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हाय मैंने ये क्या कर डाला !

Posted On: 12 May, 2011 में

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अरे  नहीं -नहीं  , ऐसा  न  समझे  की  मैंने  कोई  ऐसी  हरकत  कर  डाली  जो  की  मेरे   चरित्र  पर  दाग  लगा  दे , या  मैंने  किसी  सड़क  पर  किसी  को  ……………, या  मैंने  चोरी , डाका  आदि  आदि  …., ऐसा  कुछ नहीं  है  पर  मै  अब  यही  कह  रहा  हूँ , की  हाय  मैंने  ये  क्या  कर  डाला ?

 

शाम  में  घर  लौटा  तो  बगल  के  घर  में  उठ  रहे  शोर  में  मेरा  नाम  सुनाई  दिया , दिल  एक  बार  फिर  कराह  उठा , आज  फिर  से  मेरी  सात  पुश्तों  को  गाली  मिलेगी  ( बेचारी  जिनका  अभी  कोई  अस्तित्व  ही  नहीं  है   पर  मेरे  कारण  उनको  भी  ….).

 

अब  आप  सोच  रहे  होंगे  की   मैंने  अपने  पड़ोसी  के  घर  में  क्या  कर  डाला ?  नहीं  - नहीं , मै  फिर  से  दुहरा  दूं  की  मैंने  उनकी  लड़की  को  नहीं  छेड़ा , बेटे   को  नहीं  मारा , अंकल  को  गाली  नहीं  दी , उधार  पैसा  लेकर  नहीं  लौटाया ,……………..इसके  पहले  की  आपकी  सोच  मेरे  बारे  में  और  कुछ  और  गंभीर  और  गलत  सोचे  मैं  आपको  ये  बता  दूं  की  मैंने  ऐसा  कुछ  नहीं  किया , मेरा  महा  पाप  केवल  ये  है  की  मैंने  उनकी  लड़की  के  विवाह  के  लिए  एक  लड़के  के  बारे  में  बताया  था  और  उसी  के  साथ  उसका  विवाह  हुआ  था .

 

आप  सोच  रहे  होंगे  की  ये   क्या  बात  हुई , शादी  कराने  के  लिए  मेरे  पड़ोसी  मेरी  सात  पुश्तों  को  क्यों …..? अब  क्या  कहूं  साथियों , मेरी  तो  मत  ही  मारी  गयी  थी , जो  समाज  सेवा   की  भावना  से  ओत  प्रोत  होकर  मैंने  अपने  पड़ोसी  की  सुन्दर  और  सुशील  कन्या  (?) का  विवाह , अपने  जानते  में  एक   अच्छे  लड़के  से  करा  दिया , जिस  समय  विवाह  की   बात  चीत  चल  रही   थी  मुझे  स्पेशल  ट्रीटमेंट     मिलता  थे , वो  लोग  मेरी   प्रंशसा  करते  नहीं  थकते  थे  पर  ………………………….. हाय  क्या  से  क्या  हो गया ……..

 

हुआ  कुछ  यूँ  की  शादी  के  कुछ  दिन  के  बाद , लड़के  को  पता  चला  की  लड़की  जब  खाने  में  मीठा  बनाती  है  तो  दरअसल  वो  तीखा  हो  जाता  है  और  जब  तीखा  तो  मीठा , जब  वो  मार्केटिंग  के  लिए  निकलती  है  तो  पतिदेव  की  पूरे  महीने  का  वेतन  एक  बार  में  ही , सुबह  को  सोकर  उठते  उठते  उसे  दोपहर  हो  जाती  थी  और  ना  जाने  इसी  तरह  के  कितनी  सारी  ……..……, ( ये  सारी  बातें  मुझे  उन पतिदेव से पता चली जिनके साथ उनका विवाह  हुआ था )

 

और  फिर  शादी  के  बाद  लड़की  को  पता  चला  की  लड़का  तो  महा  मूर्ख  है , माँ  के  पल्लू  से  बंधा  रहता  है , सारा  वेतन  माँ  के  हाथ  में  लाकर  देता  है  , घूमने  फिरने  के  लिए  निकलता  ही  नहीं ,  उसका  वेतन  भी  काफी  कम   है , धुम्रपान  करता  है  और  ना  जाने  क्या  क्या  कमियाँ …… ( ये सारी बातें मुझे लड़की के पिता श्री ने बड़े गुस्से से और गाली………….), कुछ  ही  महीनो  के  बाद  दोनों  में  कहा  सुनी  होने  लगी  और  लड़की  घर  आकर  अपने  पतिदेव  की  महानता  की  किस्से  सुनाने  लगी ….., और  फिर  शुरू  हुआ  मेरे  ऊपर  उनका  ढेर  सारा  प्यार ………..,  मुझसे  कहा  गया  की  तूने ( जब विवाह की बात चल रही थी तो मै आप कह के …….) किस  बात  का  बदला  मेरी बेटी से लिया , ऐसा  लड़का ,  ऐसा  घर  दिया  जिसने  की  बेटी  का  जीवन  ही नरक  ………,   धीरे  धीरे  ………………., और  अब  तो  मै  ही  नहीं  मेरी  कई  नस्लें  …………………………. बेचारी , बिना  किसी  पाप और दोष  के  …..…..

