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आपका सच्चा मित्र

Posted On: 22 Jan, 2011 Others में

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“है  बहुत  भीड़ , मगर  फिर  भी  अकेला  हूँ  मै

ऐ  मेरे  दोस्त , नहीं  तू  तो  ये  एहसास  सा  है “!

 

आपने  वो  कहानी  तो  बचपन  में  ज़ुर  सुनी  होगी , के  दो   दोस्त  जंगल  में  जा  रहे  थे , तभी  रास्ते  में  उन्हें  एक  भालू  दिखाई  दिया , उसे  देख  दोनों  दर  कर  भागने  लगे  और  भालू  से डर कर एक पेड़  ……. ….

 

मै  उस  कहानी   को  आपके  सामने  दुहराना  तो  नहीं  चाहता  पर  इस  कहानी  ने  हम  सब  को  सच्ची  मित्रता  की  एक  पहचान  बताई  थी  की  सच्चा  मित्र  वही  होता  है  जो  की  बुरे  समय  में  आपका  साथ  दे .

 

आज  हमारे  पास  न  जाने  कितने  लोग  हैं  जो   की  हमारी  मित्रता  का  दम   भरते  हैं  पर  क्या  वो  सच  में  हमारे  मित्र  होते  हैं ? मित्रता  मौके  और  समय  के  अनुसार  नहीं  होती  वरण  ये  एक  बहुत  ज़िम्मेदारी  का  रिश्ता  है .  आज  दोस्ती  एक  दुर्लभ  वास्तु  हो  के  रह  गयी  है  और  इसके  बहुत  सारे  कारण  हैं .

 

किसी  विद्वान्  ने  कहा  है  की  समर्धि   मित्र   बनाती  है  और   कठिनाई  उसकी  असल  पहचान  बताती  हैं , जैसा  की  रहीम  ने  भी  बरसो पहले लिखा  है  के:  

“ रहिमन  विपदा  हो  भली  पर  जो  थोड़े  दिन  होए

हित , अनहित  जगत  में , जान  पडत  सब  कोई ”

 

 इसी  लिए  हमें  अपने  मित्रो  को  बहुत  समझ  बूझ  कर  चुनना  चाहिए . वैसे  भी  कहावत  है  की  अगर  किसी  का  चरित्र  जानना  है  तो  उसके  मित्र  को  देखो. 

 

यहाँ  पर  एक  बात  और  कहना  चाहूँगा  की  अगर  आप  चाहते  हैं  की  आपके  मित्र , सच्चे  और  भरोसे  के  हो , तो  आपको  स्वयं  भी  उनका , वैसा  ही  मित्र  बनना  पड़ेगा . चार्ल्स  कोल्टन  का  कथन  है  की  अगर  आपका  कोई  मित्र  मुसीबत  में  हो  तो  उससे  ये  न  पूछो  की  मै  तुम्हारे  लिए  क्या  कर  सकता  हूँ  बल्कि  स्वयं  ही  उसका  हल  ……

 

जीवन  में  अगर   किसी  को  एक  भी  सच्चा  दोस्त  मिल  जाये  तो  वो  बहुत  भाग्यशाली  होता  है , इस  लिए  अगर  आपके  पास  ऐसा  दोस्त  हैं  तो  उसे  खोएं  नहीं ,

 

एक  अच्छे  दोस्त  में  कुछ  विशेषताएं  जो  होनी  चाहिए  वो  ये  हैं :

  1. जो  आपके  हर  भले  और  बुरे  समय  में  आपका  साथ दे .
  2. जो  केवल  अपनी  न  कहे  बल्कि  आपकी  भी  सुने
  3. जो  अगर  आपके  साथ   भलाई  करे  तो  उसे  जताए  नहीं
  4. 4.       जिसके  साथ  आप  अपने  दुःख  बांटे  और  खुशियाँ  दुगनी  कर  सकें
  5. जिसकी  सलाह  आप  किसी  भी   समय , किसी  भी  विषय  पर  मांग  सकें
  6. जो  आपके  गलतियों  को  सब  के  सामने  नहीं  बल्कि  केवल  आपके  सामने  रखे
  7. जो  सच  को  सच  और  झूट  को  झूट  कहे  और  आपकी  चापलूसी  न  करे .
  8. जो  विपत्ति  में  आपका  मित्र  नहीं  बल्कि  भाई  बन  जाए,

 

