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बेरोज़गारी की समस्या

पोस्टेड ओन: 1 Jan, 2011 जनरल डब्बा में

सर्वप्रथम  तो  आप  सब  को  नए  साल  की  शुभ कामनाएं !

 

सोचा  इस  वर्ष  का  सबसे  पहला  ब्लॉग  किस  विषय  पर  लिखा  जाये ,  कविता /ग़ज़ल   लिखा  जाए  पर  जब  अपनी  सीमित  क्षमता  को  देखा  तो  कहा  की  भय्या ….. जाने  ही  दो .

 

सड़क  से  गुज़र  रहा  था  तो  एक  युवक  को  देखा  जो  काफी  परेशां  लग  रहा  था , सर्दी  में  भी  माथे  पे  पसीना , बस  ऐसे  ही  प्रश्न  कर  बैठा – की  क्या  हुआ  भाई , बड़े  परेशां  लग  रहे  हो ? युवक  जैसे  पहले  से  ही  भरा  हुआ  बैठा  था , गुस्से  में  बोला -तुमसे  मतलब ? मैंने  कहा  भाई  मै  तो  तुम्हे  परेशां  देख  कर  ऐसे  ही  पूछ  बैठा . मै  तो  आपको  जानता  भी  नहीं  हूँ , केवल  इंसानियत  के  नाते  ….. इस  बार  वो  एक  पल  शांत  रहा  और फिर  बोला , माफ़ी   चाहता  हूँ , मै  किसी  और  बात  का  गुस्सा  आप  पर  उतार  रहा  था , एक  बार  मै  फिर  अपनी  इंसानियत  के  चलते  (?) उस से पूछ  बैठा – भाई  क्या  हुआ , अगर  बुरा  ना  मनो  तो  कह  दो .

 

उसने  एक  लम्बी  सांस  भरी  और  कहा , मै  MA हूँ  और  काम  दूंध  रहा  हूँ , अभी  एक  जगह  interview दे  कर  आ  रहा  हूँ , पर  लगता  नहीं  की  ……..

 

उसके  बाद  मै  काफी  देर  तक  उससे  बातें  करता  रहा  और  उसकी  हिम्मत  बढाता  रहा ……..

 

यहाँ  पर  मुझे  एक  विषय  भी  मिल  गया – बेरोज़गारी

 

आप  सभी  इस  शब्द  को  भली  भांति  जानते  हैं  की  इसका  मतलब  होता  है  –लोगों  के  पास  हाथ  तो  हैं  पर  काम  नहीं  , योग्यता  तो  है  पर  नौकरी  नहीं  या  उनकी  योग्यता  के  अनुरूप  नहीं .

 

दिन  बा  दिन  ये  समस्या  बढती  जा  रही  है, और  हर  रोज़  हजारों  युवक  और  युवतियां  नौकरी  की  तलाश  में  भटक  रहे  हैं , आंकड़ो  की  माने  तो  २०३०  तक  हमारे  देश  में  बेरोजगारों  का  प्रतिशत  30% तक  पहुँच  जायेगा . कुछ  समय  पहले  एक  सुर्वे  के  मुताबिक  भारत  में  70% लोग  रोजाना  100 रूपये  से  कम  में  गुज़र  बसर  करते  हैं .

 

अगर  देखा  जाये  तो  बेरोज़गारी  के  मुख्यतः  जो  कारण  समझ  में  आते  हैं  वो  हैं :

  1. हमारी  बढती  जनसँख्या
  2. अच्छी  शिक्षा  का  अभाव
  3. शिक्षा  का  प्रक्टिकल  ना  होना
  4. कृषि  में  नयी  तकनीक  का  अभाव
  5. सरकारों  द्वारा  इसके  लिए  कोई  दृढ  नीति  का  अभाव

 

 आज  हमारी  श्रम  शक्ति  हर  वर्ष  2.5 की  औसत  से  और  रोज़गार  2.3 की  औसत  से  बढ़  रहे  है , इस  कारण  भी  ये  गैप  बढ़ता  जा  रहा  है . हमारे  देश  में  60% जानता  स्वरोजगार  से  जुडी  हैं , और  अक्सर  काफी  बुरी  स्थिथि  में  हैं . इसमें  से  काफी  लोगों  को  कभी  काम  मिलता  है  तो  कभी  नहीं .