 

अब  क्या  कहें , मै  तो  केवल  यही  सोचता  रहता  हूँ , की  हे  इश्वर – हाय  मैंने  ये  क्या  कर  डाला …..…….,

 

अब तो मै आपको यही सलाह दूंगा की की  भय्या  सब  कुछ  कर  लेना  पर  रिश्ता  ……………………., कभी  नहीं .

 

*  हास्य  और  व्यंग  के  सम्राट , श्री  राजकमल  जी  और  मधु  भाभी  को  समर्पित .

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95 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Paarth Dixit के द्वारा
September 23, 2011

आदरणीय अबोध जी,बहुत ही अच्छा लेख..एक महत्वपूर्ण सलाह के साथ..ये जागरण जंक्शन में मेरा पढ़ा हुआ दूसरा सबसे रोचक व्यंग है … एक महत्वपूर्ण सलाह के लिए आपका धन्यवाद..

    abodhbaalak के द्वारा
    October 31, 2011

    पार्थ जी सॉरी के आपका उत्तर काफी दिन के बाद, …….. दर असल, मई पिछले पोस्ट को देख ही नहीं रहा था, आपके प्रोत्साहन और अड़े सुन्दर कमेन्ट के लिए बहुत आभार http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

sandeep के द्वारा
August 20, 2011

बहुत अच्छा लिखते हो आप

    abodhbaalak के द्वारा
    October 31, 2011

    धन्यावाद, संदीप जी, आभार आपका, की आपने अपने विचार …….. आगे भी अपने विचारों से अवगत कराने का औंरोध है http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

Tamanna के द्वारा
June 25, 2011

बेहद् रोचक व्यंग्य…..पढ़ कर अच्छा लगा.

    abodhbaalak के द्वारा
    June 25, 2011

    धन्यवाद, बस ऐसे ही अपने विचारों से अवगत कराती रहें …

AMIT KR GUPTA के द्वारा
June 25, 2011

कोई लिख पा रहा था .यदि समय मिलने पर पढ़ भी रहा था तो प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहा था .आपका मेल मुझे मिला था .आपका यह व्यंग वाकई काबिले तारीफ है .इसे पढ़ने के बाद मै बिना हसे नहीं रहा पाया . विचार साझा करने के उद्देश्य से मै अपना ब्लॉग add दे रहा रहा हूँ यदि फुर्सत मिले तो पढ़े और अपने शिकायतों और सुझाव से मुझे अवगत करावे. http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    June 25, 2011

    अमित जी मई खुद एक नौसिख्या लेखक हूँ, बस ऐसे ही दो चार शब्द…. कहाँ मई आपके लेख पर अपने सुझाव दे सकता हूँ, फिर भी प्रयास करोंग …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Ramesh Bajpai के द्वारा
June 25, 2011

प्रिय श्री अबोध जी अब आपकी माता जी स्वस्थ्य है ,जानकर अच्छा लगा ,| इश्वर उन्हें लम्बी उम्र दे | परदेश में आप अपना कार्य कुशलता से पूर्ण कर सफल हो कर सकुशल स्वदेश आयेगे यही दुआ है | शुभकामनाओ सहित

    abodhbaalak के द्वारा
    June 25, 2011

    सर आपका धन्यवाद, इस विषय पर एक पोस्ट आज की है…. अपने मार्गदर्शन में रखने….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Charchit Chittransh के द्वारा
June 25, 2011

अबोध जी; जय हिंद ! बहुत दिनों बाद जाज पर लौटा हूँ ! आपका व्यंग पढ़कर मजा आ गया ! यदि केवल व्यंग है तब तो ठीक है किन्तु यदि शुभ के उद्देश्य से किये किसी भी कृत्य के कृतघ्न प्रत्युत्तर से व्यथित हैं तो शायद ‘सुख के साधन ‘ पढ़कर पीड़ा घटे !

    abodhbaalak के द्वारा
    June 25, 2011

    बस चित्रांश जी कुछ अलग लिख्न्बे को दिल चाह था और ….. पर सच भी इसमें शामिल हो …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

newrajkamal के द्वारा
June 24, 2011

प्रिय अबोध भाई ….सस्नेह नमस्कार ! इस सुखद वापसी पर आपका स्वागत है अब कोई एक रचना भी हो ही जाए धन्यवाद

    abodhbaalak के द्वारा
    June 25, 2011

    राज जी आभारी हूँ, और साथ में आपके कहे अनुसार एक पोस्ट भी …. पोस्ट नहीं बल्कि अपने साथ बीती घटना ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

नीरज नीखरा के द्वारा
June 1, 2011

एकदम सही !

