी अच्छा होगा …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rajkamal के द्वारा
August 19, 2011

आपके और मेरे विचार मिलते -जुलते है लेकिन उस लेख को काफी देर बाद पोस्ट करूँगा वैसे अगर ऐसा माहौल बन जाए की भ्रष्टाचारी भी इसकी खिलाफत का राग अलापे तो भी इसे एक सुखद मोड़ तो कहा ही जाना चाहिए ] :) :( ;) :o 8-) :|

    Santosh Kumar के द्वारा
    August 19, 2011

    आदरणीय गुरुदेव ,..सादर प्रणाम कहाँ हो आप ?? कब दर्शन मिलेंगे चेलों को ? …

    abodhbaalak के द्वारा
    August 24, 2011

    गुरु जी सबसे पहले तो नमस्कार, आपका कमेन्ट देख कर बहुत अच्छा लगा, पहले ही कहा हिया की आपके ऊपर तो पूरा अधिकार है मेरा, हक बनता है की मेरे लेख पर आपके कमेन्ट आये वैसे आप हैं कहाँ, मैंने आपको मैसेज किया था पर आपने रेपली नहीं किया, आपके मोबाइल पर, मेल का जवाब आप देते हैं नहीं. आशा है आप कुशल मंगल से होंगे अबोध

संदीप कौशिक के द्वारा
August 19, 2011

अबोध जी, बदलाव की पहली कड़ी ख़ुद को ही बनना पड़ता है…..यह बात जितनी सीधी लगती है उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है । लेकिन आशावादी होकर इस मुहिम का हिस्सा बनना ही फिलहाल सबसे अधिक फलदायी होगा । जय हिन्द !!

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    जी संदीप जी क्योंकि सब इस भीड़ का हिस्सा हैं इस लिए हमें भी ….. आशावादी होना आसान तो नहीं है और मुझ जैसा आबोद ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rahulpriyadarshi के द्वारा
August 19, 2011

हमें नयी शुरुआत कभी तो करनी होगी….अगर हम ९५ प्रतिशत भ्रष्ट हैं तो इसी स्थिति में रह जाने से भी समस्या का हल नहीं होगा,बदलाव के लिए जब तक कोई पहल ना होगी,बदलाव के बारे में सोचना भी व्यर्थ है…अगर यह बदलाव अन्ना हजारे के बहाने से ही हो,तो बुरा क्या है? वाल्मीकि जी दस्यु थे…लेकिन आगे चलकर उन्होंने रामायण की रचना की,यह हिन्दुस्तान है…युवा शक्ति को नकारात्मक नहीं होना चाहिए. यह आन्दोलन सिर्फ अन्ना हजारे का नहीं है,किरण बेदी भी इस आन्दोलन का एक चेहरा हैं.

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    राहुल जी आज केवल ३ ही नाम तो सुनाये दे रहे हैं देश में, अन्ना हजारे, केजरीवाल और किरण बेदी (क्रमशः इसी सीरिज़ में ), और है क्या इस देश में सुनने के लिए, चले, आप के साथ हम भी इस पूरे ….. का क्लाइमेक्स ………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

नंदिनी के द्वारा
August 19, 2011

अबोध जी, भ्रष्टाचार का विषय हो या महंगाई का हर कोई इससे त्रस्त है मगर आगे आके बोलना या एक जनसमोह को संबोधित करना, एकत्रित करना ये क्षमता हर किसी में नहीं होती या हर किसी कि बात सब सुनते भी नहीं है जिसके अंदर नेतृत्व क्षमता होगी उसही के पदचिन्हों में लोग चलते है | ये भेडचाल नहीं ये जनाक्रोश है जिसको कि अन्ना जी ने एकत्रित किया है और जिसका प्रदर्शन हो रहा है | जो चिंगारी हम सब के दिल में थी उसको आग का रूप देना जरुरी था | घर से बदलाव भी होगा और समाज भी बदलेगा बस कोशिश होनी चाहिए ये कोशिश ही अन्ना हजारे और उनके समर्थक कर रहे है उम्मीद है जल्द ही तस्वीर बदलेगी |

    Suraj Agrawal के द्वारा
    August 19, 2011

    बिलकूल सही कहा नंदिनी जी आपने

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    नंदिनी जी आपके विचार निश्चित तौर पर समर्थन के लायक हैं, आज भर्ष्टाचार को समाप्त कौन नहीं करना चाहता, पर समस्या ये है की जो लोग आवाज़ उठा रहे हैं उनके दामन भी ………… चले, आपके साथ मई भी उस बदलती हुई तस्वीर को देखना चाहूँगा…………

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    सूरज जी आपको भी यही कहूँगा, की समय के अनुसार सब ही ………….. पर वास्तविक वही होता है जो अपनी पहचान ………. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

nishamittal के द्वारा
August 19, 2011

अबोध जी आपकी शंकाएं निराधार भले ही न हों परन्तु कहीं पूर्वाग्रह सा दिख रहा है.भला सोचिये भला होगा.

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    आदरणीय निशा जी, संभवतः आप सही कह रही हों, की मई पूर्वाग्रह से ……………… चले आपकी आगया का पालन करने का प्रयास करता हूँ, भला सोचता हूँ देखते हैं ………. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sadhana thakur के द्वारा
August 19, 2011

अबोध जी..आपका शंकित होना निराधार नहीं हैं .मगर यह भी सच है कि अंधेरा कितना भी गहरा हो . उसे मिटाने की  शुरूवात कहीं न कही से तो करनी ही होगी ..आंधी चलने तो दीजिए जो सही होगा वो टिका रहेगा झूठ के पांव तो उखडने ही है ….वैसे मत भूलिये वालमिकी भी कभी डाकू थे ,,,,,,,,,,

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    क्या बात है साधना जी, गहरी बात है जो आपने कही………… चलें हम भी आपके साथ देखते हैं की समय की गर्त में …………. आपके विचार के लिए आपका धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

manoranjan thakur के द्वारा
August 19, 2011

बहुत दिन बाद आपको ब्लॉग पर देख कर सुखद एहसास हो रहा है बढ़िया लेखन के लिय बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    August 25, 2011

    धन्यवाद मनोरंजन जी बस आजकल काम के वयावास्ता के कारण नेट पर कम आना हो प् रहा है, आशा है की आगे समय निकल कर ……….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/


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