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हमें अपनाइए और ………………………. पछताइए

Posted On: 5 Dec, 2010 Others में

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मै  काफी  दिनों  से  अपने  बढ़ते  हुए  वजन  से  बहुत  चिंतित  हूँ  और  रोज़  सोचता  हूँ  की   कल  सुबह  से  रोज़  जोगिंग   के  लिए  जाऊँगा , और  फिर  कल्पना  के  पंखो  पे  सवार  होकर  सोचने  लगता  हूँ  की  मेरा  भी  जोगिंग  करने  से  वजन  कम  होगा  और  फिर  कुछ  दिनों   में  ही  मै व्यायाम    शुरू  कर  दूंगा   और  मेरे  भी  सिक्स  पैक  हो  जायेंगे . पर  वास्त्क्विकता  तो  यही  है  की  मेरे  ये  हवाई  किले , हवा  में    ही  रह  जाते  हैं  और  मै  सिक्स  पैक  का  बजाये  फॅमिली  पैक  के  साथ  घूम  रहा  हूँ , और  वो  कल  कभी  आता  ही  नहीं .

 

ये  मेरी  ही  नहीं  बल्कि  मेरे  जैसे  ना  जाने  कितने  लगों  की  समस्या  है . हम  रोज़  बहुत  सारे  कामो  को  करने  का संकल्प    करते तो  हैं  पर  करते  नहीं  है , या  करते  हैं  तो  बहुत  जल्दी  उसमे  रुचि  खो  बैठते  हैं . इस  समस्या  को  PROCRASTINATION  कहते  हैं . यानि  ताल  मटोल  करना , इससे  प्रभावित  व्यक्ति , हमारी  प्रसिद्ध  उदाहरण  “ काल  करे  सो  आज   करे  और  आज  करे  सो  अब ”  के  बजे  “आज  करे  सो  काल  करे , काल  करे  सो  परसों , इतनी  जल्दी  कहे  की , अभी  तो  जीना  बरसों  को  फोल्लो  करता  है  .

 

procrastination  के  मानसिक  और  शारीरिक   दोनों  कारण  होते  हैं , मानसिक  रूप  से  ग्रसित   व्यक्ति  अत्यधिक   उत्सुकता , कम  आत्म  विश्वास  और  सपनो  में  जीने  वाला  होता  है , जिसका  काम  ही  हवाई  किले  बनाना  होता  है, उसके  विपरीत  शारीरिक  रूप  से  प्रभावित  व्यक्ति  में  ये  PRE FRONTAL CORTEX नाम  के  एक  ग्रंथि  के  कारण  होता  है   जो  हमारे  मस्तिष्क  में  फ़िल्टर  का  काम  करता  है. इसका  काम  होता  है ,  हमारे  एकाग्रता   को  बनाये  रखना  और  अगर  ये  ठीक  से  काम  ना  करे  तो  व्यक्ति  प्रोक्रैस्तिनैशन  का  शिकार  हो  जाता  है.

 

अगर  मै  इससे  प्रभावित  व्यक्ति  के  लक्षण  बताने  लागून  तो  ये  लेख  बहुत  लम्बा  हो  जायेगा इसलिए मै ये आप पर ही छोड़ता    हूँ की आप खुद ही …………  इसलिए  मै  केवल  इस  से  बचने  के  कुछ उपाय   आपके  साथ  बांटना  चाहूँगा

 

1.      किसी  भी  कार्य  को  करते  समय , अपने  आप  को  प्रेरित  करते  रहें  की  दुनिया  में  कोई  भी  सम्पूर्ण  नहीं  है और कार्य को करने में विफलता आपको हतोस्साहित  , या  ये की वर्तमान  से  अच्छा  कोई  समय  नहीं  है

2.      अपने  कार्यों  को  महत्व  के  आधार  पर  बांटे  और  जिसका  महत्त्व  सबसे  अधिक  है , उसे  पहले  करें

3.      कार्य  समाप्ति  की  एक   समय  सीमा  निश्चित करें  और  उसी  में  उसे  पूरा  करने  का  प्रयास  करें  

4.      कार्य  को  करने  के  लिए  जो  आपको  सबसे  सही  समय  लगे  तभी  करें

5.      किसी  भी  बड़े  कार्य  को  छोटे  छोटे  पार्ट्स  में  बाँट  कर  के  उसे  करें

6.      किसी  भी  तरह  की  विघ्न  से  बचें

7.      बीच  में  ब्रेक  लेते  रहें  पर  ब्रेक  इतना  लम्बा  ना हो  की  आप  उस  कार्य  के  बजाये  किसी  और  कार्य  में  लग  जाएँ.  