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    ????? क्या सही है भाई मेरे, वो भी तो कह दें मेरी सलाह या कुछ और ? http://abodhbaalak.jagranjunction.com

div81 के द्वारा
May 28, 2011

राजकमल भाई के ब्लॉग से पता चला की आप की माता जी की तबियत ठीक नहीं है | माता जी जल्द ही पूर्णतया स्वस्थ हो जाए यही कामना करती हूँ |……….. उत्तम स्वस्थ्य कि कामना के साथ……………………..

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    दिवा जी बस आप सब की दुआ ही है जो …………. माँ को परसों हॉस्पिटल से घर ले आया, और मई आज वापस ओमान….. बस आगे भी अपनी दुआओं में हमें और हमारी माता जी याद ……… आभारी हूँ और रहूगा भी … http://abodhbaalak.jagranjunction.com

संदीप कौशिक के द्वारा
May 27, 2011

स्नेही अबोध जी, राजकमल जी के ब्लॉग से आपकी माताजी की तबीयत खराब होने के बारे में पता चला | मेरी भगवान से यही दुआ है कि वो जल्द से जल्द स्वस्थ होकर आप पर पुनः अपना मातृत्व बरसाएँ !! :)  :) मंगल कामनाओं सहित संदीप कौशिक

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    धन्याद संदीप जी, आपकी दुआओं के लिए आभारी हूँ इश्वर करे की हर किसी की माँ का साया उसपर सदा … http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 27, 2011

प्रिय अबोध भाई राम राम मैं आपसे माफ़ी मांगना चाहता हूँ की बिना आप की इजाजत और इच्छा के सिर्फ अपनी मर्जी से ही मैंने आपकी माता जी के बारे में सबको बताया आपकी माता जी मेरी भी माता जी के समान ही है जहाँ पर किसी एक की प्रार्थना बहुत देर में असर लाती है उसकी बजाय अनेको की दुआ बहुत ज़ल्द रंग ले आती है और खास करके नारियों की क्योंकि उनके भाव बहुत ही गहरे हुआ करते है हम सभी यह चाहते है की आपकी माता जी अतिशीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करे और आप पर पहले की तरह से ही अपना स्नेह और प्यार बरसाए प्रभु से इसी दुआ और इसी कामना के साथ

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    राज जी आपके निचले कमेन्ट पर ही इस विषय पर लिख चूका हूँ पर फिर से एक बार कहूँगा की धन्यवाद, की आपने …. शायद परेशां मन में ये बात आई ही नहीं थी की अगर एक से अधिक लोग दुआ करें तो …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Aakash Tiwaari के द्वारा
May 27, 2011

अबोध जी , किसी की जिंदगी में माँ की क्या अहमियत होती है ये सब जानते है..माँ के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती..जैसा की आपभी बहुत अच्छे से जानते है की आज अगर मै जिन्दा हूँ तो वो अपनी माँ के कारण.. अबोध जी मै भगवान् से प्रार्थना करता हूँ की आपकी माँ जल्द से जल्द बिलकुल स्वस्थ हो जाए और अपने परिवार की फिर से देखभाल कर सके…. आकाश तिवारी

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    आकाश जी हम सब ही माँ के कर्जदार हैं और सरे जीवन …………. बस आप सब की दुआ है की वो वापस घर आ गयीं हैं भले ही पूरी तरहसे ठीक नहीं हैं पर …. आभारी हूँ आपका .. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
May 27, 2011

शुक्रिया जनाब, एक तनाव भरे माहौल में थोड़ी मुस्कराहट चेहरे पे आई आपका लेख पढके…बहुत सुंदर पोस्ट है

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    शिवेंद्र जी धन्यवाद की आपको ये रचना पसंद आई. प्रयास भी यही था की लोग मुस्करा पड़ें…. आगे भी अपने विचार से अवगत करते रहें … http://abodhbaalak.jagranjunction.com

priyasingh के द्वारा
May 27, 2011

……..राजकमल जी से पता चला की आप की माताजी की तबियत ठीक नहीं है ………..हम सबकी दुआ है की जल्द ही आपकी माँ को स्वास्थ लाभ प्राप्त हो ……….और ये कठिन समय जल्द से जल्द गुजर जाये ……….इन्ही शुभ कामनायो के साथ……………….

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    प्रिया जी आभारी हूँ आप सब का, इतने सरे लोगों की दुआ इश्वर ने सुन ली और मान घर पर वापस आ घिन हैं…. बस ऐसे ही अपने स्नेह और दुआ के बीच अहमे भी याद ……… http://abodhbaalak.jagranjunction.com

वाहिद काशीवासी के द्वारा
May 27, 2011

प्रिय अबोध/सुबोध जी, राजकमल भाई के लेख से पता चला कि आपकी माता श्री की तबियत ख़राब है| और इस कारण से आपको पुनः भारत लौटना पड़ा है| इस संकट की घड़ी में मेरी संवेदनाएं आपके साथ हैं| ईश्वर आपकी माता जी को शीघ्र स्वस्थ करे और आप पुनः हँसते खिलखिलाते अपने कार्य पर लौट आयें अपने अबोध स्वरुप में| आमीन..