आशा  है  की  आपके  जीवन  में  सच्चे  मित्र  अवश्य  होंगे . अगर  नहीं  हैं तो  मै  हूँ  न …..…

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64 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rathore के द्वारा
May 3, 2015

very very goooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooddddddddddddddddddddddddddd………………………..,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

aaryan shikarwar.N के द्वारा
July 12, 2012

its truth and not to do i think that i can become a truthful friend of my friends……….!!!!

santosh के द्वारा
March 28, 2012

mitrata ek aisi soch hai jisame tamam prakar ke Age sochunga tab likhunga itana padkar jabab do

sg22 के द्वारा
August 26, 2011

अबोधजी, इतनी ख्याति प्राप्त होने पर भी आपको अभिमान नहीं ,आपने मुझ नाचीज को सराहा .ये मेरे लिए गौरव की बात है.बहुत अच लिखते हैं आपका आभार.

    abodhbaalak के द्वारा
    August 26, 2011

    सुशीला जी, कैसी ख्याति? मै तो एक विद्यार्थी की तरह से अपनी बात रखने का प्रयास करता हूँ, बिना किसी लाग लपेट के. और दुसरे मै तो अबोध हूँ, अबोध को अभिमान :) आपके कमेन्ट के लिए आपका आभारी हों, आशा है की आप आगे भी अपने विचारों से इस अबोध को अवगत कराती रहेंगी. jagranjunction

baijnathpandey के द्वारा
February 5, 2011

निज दुःख गिरि सम रज करि जाना मित्रक दुःख रज मेरु समाना – तुलसीदास सच्चे मित्र की सच्ची परिभाषा दी है ………बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    February 6, 2011

    पाण्डेय जी प्रयास किया है, अगर आपको अच्छा लगा तो समझूंगा की प्रयास ….. ऐसे ही अपने विचारों से अवगत करते रहें, आभारी रहूँगा… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

razia mirza के द्वारा
January 30, 2011

इस velentine डे पर आप का लेख कामयाब रहेगा| बहोत सही लेख|

    abodhbaalak के द्वारा
    January 31, 2011

    रज़िया जी अच्छा लगा आपका कमेन्ट पढ़ कर, पर ये नहीं समझा की आप मेरे इस लेख पर शुभकामनाएं दे रही हैं या …. रही बात खास कर के वैलेंटाइन डे पर लिखने की तो मै तो अभी अबोध हूँ, मै क्या जानू की ये … :) मंच पर आपकी रेगुलर उपस्थिति का इंतज़ार रहेगा

    razia mirza के द्वारा
    January 31, 2011

    अबोध्जी बेशक आपको शुभकामनाएं ही दे रही हूँ |शुक्रिया मेरी उपस्थिति का आदर करने के लिए| आपकी हर पोस्ट लाजवाब रहती है|

    abodhbaalak के द्वारा
    February 1, 2011

    रज़िया जी शुक्रगुजार हूँ आपका, जो मेरे पोस्ट को पढ़ती हैं बल्कि ये कहूं की आप उसे पढने के लायक भी समझती हैं…. वैसे मै वैलेंटाइन जैसे विषय पर अपने आपको लिखने के काबिल नहीं पाता, देखते हैं, शायद ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 2, 2011

    नादानी में जो करामात है वो सयानेपन में कहाँ.. आप अबोध बन कर ही न जाने क्या-क्या कह और कर जाते हैं| दोस्ती को परिभाषित करते इस लेख के लिए बधाई,

    abodhbaalak के द्वारा
    February 2, 2011

    द्विवेदी जी संभवतः अरस्तु ने कहा था न, मैंने जब बहुत कुछ जान लिया तो ये जाना की मैंने कुछ नहीं जाना….. बस महोदय, सीखने का प्रयास करता रहता हूँ, आपने समय निकल कर पढ़ा और उस पर अपने विचार दिए उसके लिए आपका आभारी हूँ, आशा है की आगे भी आप रेगुलरली अपने विचार ऐसे ही ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