8.      कठिन  और  आरूचिकर   कार्यों  को  पहले  करें  ताकि  बाद  में  आसन  काम  कर  सकें

9.      अपने  पर  प्रेशर  टैक्टिस   डालें , यानि  अगर  किसी  कार्य  को  करने  जा  रहें  हैं  तो  उसे  किसी  को  बताएं , इससे  आप  के  ऊपर  इस  काम  को  करने  का  दबाव  होगा वरना आप जिसे बताएँगे वो आपको कमजोर इरादों वाला और केवल बोलने वाला ही समझेगा    और ये आप पर प्रेशर डालेगा  की  आप उस कार्य को करें  

10.  सदा   रीसनैब्ल    गोअल  ही  सेट  करें , ताकि  आप  उस  कार्य  को  कर  सकें  

 

आशा   है  की  इन   बातों  से  से  आप  इस  आदत   से  अपने  आपको  बचा  सकेंगे  और  आपको  ये  नहीं  सोचना  पड़ेगा  की  काश  …………… हमने  अपने  समय  का  सदुपयोग   किया  होता. काश ……… 

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Triawsagrip के द्वारा
October 25, 2011

एक बहुत कुछ सीखा

HIMANSHU BHATT के द्वारा
December 22, 2010

अबोध जी…… इस ज्ञान वर्धक लेख के लिए धन्यवाद…… मेरा वजन भी कुछ ज्यादा ही हो गया है…… वैसे पिचले कुछ समय से त्रिफला का शहद के साथ सेवन कर रहा हूँ.

    abodhbaalak के द्वारा
    December 22, 2010

    हिमांशु जी अगर आपको इस के सेवन से लाभ हो रहा हो तो कृपा कर मुझे भी बताइएगा ताकि मै भी इसका सेवन करून और लोगों को भी ऐसा हे करने का praamarsh doon http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    December 22, 2010

    अबोध जी….. बाज़ार से त्रिफला (बिना कुटा हुआ) (हरड+ बहेड़ा+आवंला) लेकर उसे अधकुट लें…… फिर उसे रात में १ या २ चम्मच १/२ पानी से भरे गिलास में भीगा दें…… सुबह थोडा सा पानी मिलकर १ उबल निकले….. फिर १ चम्मच शहद मिलकर थोडा ठंडा होने पर पि जाये…… आपका पाचन भी ठीक होगा और मोटापा भी पंख लगा कर उड़ जायेगा…….

    abodhbaalak के द्वारा
    December 22, 2010

    हरीश ji aapka bahut bahut dhanyavaad, mai avashya in samaagri ko khareed kar iska prayod karne ka prayaas karoonga. agar wajan ghat gaya to aapko alag se …..

Aakash Tiwaari के द्वारा
December 6, 2010

अबोध जी, समय पर सही काम करने के जो तरीके बताये वो काफी महत्वपूर्ण है.एक सार्थक लेख के लिए बधाई… http://aakashtiwaary.jagranjunction.com आकाश तिवारी

    abodhbaalak के द्वारा
    December 6, 2010

    प्रोत्साहन और आपके कमेंट्स के लिए धन्यावाद आकाश जी, अच्छा लगत है जब को प्रंशसा करे और, और अच्छा लगत है अगर कोइ कोइ हि एस करें ऐसे हि प्रोत्साहन देते रहेन http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Wahid के द्वारा
December 6, 2010