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    वाहिद भाई सच में, दिल से आप सब का आभारी हूँ, वरना माँ तो जा ही चुकी थी, डॉक्टर ने कह दिया था की केवल चाँद घंटे ……. पर डॉक्टर भगवन थोड़े न है, और ये सब ……….. अब माँ वापस घर प् हैं, पूरी तरह से ठीक भले न हो पर हैं तो …. उनका साया तो है हमारे सर पर …. आज ही वापस ओमान आया हूँ और आप सब के प्यार और दुआ के लिए ……….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

दीपक पाण्डेय के द्वारा
May 27, 2011

अबोध जी, आपकी माता जी के स्वास्थ्य के बारे में सुन कर दुःख हुआ. इश्वर से प्रार्थना करता हु की वो उन्हें जल्द ही सामान्य करे.

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    आप सब का आभारी हूँ, दुआ ऊपर वाला जरूर सुनता है…. और अगर इतने लोग मिल का करें तो …. धन्यवाद … http://abodhbaalak.jagranjunction.com

surendra shukl Bhramar5 के द्वारा
May 27, 2011

आदरणीय अबोध बालक जी नमस्कार – माँ की तवियत ख़राब होने को सुन हम सब का मन दुःख से भर गया -हम प्रभु से प्रार्थना करते हैं की माँ जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ करें- और माँ अपने लाडलों को शीघ्र अपना प्यार दुलार और आशीष बख्श सकें – मदर दे पर कहे गए आप के शब्द मेरे कानों में बसे हुए हैं -मै मदर डे को नहीं मानता लेकिन भगवन के बाद कोई नाम है तो वो माँ का है -इस विचार से हम आप के दर्द को समझ सकते हैं – आप के शुभ समाचार ले लौट आने की प्रतीक्षा में हम सब – शुक्ल भ्रमर ५

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    दुआ में बड़ी शक्ति है अगर दिल से की जाए, माता जी वापस घर पर आ गयीं हैं और मई वापस ओमान… आप सब की प्रार्थनाओं के लिए आभारी हैं… http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    surendr shukl bhramar5 के द्वारा
    June 24, 2011

    ईश्वर ने हम सब की प्रार्थनाओं को स्वीकार किया -माँ की ख़ुशी में ही बच्चों की ख़ुशी है – कुशल समाचार सुन हर्ष हुआ – शुक्ल भ्रमर ५

Tufail A. Siddequi के द्वारा
May 25, 2011

भाई साहब अभिवादन, चुपके-२ आप इतने बड़े-२ काम रहे है,……………. अभी पता चला …………. बधाई………… http://siddequi.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    साब जी, बड़े काम? खुदा न करे की आपको भी इस तरह के बड़े काम का ऐसा फल मिले …. :) कमेन्ट के लिए आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com

baijnathpandey के द्वारा
May 24, 2011

आदरणीय श्री अबोध जी सादर अभिवादन अब कैसा महसूस हो रहा है …… आपने मंच पर पड़े हुए इतने सारे कुवारों को ठेंगा दिखाकर किसी और की शादी कराई तो ऐसा तो होना ही था | आखिर हमारी दुआ नहीं तो बद्दुआ तो जरूर काम करती है | आगे से कभी ऐसी सुन्दर लड़की नजर आये तो मंच की सेवा कीजियेगा, तेज मत बनिएगा | -एक कंवारा, दिल का मारा |

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    बैजनाथ जी अपनी पसंद बता दें , एक बार फिर से गाली खाने से दर लगता है ….. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Vivekinay के द्वारा
May 21, 2011

Great Lesson u give us Sir through this nice article

नवीन के द्वारा
May 20, 2011

हाय आपने ये क्‍या कर डाला कि पड्रोसी भी खफा हो गए ये आपने ही नही उन सब से भी कर डाला जिसने किसी का रिश्‍ता कराया  मैं भी ऐसा ही समझता हुं कि जिसने मेरा रिश्‍ता कराया उसने ये क्‍या कर डाला  जो मेरे जैसे का रिश्‍ता किसी खाती पीती मोटी —– से करा दिया वो राजकुमारी थी उसका फटीचर से करा डाला 

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    :) सुन्दर ढंग से आपने अपने विचार इस विषय पर रखे हैं. आगे भी अपने विचारों से अवगत करते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com

narayani के द्वारा
May 19, 2011

नमस्कार अबोध जी बहुत अच्छा लिखा आपने ,ये तो आपने सच ही बयाँ किया है . तय की हुई शादी में रिश्ता बताने वाला ज्यादा ,जिम्मेदार मान लिया जाता है जबकि दो परिवारों का आपसी तालमेल होना यां होना बनते बिगड़ते रिश्तो में ज्यादा अहम भूमिका रखता है बहुत अच्छा विषय सामने लाये आप . धन्यवाद नारायणी

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    आपका आभारी हूँ की आपको ये लेख पसंद आया …. बस प्रयास रहता है की कुछ……… आगे भी अपने विचार से अवगत कराती रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com

priyasingh के द्वारा
May 18, 2011

आज इतने दिनों बाद आपकी इस रचना पर नज़र पड़ी ………..बहुत खूब लिखा है आपने ………..