NIKHIL PANDEY के द्वारा
January 26, 2011

अबोध बालक जी मित्रता पर एक संजीद लेख है .. पढ़कर अपने पुराने मित्रो की याद आ गई .. जो काफी दूर दूर अपने जीवन के शंघर्शो में व्यस्त है .. मगर हम आज भी जब मिलते है तो वही खुबसूरत सा एहसास होता है …… क्या खूब रिश्ता है मित्रता का… मै बहुत खुशनसीब हु की जीवन में मुझे बहुत बेहतरीन दोस्त मिले.. बढ़िया लेख है

    abodhbaalak के द्वारा
    January 27, 2011

    Nikhil ji aap sach me lucky hain agar aako sachche dost mile, kyonki aajke yug me, ye len den ki vastu…. protsaahan ke liye aapka abhari hoon aise hi … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

abodhbaalak के द्वारा
January 26, 2011

राजेंद्र जी आपको लेख अच्छा लगा इसके लिए आपका धन्यवाद, दोस्त अब कहाँ मिलते हैं, बहतु ही भाग्यशाली है वो जिसे …. आप भी कृपा कर के इस अबोध का मार्गदर्शन करते रहें… आभारी रहूँगा http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

January 25, 2011

अबोध जी नमस्कार, एक अच्छे दोस्त की जो विशेषताएं आपने बताई हैं उन पर सभी (ब्लाग्गर्स को भी) को मनन करना चाहिए, क्योंकि मैंने इस बात को महसूस किया है की बहुत से लोग खुले दिल से दोस्ती नहीं निभा पाते और बहुत जल्दी बुरा मान जाते हैं. ख़ास कर ७वी विशेषता महत्त्वपूर्ण है, खासकर प्रतिक्रिया देने के मामले में……..’जो सच को सच और झूट को झूट कहे और आपकी चापलूसी न करे’…….कृपया यूं ही सन्देश फैलाते रहें. धन्यवाद.

Amit Dehati के द्वारा
January 25, 2011

अवोध जी नमस्कार ! आपसे यही उम्मीद थी ……… बहुत सुन्दर …जानकारी दो लाइन आपके लिए —– फूलों सा खिला खुशियों से भरा , सुख शांति का अम्बार रहे . गम पास न हो सुख की आस न हो , अधरों पे ख़ुशी का सार रहे …… ऐसा ही मन कुछ कहता है , तेरा खुशनुमा संसार रहे ………. कृपया मुझे visit करके अपना विचार व्यक्त करे ! http://amitdehati.jagranjunction.com जय हिंद जय भारत ! धन्यवाद !

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2011

    अमित जी आपके दो लाइन के लिए आपका आभारी हूँ जो की वास्तव में बहुत सुन्दर हैं… आपने आपने आपने सुन्दर मन से जो लिखा है वो भी बहुत सुन्दर है.. आपके किसी लेख को मैंने कभी मिस किया है जो इस बार…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rashid के द्वारा
January 25, 2011

अबोध भाई,, सच्चा दोस्त मिलना ऊपर वाले का वरदान है, परन्तु कभी कभी कुछ मजबुरिया भी होती है और हम सच्चे दोस्त को छोड़ देते है या छोड़ना पड़ जाता है ! मेरे अनुभव इस मामले में अच्छा नहीं रहा है बस ‘अबतक तो जो भी दोस्त मिले बेवफा मिले’ राशिद

    abodhbaalak के द्वारा
    January 25, 2011

    राशिद भाई दुआ है की आपको अब ऐसे दोस्त मिले जो की बेवफा न हो, दोस्त वैसे भी अब एक रेअर कमोडिटी हो के रह गएँ है, और दोस्ती लें दें अपर डिपेंड होने लगी है… विचारों के लिए आपका आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

abodhbaalak के द्वारा
January 24, 2011

दीपक जी बस थोडा समय का फेरा है, कभी कभी … आप बहुत भाग्यशाली हैं अगर आप के पास एक से अधिक मित्र हैं’ अहो भाग्य हमारे जो आप ने हमें…. आभारी हूँ

deepak pandey के द्वारा
January 24, 2011

अबोध जी वक लम्बे अन्तराल के बाद पकी पोस्ट मिली उसके लिए धन्यवाद्. मित्रता के बारे में ख्याल लगभग आपके ख्याल से मिलते है . मुझे अपने दोस्तों पे गर्व है और इसके लिए मैं इश्वर को धन्यवाद देता हु और साथ ही आपको मित्रता का आमंत्रण देता हु.

naturecure के द्वारा
January 23, 2011

आदरणीय,अबोध जी सादर प्रणाम! धीरज धर्म मित्र और नारी ,आपति काल परखिये चारी | सच्ची मित्रता परखने के जो टिप्स आपने दिए हैं , उसके लिए आभार! डॉ.कैलाश द्विवेदी