 

आज  आवश्यकता  है  की  इस  समस्या  को  दूर  करने  के   लिए  सुनियोजित  और  दृढ  कदम  उठायें  जाएँ  , इसके  लिए  जो  कुछ  बातें , जो  मुझे  लगती  है  की  काफी  बदलाव  ला  सकती  हैं  वो  ये  हैं

 

  1. हमें  अपनी  शिक्षा  को  आजके  बाज़ार  के  हिसाब  से  फिर  से  बदलना  होगा  ताकि  आजके  युवक  और  युवतियां   जब  पढ़  कर  स्कूल  / कालेज /यूनिवर्सिटी   से  बहार  निकले   तो  केवल  सर्टिफिकेट  नहीं  बल्कि  नौकरी  भी  ले  के  निकलें
  2. हर  बच्चे  को  केवल  नाम   के  लिए  शिक्षा  ना  मिले  बल्कि  अच्छी  शिक्षा  मिले
  3. कृषि  में  बदलाव  की  आवश्कता  है , साल  में  2 ya 3 फसल   वाली  पैदावार  के  द्वारा  किसों  को  अधिक  लाभ  मिले , उन्हें  बिचौलियों  के  जाल  से  बचाया  जाये , जो  खुद  तो  मोटा  मुनाफा  पते  हैं  लेकिन  किसानो  को  लाभ  नहीं  मिलता
  4. गाँव  में   भी  रोज़गार  के  साधन  उपलब्ध  कराये  जाएँ , लघु  उद्योग  को विकसित  और  प्रोत्साहन  दिया  जाये
  5. सरकारों  को  गरीबी  हटाओ  केवल  नारों  तक  ही  नहीं  बल्कि  प्रैक्टिकल  में  भी  करना  होगा , ताकि  गरीब  नहीं  बल्कि  गरीबी  हटे . आज  सर्कार  की  ओर  से  बेरोज़गारी -भूख  आदि  को  मिटने  के  लिए  25 योजनाये  चल  रही  हैं  पर  उनका  नतीजा  देखने  को  नहीं  मिल  रहा  है .
  6.  रोज़गार  योग्यता  के  हिसाब  से  मिले  ना  की  भाई  भतीजावाद , सिफारिश  या  रिश्वत  के  द्वारा .

 

इश्वर  से  प्रार्थना  है  की  इस  नए  साल  में , कोई  भी  युवक  / युवती  बेरोजगार  ना  रहे , कोई  भी  पेट  भूखा  ना  रहे , कोई  भी  लड़की   सड़क  पर  ….. , कोई  भी  समाज  केवल  प्रेम  करने  पर , कोई  भी  बच्ची  अपनी  माँ  के  पेट  में ………………………….

 

और  भी  बहुत  सारे  कोई  भी  ———– कोई  भी  ……..….………

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Soumi के द्वारा
June 8, 2011

Good writing!!!!!!!!!!! keep it up!!!!!!!!!!

rajni thakur के द्वारा
January 6, 2011

Balak ji The fruits of his dream,he who wants to reap Must stride an extra mile &depart to fathom deep. Best Wishes for a Happy ,Healthy & Prosperous New Year.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 7, 2011

    Rajni ji even if, one stride for an extra mile or put up extra effort, there will be people who, were beaten by this guy, you want to say that they do not have right to get what they want, what about them? it is the job of our government to provide livelihood to everybody and it is also our duty to put effort to perform better… thanks for your opinion. A very happy new year to you and your near n dear ones. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

Rashid के द्वारा
January 4, 2011

अबोध भाई ,, बेरोज़गारी की समस्या को मंच पर उठाने के लिए धन्यवाद ! देश आज़ाद हुआ था तो सोचा गया था की अब समस्याओ को निदान होगा लेकिन हुआ इसके उलट.. समस्याए दिन बा दिन बढती गयी बेरोज़गारी भी उसमे प्रमुख है !! आज आप जितने भी काबिल हों बग़ैर किसी सिफारिश या रिश्वत के नौकरी मिलना लगभग ना मुमकिन है , दूसरी तरफ आप यह भी देखेंगे की MA / BA पास युवक एक ढंग की application तक नहीं लिख पाते है और ना इस उनका आचरण वैसे होता है जैसे एक पढ़े लिखे जागरूक व्यक्ति का होना चाहिए कुल मिलाकर हर तरफ बस कमिया ही ज्यादा नज़र आती है चाहे सरकारी स्तर पर देखे या सामाजिक स्तर पर ,, ना तो शिक्षक वैसे रहे और ना ही छात्र . बल्कि ज़्यादातर शिक्षक छात्रो से डरते ही नज़र आते है और अपनी इज्ज़त बचाने की खातिर खामोश रहना ज्यादा बेहतर समझते है ! बहरहाल मेरा मानना है की व्यक्ति , समाज को पहले आत्म मंथन करना चाहिए और इमानदारी से सोचना चाहिए की हम कहाँ जा रहे है ,, जिस समाज और देश का प्रतिनिधित्व करने वाले घोटालो / भ्रष्टाचार / सांप्रदायिक विभाजन / समाज में साम्प्रदायिकता के ज़हर बोने / छेत्रवाद फैलाने आदि जैसे आरोपों में घिरे हो और हम उनको वोट देकर चुनते हों सिर्फ इस लिए की वह मेरे धर्म के है या जाति के है या छेत्र के है या हमको फायेदा पंहुचा सकते हैं तो वह समाज और देश कहाँ जाएगा इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है !! राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    January 4, 2011