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 16, 2011

प्रिय अबोध भाई …… नमस्कार ! अगर ऐसी ही फोकट वाली सेवा करनी है तो इससे तो यही अच्छा रहेगा की आप मेरी शादी कहीं पर किसी से भी करवा दीजिए ….. सुइट तो नहीं लेकिन सूट और अंगूठी का वादा जरूर करता हूँ …. और आपने फोन नम्बर की बात कही है क्या पता आपके पास मेरा नम्बर पहले से ही हो लेकिन आप उसको सामने देख कर भी समझ ना पा रहे हो …. चलो ठीक ही है क्योंकि मैं किसी से भी बात करने की सिथति में नही हूँ ….. :) :( ;) :o 8-) :|

    abodhbaalak के द्वारा
    June 23, 2011

    राज जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद की आपने मेरी माता जी के स्वस्थ्य के लिए ….. केवल 8 घंटे के शोर्ट नोटिस पर इंडिया जाना पड़ा था, इस लिए कुछ लिखने और कहने का … अब माँ घर पर और मई वापस ओमान ……… एक बार फिर से आपका धन्यवाद

razia mirza listenme के द्वारा
May 15, 2011

ये अबोध्बालक (शिष्य ) और राजकमलजी(गुरु) की कहानीयां बड़ी मजेदार बनाती जा रही हैं| एक दिन इनका टिकेट ब्लेक में भी नहीं मिलेगा देखना | अबोधजी सुन्दर विवरण |

    abodhbaalak के द्वारा
    May 16, 2011

    रज़िया जी गुरु जी तो गुरु जी हैं, इस अबोध की क्या बिसात? बस आप लोगों का स्नेह है जी इस स्तर की रचनाएं आप पढ़ कर प्रोत्साहन दे देती हैं, वर्ना ………. ऐसे भी आजकल ब्लैक में टिकेट लाइन की ज़रुरत ही नहीं पड़ती किसी को, हाल ही खाली रहता है :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 15, 2011

priy abodh ji …..ssneh namaskaar ! hmaare yahan to riwaj hai ki rishta karwaane wale ko कम से कम एक जोड़ा सूट और सोने की अंगूठी जरूर दी जाति है आशा है की आपको भी यह गिफ्ट मिले होंगे अब अगर बाद में कुछ बोनस भी मिल रहा है तो उसको स्वीकार करने में इतनी आनकानी क्यों ?

    abodhbaalak के द्वारा
    May 16, 2011

    राज जी कसम ले लीजिये, जो कुछ भी मिला हो, ………….. हाँ बोनस की बात तो अलगे है, साल में एक बार के बजाये ……………… :( http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

preetimishra के द्वारा
May 14, 2011

अबोधजी, आपने हँसते-हँसाते समाज की इस बुराई पर बङी कुशलता से प्रकाश डाला है. इस नेकी के बदले हमेशा बुराई ही मिलती है.

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    प्रीती जी, बस एक छोटा स पर्यास थ कि हास्य पर भि लिखा जाये, अगर आप्को अच्चा लग तो प्र्यास ………….., आप्के विचार के लियए आप्का आभारि हू

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 14, 2011

प्रिय अबोध भाई ….सस्नेह आदाब अर्ज है ! भई साहिब चाहे दुनिया भर के बिचोलियो को अपनी नेक और कीमती सलाह दे डालोलेकिन भगवान के लिए मेरा रिश्ता करवाने जा रहे बिचोलिये से दूर ही रहना :) :( ;) :o 8-) :|

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    राज जी आप ये क्या कह रहे है?अरे मधु भाभी को पता चल ग्या कि आप तीसरी कि तय्यारी कर रहे है तो ………… तनिक अपने घर का फोन नम्बर तो …………….. :)

Mala Srivastava के द्वारा
May 14, 2011

सर, लेख बहुत मज़ेदार लगा , हमारे साथ ऐसा कुछ हुआ तो नही क्योकि हमने हमेशा से ही सतर्कता दिखाई है हमने किसी की शादी-ब्याह तो नही करवाई पर हाँ अगर हमें किसी को किसी के so called would be के बारे में अपनी राय अच्छी न होने पर बहुत शब्दों को हेर-फेर से अपने दोस्तों को सतर्क करना पड़ता है क्योकि जब कोई किसी के प्यार में पड़ता है तो पूरो तरीके से समर्पित हो जाता है ! अगर हम blunt हो जायेंगे तो हमें पता है ऐसी ही इज्ज़त से हम भी नवाजे जा सकते है !