केवल व्याकरण पर ध्यान दें अबोध जी अन्य विधाओं में आपकी पेशानगी का कोई मुकाबला नहीं | कुछ तो बात है आप में !!जो और किसी में नहीं

    abodhbaalak के द्वारा
    December 6, 2010

    वाहिद जी, aapke sujhav के लिए धन्यवाद bhavishy me प्रयास rahega कि vyaakaran par dhyan doon, आप ne abodh के protsaahan badhaane के लिए bade हि sundar shbd likhen है और इसके लिए alag से dhnyvaad ek baat और, मै aapke varanasi post par kai bare kament likhne का प्रयास kar chuka hoon par har baar maisage aata है कि kament के लिए log in करें. मै doosre किसी post par kament karta hoon to aisa kuchh नही hota, kripa kar के chek करें कि aisa kyon ho raha है kyonki mere samajh me to iska kaaran नही aa raha है hindi aur english ki khichdi ke liye maafi chahta hoon, is samay gmail me words convert nahi ho rahen hain is liye aise hi bhej raha hoon http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    वाहिद के द्वारा
    December 12, 2010

    प्रिय अबोध जी! मेरी तरफ़ से तो ऐसी कोई समस्या नहीं हैं| सुझाव मानें तो ब्राऊज़र बदल कर देख लें यानि कि इन्टरनेट एक्सप्लोरर की जगह गूगल क्रोम या फिर मोज़िला फायरफोक्स तकनीकी कारण दूर हो जायेंगे|(यदि हो सके तो अपने वर्तमान ब्राऊज़र का कैश और टेम्प फाइल डिलीट करें और उसे फिर स्टार्ट करें|) शुक्रिया|

nikhil के द्वारा
December 5, 2010

अबोध जी नमश्कार टाल मटोल की बुरी आदत तो थोड़ी बहुत मुझमे भी है …और आपका ये लेख पढ़कर मुझे भी इच्छा हो रही है की अब इस आदत को छोड़ देने में ही भलाई है …बहुत बेहतरीन लेख लगा ये..निश्चित रूप से ये कई लोगो के लिए उपयोगी भी होगा…आपको आभार इसके लिए

    abodhbaalak के द्वारा
    December 6, 2010

    निखिल जी, ये समस्या सम्भवतः हम सब के साथ हि है, हम सब हि कहीं न कहीं ताल माटोल के नीति अपनाते हैं, और ये भी सत्य है कि इस आदत से किसी का भाला नही होगा, सो आप भी प्रयास करें और मै भी, आपको लेख पसंद आय इसके लिए धन्यवाद, आगे भी आपसे मार्गदर्शन कि आशा और अनुरोध है http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Alka Gupta के द्वारा
December 5, 2010

श्री अबोध जी, समय नियोजन व अरुचिकर कार्यों को रुचिकर बनाने के उत्तम उपायों के  बारे में जानकारी देने वाली आपकी श्रेष्ठ रचना  है !    

    abodhbaalak के द्वारा
    December 5, 2010

    धन्यवाद अल्का जी आपने इस रूखे सूखे विषय को पसंद किआ इसके लिए खस् तौर पर आप्का आभारी हूँ http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Alka Gupta के द्वारा
    December 6, 2010

    आपका विषय रूखा सूखा तो किंचित मात्र भी नहीं लगता बल्कि  इसमें जीवन के उन सभी रसों का समावेश है जिनका थोड़ा भी अगर पान कर लिया जाए तो हरेक का जीवन  सरस बन जाए………। ऐसी रचना पोस्ट करने के के लिए धन्यवाद

    abodhbaalak के द्वारा
    December 6, 2010

    अल्का जी, ये आप्का स्नेह है को आप्का ये लेख अछा लगा, वास्तव मे विषय थोडा हात के था, और सम्भवतः इसी लिए लोगों को मजा नही आया, एक बार फिर से आपके प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com

rajkamal के द्वारा
December 5, 2010

अबोध जी , नमस्कार ! आप तो जानते ही है कि मेरा चीजों को देखने का नजरिया हट कर और उल्टा पुल्टा होता है … आप का यह गजब का लेख पढते हुए मेरा मन घूम रहा था कि परीक्षा हाल में परीक्षा पत्र को कैसे हल करे ?…. अगली बार उसके बारे में भी कोई लेख लिख डाले …. जान कि अमान पाऊं तो एक अर्ज करना चाहता हूँ कि इस अबोध से बालक जोकि अजब सी मासूमियत लिए हुए है इतना ओवरवेट कैसे हो गया ….लगता है कि दूध असली और कुछ ज्यादा मात्रा में ही मिला करता है …. अगर इतना ही ज्यादा दूध और वजन हो गया है तो थोड़ा बहुत वजन और दूध हमको भी भिजवा दे … बड़ी ही मेहरबानी होगी आपकी …