    राशिद भाई आपने तो मेरे लेख को एक नया ही आयाम दे दिया, एक नया रंग मिल गया की बेरोज़गारी के लिए केवल नौकरी का न होना ही नहीं बल्कि ……. आप जो लिखते हैं वो पठनीय होता है, चाहे आप किसी पर कमेन्ट करें तो भी वो उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना की आपके लेख आपके प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Aakash Tiwaari के द्वारा
January 3, 2011

अबोध जी, इससे अच्छा नया साल पर और क्या पोस्ट हो ही सकता था..बहुत ही तथ्य परख लेख…. आप हंसते रहे मुस्कुराते रहे, नया साल का हर दिन आपका जगमगाता रहे, खुशियाँ मिले इतनी की आप गिन न सको, दुनिया में आपके ही चर्चे होते रहे… नववर्ष की आपको तथा आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाये.. http//:aakashtiwaary.jagranjunction.com आकाश तिवारी

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    January 3, 2011
    abodhbaalak के द्वारा
    January 4, 2011

    आकाश जी मुझे तो अपने लेख से अच्छी आपकी शुभकामनाएं लगी, आपके प्रेम, और प्रोत्साहन के लिए कोटि कोटि धन्यवाद, ऐसे ही अपने प्रेम को बनाए रखे, यही अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    January 4, 2011

    आकाश जी आप काफी प्रसिद्ध ब्लोगर हैं, अगर स्पेलिंग गलत भी होगी तो भी …… उत्तर आप तक पहुँच ही जायेगा. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Dharmesh Tiwari के द्वारा
January 3, 2011

अबोध जी नमस्ते,नए वर्ष २०११ की आपको व आपके परिवार को ढेरों शुभकामनायें,धन्यवाद!

    abodhbaalak के द्वारा
    January 3, 2011

    धर्मेश जी आपको भी नए वर्ष की सपरिवार ढेरो शुभकामनाये लेख के बारे में विचार तो आपने दिया ही नहीं?

Alka Gupta के द्वारा
January 2, 2011

श्री अबोधजी , बेरोजगारी वर्तमान समाज की गंभीर समस्या है न जाने कितने ही शिक्षित युवकों को इसका सामना करना पड़ रहा है…..बहुत अच्छे सुझाव देती हुई अच्छी पोस्ट है | नव वर्ष २०११ की सपरिवार आपको मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं यह वर्ष समृद्धिमय व मंगलमय हो !

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    Dhanyavaad Alka ji, aapke protsaahan ke liye, Manch par aapki kami bahut mahsoos ki ja rahi thi. aapko bhi naye varsh ki, saparivaar dhero shubhkaamnaayen http://abodhbaalak.jagranjunction.com

January 2, 2011

अबोध जी बेरोजगारी की समस्या और इसके निदान के सुझावों पर आपका विश्लेषण बहुत अच्छा है. और किसने कहा कि आपकी क्षमता सीमित है? अगर कोई ऐसा कहता है तो तुरंत अपना हथियार निकल लें….आप समझ ही गए होंगे, मैं क्या कह रहा हूँ… आपको व आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    Rajendra ji bas prayas kia hai ki sarthak विषयों पर भी कुछ लिखा जा sake, kahan tak safal hua ye nahi jaanta. rahi baat seemit kshmta ki to syam apne se achcha mujhe aur kaun janega? rahi baat aapne jo hathiyaar nikalne ki kahi hai to Sach kah rahoon, मेरी समझ में तो नहीं आया ki kaun sa hathiyaar? kripa kar ke samjha den, abhaari rahoonga. waise aapke protsaahan ke liye bahut bahut bahut dhanyavaad. sath में nav varsh ki dhero shubhkaamnaayen http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Syeds के द्वारा
January 2, 2011