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    माला जी , आप्का धन्यावाद कि आप्ने इस रच्ना को प्र्तिक्रिया के लायक सम्झा, आगे भी आप्से आप्के विचारो से अव्गत कराते रह्ने क अनुरोध है

    Mala Srivastava के द्वारा
    May 16, 2011

    :)  yup definitely

Alka Gupta के द्वारा
May 13, 2011

अबोध जी , क्या सुन्दर व्यंग्य लिखा है….भलाई करते करते कभी-कभी बुराई भी मिल जाती है बहुत ही अच्छा लगा आपका यह हास्य व्यंग्य पढ़ कर अछि रचना के लिए बधाई !

    abodhbaalak के द्वारा
    May 14, 2011

    आदरणीय अलका जी बस पहला प्रयास था, अगर आप को अच्छा लगा तो लगता है की संभवतः ज्यादा ख़राब नहीं लिखा गया है, फिर भी अगर …………………., तो क्षमा कर दीजियेगा. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

syeds के द्वारा
May 13, 2011

अबोध जी, गंभीर के महारथियों में तो आप हैं ही,आज आपने बेहद खूबसूरत हास्य लेख से भी हम सब को अवगत कराया …बधाई… वैसे कहीं सचमुच में पडोसी की कन्या तो नहीं…और फिर साडी चीज़ों पर पर्दा डालने के लिए….

    abodhbaalak के द्वारा
    May 14, 2011

    सय्यद जी कहाँ आप इस बालक को …………………. मै और महारथी, …………………, नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है भाई, कोई पडोसी ……………, बस सब ………. आपके प्रोत्साहन के लिए आपका धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 12, 2011

प्रिय अबोध जी ….सस्नेह नमस्कार ! आपसे हफ्तावसूली पाकर मन को एक अजीब सा सकून मिलता है …… इस रहस्यमयी रचना ने यह साबित कर दिया है की आप में अनेको संभावनाए छुपी हुई है ,जिनको की बाहर आने का बेसब्री से इंतज़ार है ….. वैसे मैं आपकी जानकारी के लिए एक बात बताना चाहता हूँ की मेरी पहली बीवी का नाम रचना था .. चूँकि इस मंच पर एक रचना नाम की ब्लागर आदरणीय रचना जी भी है तो उनके और सीमा जी के सम्मिलित प्रयासों और विशेष आग्रह पर बेचारी रचना को असमय काल का ग्रास बनना पड़ा …. और मेरी शादी रचना की छोटी बहन मधु से हो गई ….. वैसे इस मंच पर उन दोनों ही बहनों संग बारी -२ से मैंने हनीमून भी सेलिब्रेट किया है औए सबके साथ उनकी यादों को साँझा भी किया है ….. बाकि सब तो इतिहास की बाते है ……. आपकी अंत में में तौबा करते हुए सभी को फ्री में दी गई नेक सलाह देख कर बहुत ही बुरा लगा …. सभी आपकी सलाह पर अम्ल करने लगे फिर तो हो गई हमारी असल में शादी ? :) :( ;) :o 8-) :|

    abodhbaalak के द्वारा
    May 14, 2011

    राजकमल जी बड़ा डरते डरते इस रचना को ……………….., वैसे पता नहीं लोग इसे क्यों आप और मधु भाभी …, मैंने इसे केवल आप और उन्हें समर्पित किया था, आप पर आधारित नहीं था ये लेख… आपकी दोनों ही शादी के ऊपर लिखा लेख पढ़ा है और दोनों हो ……………. भय्या मै तो केवल अपनी बात कह रहा हूँ की ऐसा करा कर जो हाथ आया वो ……….., अब अगर इसके बाद भी लोग समाज सेवा करें तो ……………….., वैसे भी आजकल लोग किसी की सलाह कहाँ मानते हैं, तो मेरी भी …………… :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

वाहिद काशीवासी के द्वारा
May 12, 2011

कभी कभी किसी की भलाई सोच कर कोई काम करो तो…. इसलिए कहा भी गया है कि नेकी कर दरिया में डाल.. हैं ना अबोध भाई..

    abodhbaalak के द्वारा
    May 14, 2011

    \वाहिद जी हम तो भला ही ………………… पर अब बुरा हो गया था गली खाने का ……………. वैसे भी अब दरिया बड़ा प्रदूषित हो गया है, उसमे और क्या क्या डालें :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Aakash Tiwaari के द्वारा
May 12, 2011

श्री अबोध जी, कहीं वो जोड़ा श्री राजकमल जी और….मधु भाभी तो नहीं…हा.हा..हा.राजकमल जी घर से बाहर तो जाते ही नही होंगे दिनभर कम्प्यूटर और…….. चलिए आपकी बातों को अगर गम्भीरता से देखें तो ये सच है आजके वक्त में रिश्ता तय करवाना दुश्मनी मोल लेने के बराबर है..भाई शादी के बाद कहा विवाद नहीं होते लेकिन फसता तो बिचौलिया ही है….हा..हा..हा…… आकाश तिवारी

    abodhbaalak के द्वारा
    May 14, 2011

    भय्या काहे मरवाने पर तुले हो? अपने ही गुरु जी के बारे में मै ऐसा …………. आज के युग में रिश्ता करवाना एक दुधारी तलवार है, अगर सुखी रहा तो कोई बात नहीं पर अगर ………………….., आपके कमेंट्स के लिए आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Nikhil के द्वारा
May 12, 2011