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2011

    कैलाश जी आपने तो ऊपर लिखी पंक्ति से ही ….. वास्तव में आपत्ति में ये चार ही पहचाने जाते हैं आपके विचार के लिए आपका आभारी हूँ, आगे भी.. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rajni thakur के द्वारा
January 23, 2011

अच्छे दोस्त तो बन जाते हैं मगर उन विशेषताओं का मिलना मुश्किल है, जो आपने बताया है.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2011

    रजनी जी मैंने अपने लेख में लिखा ही है की सच्चे दोस्त, विरले ही मिलते हैं… अगर मिल जाये तो हम भाग्यशाली हैं, सो इश्वर से प्रार्थना है की हम सब को …. आपके कमेन्ट के लिए आपका धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

R K KHURANA के द्वारा
January 23, 2011

प्रिय अबोध जी, मित्तरता के बारे में आपका ख्याल नेक है ! सच्चा मित्र मिलना मुश्किल है परन्तु असंभव नहीं ! अगर मिल जाय तो रिश्तेदारों से अच्छा होता है ! खुराना

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2011

    आदरणीय खुराना जी आपने सत्य कहा है की अगर सच्चे दोस्त मिल जाएँ तो वो ….. आपके विचारों के लिए धन्यवाद आप जैसे महानुभावों के कमेन्ट मिलते हैं तो …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rajkamal के द्वारा
January 23, 2011

प्रिय अबोध जी … नमस्कार ! यह जान कर असीम खुशी हुई की आप भी मेरे मित्र हो सकते है ….. 9.असली दोस्त वोही जो ना केवल एक बार उधार दे बल्कि बार -२ उधार दे ….. 10.अपनी रकम को वोह एक बार देकर हमेशा के लिए भूल जाए …. अगर आप में यह सब खासियते है तों आपका हमारे गिरोह में स्वागत है ….. धन्यवाद

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    ठीक है राज जी, सोच रहा हूँ की किसी को मै भी दोस्त बना लूं और उससे वही करूं जो …. वैसे आपके गिरोह में और कौन कौन ….? आपके चटपटे कमेन्ट के लिए आपको धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
    January 23, 2011

    अबोध बालक जी ! आपने सत्य कहा की कथित मित्र तो बहुत हो सकते हैं, लेकिन मित्र आज दुर्लभ हैं, और उन्हें खोने से बचना चाहिए ————————————————————- और राजकमल जी :) अगर आप मुझसे नियम ९, १०मानने को ना कहें, और आप इन्ही नियमों के अनुपालन का वचन दें तो आप भी मुझसे मित्रता के आवेदन की अहर्ता ( Eligibility ) रखते हैं, गिरोह की सदस्यता हेतु आपके आवेदन पर विचार किया जाएगा :)

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2011

    शैलेश जी मैंने राज जी से पूछा है की उनकी मण्डली में कौन कौन है, जान लूं तो फिर और बाकी रूल जान लेने के बाद …. आपके विचारों के लिए आपका धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Syeds के द्वारा
    January 24, 2011

    राजकमल जी, मुझे भी गिरोह में शामिल कर लीजिये… और उधार देना भी शुरू कर दीजिये….:)

    abodhbaalak के द्वारा
    January 24, 2011

    राज जी संख्या बढ़ रही है आपके क्लब के मेम्बरशिप की, क्या बोलते हैं…. फीस लगा दें क्या? :)

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 2, 2011

    भ्राता श्री, मैं भी आपके ही गिरोह का एक अदना सा गुर्गा हूँ…. :-D

    abodhbaalak के द्वारा
    February 2, 2011

    राज जी, आपके क्लब की मेम्बरशिप के लिए एक और ऐप्लिकाशन …… फी बता दीजिये द्विवेदी जी को भी ज़रा …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

आर.एन. शाही के द्वारा
January 23, 2011

‘अकेले हैं तो क्या ग़म है, जो चाहें तो हमारे वश में क्या नहीं- बस एक ज़रा, साथ हो तेरा’ । सचमुच अबोध जी, आप जैसे मित्र कम ही होते हैं । मैं आपका तलबगार हूं । जै-जै राम जी की ।