    abodhbaalak के द्वारा
    December 5, 2010

    राज जी मेरे एक और लेख पर (सन्तुलन) पर मुझे ये कहाँ गया कि आपने अपने निजि अनुभव पर आधारित अछा लेख लिख, विसे हि इस विषय पर आप ये कह रहेन हैन कि एक बालक इतना ओवर वेट कैसे हो गया. भय्या लेखक को इतना फ्रीडम तो दीजिये, कल इस विषय पर कुछ पधा था तो थोडा इधर उधर कर के लेख बन दिया, दूध दहि बहुत महंगी हो गई है, चाइ पीने को मिलता नही है खायेंगे कहाँ से? और कुछ कहें, कोइ और क्लैरिफिकेशन ….. आप्का अबोध

Harish Bhatt के द्वारा
December 5, 2010

अबोध जी नमस्कार. आपने बहुत ही अच्छी बातें इस लेख में बताई है. हार्दिक बधाई.

    abodhbaalak के द्वारा
    December 5, 2010

    हरिश जी आप्का धन्यवाद, कि आपको वो पसंद आय जो किसी और को नही आ रह है. ऐसे हि इस अबोध कि हिम्मत बढाते रहेन http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Rashid के द्वारा
December 5, 2010

अरे अबोध भाई !! क्या आप ने मेरी कहानी लिख दी है मैं भी टालमटोल की प्रवृत्ति से ग्रस्त हूँ रोज़ सोचता हूँ की ऐसा करूँ वैसा करूँ लेकिन ,, फिर कल पर या अगली छुट्टी पर छोड़ देता हूँ !! चलिए आप ने नुस्खो पर अमल करूंगा !! मेरे पिछले लेख पर आप नदारत है ,, कोई नाराजगी होगई क्या :) राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    abodhbaalak के द्वारा
    December 5, 2010

    रशिद जी, कल एक किताब इस सब्जेक्त पर पढ रह था, उसमे इस विषय को कफी महत्व दिया गया था, और कारिअर मे विफल होने का सबसे मैन कारण कहाँ गया था, बस थोडा बह्तु खीच तान कर लेख बन दिया पर लगत है कि किसी को ये पसंद नही आय. खैर आपने तो वो शेर सुन हि होगा कि … गिरते हैन शाह्स्वार हि मैदान jang मे…. सो फिर से देखेंगे कि वो परोस जाए तो पब्लिक को पसंद आए , आपके प्यार और कमेन्ट के लिए shukria . http://abodhbaalak.jagranjunction.com

आर.एन. शाही के द्वारा
December 5, 2010

अबोध जी, आपने टालमटोल की प्रवृत्ति को एक रोग बताते हुए उसके उपचार की भी जानकारियां दी है , बधाई ।

    abodhbaalak के द्वारा
    December 5, 2010

    शाही जी जैस कि मैने निशा जी को भी लिख, शायद मै अपने लेख मे इस विषय को ठीक से डील नही कर सका, इसे तो इस लायक भी नही सम्झा जा सका कि …. खैर , आपके प्रोत्साहन और स्नेह के लिए धन्यवाद. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

nishamittal के द्वारा
December 5, 2010

धन्यवाद अबोध जी,व्यवहारिक जीवन से सम्बद्ध व्यवहारिक सुझाव देने के लिए.वैसे भी सामन्यतया काम को टालना आदत बन जाती जिसके कारण कई बार बहुत हानि उठानी पड़ती है.व्यवहारिक सुझाव.

    abodhbaalak के द्वारा
    December 5, 2010

    निशा जी मेरा इस लेख को लिखने का उद्देश्य हि यहि था कि लोग इस समस्या के बारे मे जानकार इससे बच सकें , पर लगत है कि मै अपने प्रयास मे सफल नही हो सका , मंच पर इस तरह का प्रयास सम्भवतः ज्यादा पसंद नही किया जाता . आपके प्रोत्साहन और विचारों के लिए धन्यवाद http://abodhbaalak.jagranjunction.com


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