सुन्दर व्यंग्य अबोध जी. आपकी ज्ञान-वर्धक बातें बड़ी मनमोहक होती हैं.

    abodhbaalak के द्वारा
    May 14, 2011

    बस निखिल जी पहला प्रयास था, वैसे इसमें भी कोई ज्ञान की बात थी ……………? अब तो मुझे खुद ही अपना लेख फिर से पढना पड़ेगा ………. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

roshni के द्वारा
May 12, 2011

अबोध जी आप तो सचमुच ही अबोध बन गए … नेकी करने चले थे और ……… खेर ऐसा होता दुनिया में अच्छे कम का नतीजा हमेशा अच्छा नहीं होता …….खैर ये श्लोक तो अब आपको नित्य ही सुनने पड़ेगे …. वास्विक और हास्य से भरे व्यंग के लिए बधाई आभार सहित

    abodhbaalak के द्वारा
    May 14, 2011

    Roshni ji log is liye ab achchhe kaam karte hi nahi, aur is tarah ki kaam, jahan aisa risk :) pahli baar haasy (iske pahle ek parody try ki thi) likha hai agar kuchh jyada hi ……. vichar aur protsaahan ke liye aabhaari hoon http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    zwarsi के द्वारा
    October 31, 2011

    bhot badhiya abodhbalak gi pura luft mila apka lekh padh ke.apke andar ek lekhak chupa h.mujhe apse bhot expirence lena jo ki aap ke blog ko padh ke le sakta hu.

manoranjan thakur के द्वारा
May 12, 2011

श्री अबोध भाई एक बार फिर से माफ़ी के साथ हाजिर हुं ये कमाल की रचना कहां छुपा कर रखे थे बहुत ही सुंदर रचना के लिए बहुत बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    मनोरन्जन जी, कमाल कि तो नहि है, बस पह्ली बार हास्य लिखने क प्र्यास किया है, अगर आप्को अच्छ लगा तो मेह्नत ………………., आप्से आगे भि मार्ग्दर्शन का अनुरोध है

Chandan Kumar के द्वारा
May 12, 2011

अबोध जी नमस्कार, कहां फंस गए भैया? आगे कुआं, पीछे खाई. लड़का-लड़की दोनों पक्ष खोज रहे थे आपको. हमने बता दिया कि आप तो कलकत्ते गए हो, मिश्रा जी की बेटी का रिश्ता ढूंढने. इस पे वो लोग औ आग-बबूला हो गए. कहने लगे मिश्रा जी तो गईन.  बता रहा हूं, कुछ दिन उधरे बिताय दीजिए. तब तक मैं देखता हूं, क्या कर सकता हूं.  अरे हां याद आया, सोनू हलवाई भी अपने बेटी के शादी के लिए आपके बारे में पूछ रहा था. बता दूं क्या? चंदन कुमार (रंगा सियार)  http://chandankumar.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    Chandan ji kya karen? ab to ………….. bhayya ab kya aap meri 14 pushton ko bhi gaali khilana chahte hain jo aur …….. aapki pritikriya bhi apne aap me ek haasy lekh hai…………, jisse aapki ………. aage bhi apne vichar se awgat karaate rahe, aabhari rahoonga…

ashvinikumar के द्वारा
May 12, 2011

अबोध जी सच में आपने यह क्या कर डाला राजकमल भी को बेपर्दा कर डाला थोड़ा धीरे से बोलते ,,वो तो आशिक मिजाज हैं यूँ भी ,,पर ये अबोधी अदा भी है नई नई ,,……………….मुबारकां राजकमल भाई ,,,,,,, ,,भाई मुझे यूँ मंच पर (खीस निपोरना) नही आता मंच पर ,,लेकिन आपको पढ़ कर नही नही आपके लेख को पढ़ कर मन प्रसन्न हो गया ……..जय भारत

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

     अश्व्विनि जी, मैने क्या किया? मै तो ठह्रा अबोध्, बस थोडा ….., रहि बात राज जी कि, तो मैने ये लेख उन्को और मधु भाभी को समर्पित किया है, उन पर लिख नही नहि, क्रिपा कर के राज जि को मेर विरुध न भड्कायेन नहि तो मेरी ऐसी कि तैसी हो के रह जायेगी…., :) आप्की प्र्तिक्रिया पा कर स्दा हि बहुत अच्चा लगता है, आगे भि ….

nishamittal के द्वारा
May 12, 2011

ये काम ऐसा ही है,अब अबोध जी,पहले पाँचों अंगुलियाँ घी में होती हैं और फिर…………………

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    आदरणीय निशा जी, ऐसा सदा तो नही होता पर अक्सर ….., पर अगर भलाइ का काम नहि करेन्गे तो दरिया मे डालेन्गे कैसे ? आप्के विचार के लिये आप्का आभारी हू http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