अबोध जी, सुन्दर लेख, बेशक बेरोज़गारी की समस्या बहुत जटिल है, और न सिर्फ सरकार को बल्कि हमें अपनी तरफ से इसके लिए गंभीरता से उपाय सोचने होंगे… http://syeds.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    sayyad ji rona to yahi hai ki ham jaante hain ki ye samsya vikat hai, aur is par lagaam lagane ki zaroorat hai lekin phir bhi isko rokne ka jitna prayaas hona chahiye nahi ho raha hai jinko is bare me sochna hai unko bhrashtachaar,loot khasot, aur aapas me ladne se hi fursat nahi hai. protsaahan aur vicharon ke liye dhanyavad

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 1, 2011

मित्र अबोध जी…. सुंदर प्रस्तुति…….. बधाई……… आपको व आपके पूरे परिवार को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें……………. नववर्ष आपके लिए मंगलमय हो…

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    Piyush ji aap to prerna hai ham jaise lekhak ki, protsaahan ke liye bahut bahut dhanyvaad aapko bhi nav varsh ki dheron dheron bandhaaiyan

allrounder के द्वारा
January 1, 2011

अबोध भाई एक अच्छे लेख के लिए बधाई, और नववर्ष के लिए शुभकामनाये !

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    Sachin ji jab aap jaise lekhak प्रशंसा करें तो लगता है की …… protsaahan ke liye dhanyvaad, aur aapko bhi nav varsh mangalmay ho

rajkamal के द्वारा
January 1, 2011

कोई भी ब्लोगर बिना मेहनताने के ना रहे …. प्रिय अबोध जी …सस्नेह नमस्कार आपको परिवार सहित नए वर्ष की शुभकामनाये

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    aapne तो दिल की बात कह दी है raj ji par जैसा की पहले कहा था, अगर वो ही हमसे …… पहले bhi aapko nav varsh mangalmay ho ka mail bhej chuka hoon ek bar phir se ….. naye varsh की dheroooooooooooooooon shubhakaamnaayen

HIMANSHU BHATT के द्वारा
January 1, 2011

अबोध जी …. नव वर्ष की शुभकामनायें….. सुंदर सामजिक एवं सामयिक लेख…… यह समस्या बेहद गंभीर है…..जिस पर समय रहते ध्यान देना अनिवार्य है….

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    bilkul harsih ji Ye samasya vaastav me bahut गंभीर है और इस पर जितना dhyan dene ki aavashyakta है utna dia ja nahi raha है. aage chal kar ispar niyantra bahut hi kathin ho jayega. आपको भी नव वर्ष की dheron shubhkaanaayen

Ramesh bajpai के द्वारा
January 1, 2011

अबोध जी नव वर्ष मंगल मय हो | सामयिक पोस्ट की बधाई

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    बाजपेई जी आपको भी आपके परिवार के साथ, नव वर्ष के बंधाइयां आशा है की इस वर्ष में आप को ढेरों खुशिया मिले. विचारोने के लिए धन्यवाद, मार्गदर्शन करते रहें यही अनुरोध है

ashvinikumar के द्वारा
January 1, 2011

प्रिय मित्र प्रथम तो नव वर्ष की शुभकामना ,,अच्छे एवं समसामयिक लेख के लिए धन्यवाद …जय भारत

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    अश्विनी जी आपको भी नए वर्ष के बहुत बहुत शुभकामनाएं. प्रोस्त्साहन और विचारों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

roshni के द्वारा
January 1, 2011

अबोध जी आशा है की नए साल में ये समस्या कुछ तो काम हो ……… आपके ऊपर दिए गए उपाए भी अच्छे है .. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    रौशनी जी आपको भी सपरिवार नए वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं, ये समस्या विकराल रूप लेती जा रही है और अगर इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो पता नहीं आगे चल कर क्या होगा? आपके प्रोत्साहन और विचारों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

Deepak Sahu के द्वारा
January 1, 2011

अबोध जी यह जन जन की समस्या है, पढ़े-लिखे युवकों एवं युवतीओं की समस्या है और इसका सबसे बड़ा जिम्मेदार हमारी शिक्षा प्रणाली एवं बढती जनसँख्या है! आज ये हालत है तो पता नहीं आगे क्या होगा? अच्छा लिखा अपने, धन्यवाद दीपक http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/

    abodhbaalak के द्वारा
    January 2, 2011

    दीपक जी वास्तविकत तो याहि है कि अगर इस्पर अगर कोइ ठोस कदम न लिया गया तो स्थिति और भी भयानक होगी विचारो के लिये धन्यवाद




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