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    Aadarneey Shahi ji Aho bhagy हमारे जिसे आप जैसे विद्वान् का sath mile aur jo hame apna mitr ….. jeevan safal ho jayega hamara to…. bas kripa drishti banaye rakhen, upkar hoga is abodh par. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

nishamittal के द्वारा
January 22, 2011

अबोध जी,आज स्वार्थ के चरम पर अवस्थित युग में सच्चा मित्र जो दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है मिलना दुर्लभ है फिर भी यदि आपके द्वारा निर्धारित मानकों पर खरा उतरने वाला मिल जाए तो सौभाग्य.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    Aadarneey Nisha ji aapne satya kaha hai ki sachche dost milna ab …. Upar वाले से प्रार्थना है की हम सब ko jeevan me kam से ek ek sachcha mitr to mil hi jaye taki हम bhi …. vicharon ek liye abhaari hoon http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Alka Gupta के द्वारा
January 22, 2011

अबोध जी , आज के समय में जब सच्चे मित्र की पहचान ही बहुत ही मुश्किल है आपका यह लेख बहुत ही उपयोगी व महत्त्वपूर्ण है…..बहुत ही अच्छी पोस्ट !

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    Pata nahi Alka ji, ke ye achchhe mitr ki pahchan batane me kahan tak …. bas ek prayaas tha, aapko achchha aur upyogi laga to mai samjhoonga ki praytn safal hua. protsaahan ke liye dhanyavaad http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

ashutoshda के द्वारा
January 22, 2011

अबोध जी नमस्कार अबोध जी एक सच्चा मित्र आपके भीतर ही बैठा है जो आपको सही गलत की पहचान कराता रहता है पर हम उसकी बात मानते कहाँ है आशुतोष दा

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    Ashutosh da shayad aap sahi kah rahe hain par ham to waise bhi kahan apne bheetar …… sachche mitr ki viralta को देख कर ही किसी ने कहा hai ki manushuya ka sachcha mitr keval pustaken ही hain…. vicharon ke liye dhanyvaad http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

sdvajpayee के द्वारा
January 22, 2011

भाई अबोध जी,   मित्रता का आधार स्‍नेह-समनता होती है। इस क्रम में रामायण की बहुश्रुत चौपाई प्रासंगिक है-  धीरज  धर्म मित्र अरु नारी , आपति काल परखियहिं चारी। भगवान राम ने वानर राज सुग्रीव को मित्रता के अनिवार्य सूत्र5तत्‍व बताये हैं। यथा- देत लेत मन संक न करई, बल अनुमान सदा हित करई। जे न मित्र न दुख होहिं दुखारी,तिनहि बिलोकत पातक भारी। मित्रता-धर्म के बारे में ये प्रसंग पढने लायक है।

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    Bajpei ji, aapne mere lekh ka mahtv badha diya keval ise padh kar aur is par kament kar ke, aap jaise vidvan lekhak agar ….. aapka aabhari hoon aur asha और अनुरोध करता हूँ की आगे भी aap apne vicharon se awgat karate rahen http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Syeds के द्वारा
January 22, 2011

अबोध जी , बहुत ही खूबसूरत लेख.बेशक दोस्त आदमी की जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है…अगर दोस्त बुरा हो तो कई बार आप उसकी वजह से मुसीबत/गुनाहों में पढ़ सकते हैं…और अच्छा दोस्त आपको नेक काम करने और बुरे काम से बचने के लिए प्रेरित करता है और मुसीबत के वक़्त में मदद भी करता है….आज के ज़माने में अच्छे दोस्त मुश्किल से मिलते हैं… http://syeds.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    sayyad ji, sach kaha hai aapne aur isi liye, maine kaha hai ki dost ko chunav bahut samajh boojh kar karna chahiye…. aapke kaments sada meri himmat badhate hain, aise hi aage bhi… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Tufail A. Siddequi के द्वारा
January 22, 2011

सुन्दर पोस्ट पर बधाई.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    शुक्रिया तुफैल साब, की आपको मेरा लेख पसंद आया, आशा करता हूँ की आगे भी …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

roshni के द्वारा
January 22, 2011

अबोध जी , सच्चा दोस्त बहुत सुंदर शब्द है और जिस के पास ये है वह सबसे ज्यदा खुशनसीब है मगर अक्सर दोस्त ही दुश्मन बन जाते है……… और जो सचे दोस्त होते भी है दुनिया की भीड़ में खो जाते है ………. लेकिन फिर भी आशा है की सबको कम से कम एक दोस्त तो सच्चा मिले