संदीप कौशिक के द्वारा
May 12, 2011

परम स्नेही अबोध भाई, ये क्या कर दिया आपने !! आपने तो ख़ुद ही अपना पैर कलमाड़ी माफ कीजिएगा मेरा मतलब कुल्हाड़ी पर मार लिया | आजकल कमोबेश या तो कोई नेकी करता ही नहीं है और अगर भुला-चूका कोई कर भी दे तो दरिया उसे लेने से इंकार……!! हाँ….एक बात जो आपने आलेख के अंत में इतनी चतुराई से अंजाम तक पहुचाई है, उसके लिए आदरणीय राजकमल जी से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वो आपका अपराध-बोध कुछ हद तक हल्का करने में आपकी मदद करें || साभार !! http://sandeepkaushik.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    Sandeep Ji bas maine jo kia, uska nateeja to bhugat hi raha hoon, aur kahta phir raha hoon ki haai maine ………………. ab to dariya bhi nahi rah gaye hain, gande naale me badalte ja rahe hain, is liye aur bhi koi neki nahi karta ki agar kar dia to daalenge kahan? rahi baat Raj ji ki, to aasha hai ki wo aapke is anurodh par avashya vichar karenge ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

ashok srivastava के द्वारा
May 12, 2011

बहुत सही कहा रिश्ते कराने वालों के जख्म हमेशा हैं रिसते।

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    अशोक जी आपसे थोडा असहमत हूँ, हमेशा तो नहीं पर ………………. आपके विचार के लिए आपका आभारी हूँ, आगे भी मार्गदर्शन करते रहें … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Abdul Rashid के द्वारा
May 12, 2011

रिश्ता जोड़ना गलत नहीं. रिश्ता निभाना मुश्किल है.आपने पड़ोसी धर्म निभाया अब आपको गाली मिल रही है. एक सलाह रिश्क लेने के लिए पड़ोसी अच्छा विकल्प है पर ध्यान रहे आपका पड़ोसी लेख पढ़कर उन्मादित हो सकता है अच्छा लगा

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    अब्दुल राशिद जी, आपकी सलाह को मानने का प्रयास ही नहीं बल्कि १०० परसेंट उस पर अमल किया जायेगा भविष्य में भय्या, अब कौन और ……………. आपके प्रोत्साहन के लिए आपका आभारी हूँ, http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

div81 के द्वारा
May 12, 2011

अबोध जी, आप ने जो स्पेशल तड़का राजकमल भाई और मधु भाभी के लिए तैयार किया है सच में मजेदार है | पहले तो मुझे भी लगा कहीं आप ने सच में कोई ………………….फिर आगे तो सब ……………. सच ही कहा आप ने ये नेकी तो ………….. :) बधाई

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    May 13, 2011

    दिव्या बहन …नमस्कार ! बहुत अच्छे आसल में अबोध जी को उन्ही की खास भाषा में जवाब मिलना तो सिर्फ आप ही से संभव हो सका है …. बधाई व् आभार (इया नई लिपि के विकास और विस्तार के लिए आप बधाई की पात्र है )

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    दिवा जी, पहले तो लगता है की मै अपने इस लिखने के अंदाज़ का कापी राईट करा लूं ताकि कोई दूसरा……………….. इसका प्रयोग न कर सके. :) रही बात इस लेख की, तो सच में ये आँखों देखि ही है …………., आप बीती नहीं… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    राज जी, सच्ची में कापी राईट …………….., पर समस्या ये है की पता ही नहीं की ये होती कैसे है? :) खैर चलें कोई बात नहीं, भले ही मै इस लिपि का विकासक और विस्तारक न हूँ पर ……… :) :)

surendrashuklabhramar5 के द्वारा
May 12, 2011

प्रिय अबोध जी तो आप भी हमारे राज भाई की तरह सफल व्यंगकार कैसे बने सिखाने लगे – अरे गाली ही तो मिल रही न लेकिन इतनी कुवारी कन्या जो बैठी रह जाती हैं उनको किसी खूंटे से बाँध आने का पुन्य तो मिलेगा न -नहीं तो आज कल के ज़माने में अगुवा बन ने का काम ही सब छोड़ देंगे तो क्या होगा -कुछ का तो बेडा पार होने दीजिये न ! सच है बहुधा ये होता है -ताली तो दोनों हाथ से ही बजती है न अब लड़के और लड़की दोनों ही इतने गुणी निकले तो फिर तो राम ही मालिक ….और सर फूटे अगुवा का .. राज भाई के साथ मधु भाभी से परिचय करने के लिए धन्यवाद

    abodhbaalak के द्वारा
    May 15, 2011

    भ्रमर भाई, राज जी तो मेरे मुंह बोले गुरु जी है, मै कहाँ और वो कहाँ…..? मै तो केवल लिखने का प्रयास करता रहता हूँ, की किसी तरह कुछ लिख डाला जाये, पर उसका स्तर कैसा होता है वो मुझे अच्छी तरह पता होता है….. रही बात, भय्या इस तरह के रिश्ते लगाने में सच में बड़ा खतरा है, मै ने इस लेख को किसी को देख कर ही लिखा है और विश्वास करें, जिसने ऐसा किया था वो सच में कहता रहता था की हाय मैंने ….. आपके प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ, क्योंकि विद्वान् लोग ………… :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/


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