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    रौशनी जी, सच्चा दोस्त वास्तव में मिलना अब बहुत मुश्किल है, दोस्ती अब एक बिजनेस के तरह से हो के रह गयी है जहाँ लें दें के भावना…. और सही भी कहा है आपने की दोस्त ही जब दुश्मन बनता है तो … इश्वर से प्रार्थना है की हम सब को कम से कम एक तो सच्चा दोस्त मिले, विचारों के लिए धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

rita singh 'sarjana' के द्वारा
January 22, 2011

अबोध जी , मैं उन भाग्यशालियों में से हूँ जो मेरे पास सच्चा मित्र हैं l मेरे सुख के घडी ही नहीं मेरे दुखों के घडी वगैर स्वार्थ से मेरी सेवा की l हमारी दोस्ती में न तो धर्म ,न जात -पात या फिर धनि-गरीब आड़े आये हैं l जो मेरे परिवार मेरी बहन से बढकर हैं l सुन्दर लेख के लिए बधाई l

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    सच में आप भाग्यशाली हैं रीता जी, क्योंकि संसार में अब ऐसे लोग …. दोस्ती में धर्म, जात, आदि वैसे भी कोई महत्व नहीं रखती, असल तो दिल …. आपके प्रोत्साहन और विचार के लिए धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

allrounder के द्वारा
January 22, 2011

अबोध जी, बहुत – ही खुशकिस्मत है वो लोग जिन्हें आज के जमाने मैं सच्चा मित्र नसीब हो जाए ! मित्रता की गहराई पर प्रकाश डालते एक अच्छे लेख पर बधाई !

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    धन्यवाद सुपर स्टार जी, अगर आप सच में कह रहे हैं की अच्छा लेख है तो मै …… बस प्रयास है की कुछ लिखा जाये जो की पठनीय हो.. प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Deepak Sahu के द्वारा
January 22, 2011

अबोध जी! बहुत ही सुंदर विचार प्रस्तुत किए है आपने!! धन्यवाद! मेरे ब्लॉग “स्वर्णिम भारत का अंधकारमय भविष्य!!” मे आपके विचार के लिए आपका हार्दिक स्वागत है! http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/ दीपक

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    दीपक जी आपके प्रोत्स्साहन के लिए धन्यवाद, मई अवश्य कुछ समय के बात, जितने भी ब्लॉग मेरे से मिस हो गए हैं पर कमेन्ट करूंगा, वैसे भी आप एक निपुण लेखक है, जो लिखेंगे वो ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Nettie के द्वारा
    October 4, 2011

    Wow, your post makes mine look fbelee. More power to you!

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 22, 2011

मित्र अबोध जी…….. यूं तो कई मित्र है ……… जो इन  सभी लक्षणो से सुसज्जित हैं………. फिर भी आपकी मित्रता भी हमें यूं ही प्रिय है………. क्योकि मित्रता मे शर्त नहीं होती………. तो हमें आपके नाम ओर सूरत से कोई फर्क नहीं ……….. आपकी भावनाएं हमारे लिए अमूल्य हैं……… अच्छे लेख के लिए बधाई……..

    abodhbaalak के द्वारा
    January 23, 2011

    धन्यवाद पियूष जी मई इसे अपना अहो भाग्य समझूंगा अगर आप हमें अपना मित्र समझे, आप जैसे विद्वान का मित्र होना तो ….. मैंने कहा भी है अपने लेख में, की व्यक्ति का चरित्र उसके मित्रो के द्वारा ही जाना जाताहै, प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद, आजकल थोडा समय का तोड़ है इस लिए मंच पर कम ही आना हो रहा है … आशा है की आप सब भूल नहीं ….

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    भाई अबोध जी…….. क्यों विद्वानो से झगड़ा मोल ले रहे हो….. ये शब्द यूं बर्बाद करने के लिए नहीं है…… किसी के विद्वान होने का पता यूं नहीं लग पता……… ये शब्द की गहराई को समझो ………. बाकी आप को हम दिल से मित्र समझते है……… कभी भी जरूरत हो तो जरूर आज़माकर देखें…. पर केवल परखने के लिए नहीं….. क्योंकि …….. परखना मत परखने मे कोई अपना नहीं रहता…..

    abodhbaalak के द्वारा
    January 27, 2011

    Bhayya, vidvano ke liye bhi ye garv ki baat hogi…., aur vidvan wo hota hai jo ki jhagdo me ….. mai aapki baton se poori tarah se sahmat hoon ki mitrta parakhne ki vastu nahi hai… wo to svyam … jagjit singh ke fan lag rahe hain, unki ek gazal ki panktiya kuchh aise hi hain :) aap jaise mitr ko pa kar dhanya hoon. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/


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